in Nepal prisoners staged a major jail break : नेपाल में भारी हिंसक प्रदर्शनों के बाद देश की 18 जेलों से 6,000 से अधिक कैदी फरार हो गए। यह भव्य जेल ब्रेक घटना नेपाल में जारी राजनीतिक संकट और अस्थिरता का एक कड़ा उदाहरण है, जिसने न केवल देश की कानून व्यवस्था को हिला कर रख दिया है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भी नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। इस खबर में इस घटना की पूरी विस्तृत जानकारी दी गई है जिसकी लंबाई लगभग 2000 शब्द है।
in Nepal prisoners staged a major jail break
नेपाल पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक उथल-पुथल का शिकार है। युवाओं के एक बड़े वर्ग ने ‘Gen Z’ नामक आंदोलन शुरू किया, जिसमें उन्होंने मौजूदा सरकार की नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ जोरदार विरोध किया। यह आंदोलन धीरे-धीरे हिंसक रूप ले गया, जिसमें कई स्थानों पर तोड़फोड़, आगजनी और प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़पें हुईं। इस राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता के बीच ही मंगलवार को देश के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शनों की खबरें सामने आईं।
प्रदर्शनकारियों द्वारा हिंसक घटनाओं के दौरान देश की लगभग 18 जेलों में बर्बरता की गई। जेलों के गेट, दीवारें तोड़ी गईं, और कई जगह आगजनी हुई। इससे कैदियों ने फायदा उठाया और जेलों से भागने के लिए अवसर निकाला। पुलिस और सुरक्षा बलों की विफलता के कारण कैदियों ने बंदीगृहों को छोड़कर फरार होने के रास्ते तलाशे।
18 जेलों से 6,000 से अधिक कैदी फरार
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को हुए इस हिंसक प्रदर्शन के बाद 18 जेलों से लगभग 6,000 से अधिक कैदी फरार हो गए। इनमें से लगभग 15 जेलों से ही आधिकारिक तौर पर 5,727 कैदियों के फरार होने की पुष्टि हुई है। केन्द्रीय कारागार नख्खु जेल और तनहुं जेल से कई कैदियों के भागने की संख्या अभी भी अस्पष्ट है।
प्रमुख जेलों से फरार कैदियों की संख्या इस प्रकार है:
- झुम्का जेल से 1,575 कैदी
- पोखरा जेल से 900 कैदी
- चितवन जेल से 700 से ज्यादा कैदी
- महोत्तरी की जलेश्वर जेल से 576 कैदी
- अन्य जेलों जैसे नरकु, कैलाली, कपिलबस्तु, कंचनपुर आदि से भी काफी संख्या में कैदी भागे
यह घटना नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता, कमजोर सुरक्षा, और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम मानी जा रही है। जेलों में सुरक्षा व्यवस्था डाली गई जानकारों के मुताबिक उचित नहीं थी। कुछ जांच रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जेल स्टाफ की भारी कमी और आपसी तालमेल की कमी ने इस भयंकर घटना को संभव बनाया। प्रदर्शनकारियों की हिंसक हरकतों ने भी परिस्थितियों को और बिगाड़ दिया।
नेपाल में लंबे समय से भ्रष्टाचार और कानूनी व्यवस्था की कमी सामाजिक असंतोष को जन्म दे रही है। युवा वर्ग खासकर बेरोजगारी, गरीबी और सरकारी भ्रष्टाचार से खासा नाराज है। ऐसे माहौल में जेलों में भी कैदियों की बढ़ती संख्या और सुरक्षा व्यवस्था में कमजोरियां बड़े हादसे के लिए कारण बनीं।
नेपाल सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और देश भर में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी है। खास तौर पर उन जगहों पर जहां जेलें बनी हैं या जहां से कैदी फरार हुए हैं। सेना को भी एक्टिव कर दिया गया है ताकि वे कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद करें। गृह मंत्रालय ने बीते दिनों ही कई बार चेतावनी जारी की है कि प्रदेशों में अशांति पैठ सकती है, लेकिन इतनी बड़ी घटना के लिए कोई तैयार नहीं था।
