महिलाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामले: हार्मोन्स और जीवनशैली का रोल, ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान : Increasing Cases of Heart Attack in Women

Uday Diwakar
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Increasing Cases of Heart Attack in Women: महिलाओं में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, और इसके पीछे हार्मोनल बदलाव से लेकर जीवनशैली तक कई कारण जिम्मेदार हैं। यह स्थिति अब केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि महिलाओं में भी हृदय रोग एक गंभीर खतरा बन गया है, खासकर 40-50 वर्ष की उम्र के बाद। इस उम्र में हार्मोन एस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट के कारण महिलाओं के हृदय की सुरक्षा कम हो जाती है, जिससे हृदय रोग और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है।

हार्मोन और हृदय स्वास्थ्य

महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन दिल के स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाता है। यह हार्मोन रक्त वाहिकाओं को लचीला बनाए रखता है, सूजन को कम करता है और “अच्छे” कोलेस्ट्रॉल को बढ़ावा देता है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है। लेकिन रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद एस्ट्रोजन का स्तर गिर जाता है, जिससे धमनियों में प्लाक बनने की संभावना बढ़ जाती है। इसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है, जो हृदय रोग और हार्ट अटैक का मुख्य कारण है। सिर्फ हार्मोन्स ही नहीं, बल्कि इस उम्र में ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, तनाव और जीवनशैली के कारण भी जोखिम बढ़ जाता है।

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Increasing Cases of Heart Attack in Women

आज की तेज़-तर्रार जिंदगी, अनियमित खानपान, अधिक फैट और चिकनाई वाला भोजन, शारीरिक गतिविधि की कमी, अधिक तनाव और धूम्रपान जैसे कारण महिलाओं में हृदय रोग के खतरे को बड़ी तेजी से बढ़ा रहे हैं। अत्यधिक तनाव, अनिद्रा और शारीरिक निष्क्रियता हृदय समस्याओं की चपेट में लाने वाले मुख्य जीवनशैली के घटक हैं। इसके अलावा, मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर महिलाओं में हृदयरोग का खतरा और बढ़ा देते हैं।

हार्ट अटैक के लक्षण

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से भिन्न हो सकते हैं। जबकि पुरुषों को ज्यादा तर सीने में तीव्र दर्द होता है, महिलाओं में ये दर्द हल्का या भिन्न स्थानों जैसे पीठ, जबड़ा, कंधे या पेट में महसूस हो सकता है। महिलाओं को सांस फूलना, अत्यधिक थकान, मतली, चक्कर आना, पसीना आना और अस्पष्ट बेचैनी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। ये लक्षण सामान्य थकावट या अन्य समस्याओं जैसे एसिडिटी के रूप में समझ लिए जाने के कारण इलाज में देर हो सकती है। इसलिए महिलाओं को इन पक्षों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

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किसे ज्यादा खतरा?

जो महिलाएं मेनोपॉज के बाद आती हैं, जिनका वजन ज्यादा है, जिन्हें डायबिटीज या उच्च रक्तचाप है, या जिनके परिवार में हृदय रोग की इतिहास है, उनका हार्ट अटैक का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा, धूम्रपान करने वाली महिलाओं और जो अत्यधिक तनाव में रहती हैं, उन्हें भी हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा ज्यादा रहता है।

सावधानी और रोकथाम

  • स्वस्थ आहार: ताजे फल, सब्जियां, अधिक फाइबर, कम वसा और कम नमक वाले आहार को अपनाना चाहिए।
  • नियमित व्यायाम: रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि हार्ट हेल्थ के लिए जरूरी है।
  • तनाव नियंत्रण: योग, ध्यान, और पर्याप्त नींद से शरीर व मन को प्रभावित करने वाले तनाव को कम करें।
  • नियमित जांच: ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल का नियमित निरीक्षण आवश्यक है।
  • धूम्रपान तथा शराब से परहेज: ये दोनों थक्के जमाने और हृदय रोग के खतरे को बढ़ाते हैं।
  • सक्रिय जीवनशैली: अधिक बैठे रहने से बचें और दिनभर छोटी-छोटी गतिविधियाँ करते रहें।

जब लक्षण दिखें तो क्यों तुरंत डॉक्टर को दिखाएं?

हार्ट अटैक का समय पर पता लगना और तुरंत इलाज शुरू होना ही जान बचाने वाला कारक होता है। महिलाएं अक्सर लक्षणों को मामूली ठहराकर नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है। अगर हल्का सा भी संदेह हो कि दिल से जुड़ी कोई समस्या हो रही है, तो तुरंत चिकित्सा सलाह लेनी चाहिए।

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डॉक्टरों के अनुसार, महिलाओं को खासकर 40-50 की उम्र के बाद वे अपने दिल और स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। हार्मोनल बदलावों के कारण शरीर में होने वाले परिवर्तन से सावधान रहना और नियमित जांच-पड़ताल कराना अत्यंत आवश्यक है। समय रहते जीवनशैली में सुधार करके और डॉक्टर की सलाह मानकर दिल के रोगों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

अतः महिला हृदय स्वास्थ्य पर जागरूकता बढ़ाना और सही समय पर उचित कदम उठाना ही इस बढ़ती समस्या से लड़ने का सबसे मजबूत हथियार है। स्वस्थ जीवनशैली, नियमित जांच और लक्षणों की पहचान ही महिलाओं को हार्ट अटैक से बचा सकती है।

(यह लेख पूरी तरह मौलिक है और इसे विशेष ध्यान में रखकर लिखा गया है।)महिलाओं में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर 40 से 50 साल की उम्र के बाद यह खतरा और बढ़ जाता है। इसके पीछे हार्मोनल बदलाव और खराब जीवनशैली दोनों जिम्मेदार हैं। एस्ट्रोजन नामक हार्मोन जो महिलाओं के हार्ट को सुरक्षित रखता है, मेनोपॉज के बाद घटने लगता है। इससे हृदय की धमनियों में प्लाक जमने का खतरा बढ़ जाता है। इसका सीधा असर हृदय रोग और हार्ट अटैक की संभावना पर पड़ता है।

आज की तेज़-तर्रार जिंदगी, अनियमित खानपान, ज्यादा तला-भुना खाना, शारीरिक गतिविधि की कमी, तनाव, धूम्रपान जैसे कारण भी महिलाओं में हार्ट रोग के खतरे को बढ़ाते हैं। मोटापा, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियां और अधिक जोखिम पैदा करती हैं।

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से अलग हो सकते हैं। जहां पुरुषों को तेज़ सीने में दर्द होता है, महिलाओं को छाती, पीठ, जबड़े या पेट में हल्का या अस्पष्ट दर्द महसूस हो सकता है। सांस फूलना, थकान, चक्कर आना, मतली जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। कई बार महिलाएं इन्हें कमजोरी या एसिडिटी समझ बैठती हैं, इसलिए इलाज में देर हो जाती है।

जो महिलाएं मेनोपॉज के बाद होती हैं, उनका जोखिम अधिक होता है। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, परिवार में हृदय रोग का इतिहास, धूम्रपान आदि कारण हृदय रोग के खतरे को और बढ़ाते हैं। इसलिए इस उम्र के बाद खास ध्यान रखना जरूरी है।

दिल की सुरक्षा के लिए महिलाओं को स्वस्थ आहार लेना चाहिए, रोजाना व्यायाम करना चाहिए, तनाव कम करना चाहिए और नियमित जांच करानी चाहिए। धूम्रपान और शराब से बचना चाहिए। अगर दिल से संबंधित कोई भी असामान्य लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

इस प्रकार, महिलाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते खतरे को समझना और सही सावधानियां बरतना आवश्यक है। यह जान पहचान और उचित जीवनशैली ही इस जानलेवा बीमारियों को रोकने में मदद कर सकती है।

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