सरकार का कहना है कि फरार हुए कैदियों को जल्द पकड़ने के लिए विभिन्न एजेंसियों को आदेश दिए गए हैं। वहां के पुलिस विभाग और सेना के संयुक्त अभियान जारी हैं। देश के प्रमुख क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। नख्खु और तनहुं जेल से फरार हुए कैदियों की तालाश तेज कर दी गई है।
भारत नेपाल सीमा की सुरक्षा
नेपाल भारत की खुली सीमा वाला देश है। लगभग 1,751 किलोमीटर लंबी यह सीमा बड़े पैमाने पर खुली है, जिसके कारण नेपाल से भारत में अपराधियों और फरार कैदियों के आने-जाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इस जेल ब्रेक की घटना के बाद भारत ने सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है।
भारत के गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) को सख्त आदेश दिए हैं। बिहार व उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में अतिरिक्त पोस्ट बनाए गए हैं। साथ ही सीमा के उन हिस्सों में निगरानी के लिए ड्रोन्स और अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सीमा पर बीते कुछ दिनों में नेपाल से भागे कुछ कैदियों को पकड़ने की खबरें भी आई हैं। इससे भारत में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
फरार कैदियों की भारत में कोशिशें और गिरफ्तारी
कुछ कैदियों ने नेपाल से भारत में प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें पकड़ने का दावा किया है। नेपाल शहर सोनौली सीमा पर एसएसबी के जवानों ने चार भारतीय कैदियों को गिरफ्तार किया है जो नेपाल की जेल से फरार थे। इसके अलावा अन्य कैदियों को भी सीमाइ क्षेत्रों में दबोचा गया है।
भारत और नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां मिलकर फरार कैदियों की तलाश में लगी हैं। दोनों देश अपने-अपने बॉर्डर इलाकों में हाई अलर्ट पर हैं ताकि इस खतरे को रोका जा सके।
6,000 से अधिक कैदियों का फरार होना नेपाल की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा झटका है। इससे वहाँ की आम जनता भी असुरक्षित महसूस कर रही है। अतिरिक्त सुरक्षा और कड़ी निगरानी के बीच भी लोगों में भय बना हुआ है। अपराधियों के एक बड़े समूह के बाहर निकलने से अपराध दर में वृद्धि की संभावना बनी है।
आर्थिक तौर पर भी यह घटना देश की छवि के लिए नकारात्मक है। निवेशक और पर्यटक इस तरह की खबरों से हिचकिचा सकते हैं, जिससे नेपाल की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है। सरकार इसे लेकर चिंतित है और सुरक्षा सुधार के लिए जरूरी कदम उठाने का प्रयास कर रही है।
नेपाल सरकार को इस जेलब्रेक के बाद जेल सुधार की गंभीर आवश्यकता महसूस हुई है। सरकार अब कैदियों की संख्या को नियंत्रण में लाने, जेलों की सुरक्षा बढ़ाने और कैदियों के लिए सुधारात्मक कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रही है।
ये सुधार न केवल जेलों की सुरक्षा को मजबूत करेंगे, बल्कि कैदियों के पुनर्वास में भी मदद करेंगे। प्रशासन भारतीय जेल व्यवस्थाओं और अन्य देशों के जेल सुधार मॉडलों को भी देख रहा है ताकि नेपाल की व्यवस्था को आधुनिक बनाया जाए।
नेपाल में मंगलवार को हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद 18 जेलों से 6,000 से ज्यादा कैदी फरार होना एक गंभीर राष्ट्रीय संकट है। यह घटना नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता, कमजोर प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्थाओं को उजागर करती है।
इस कठिन समय में नेपाल सरकार और सेना द्वारा उठाए गए कदम महत्वपूर्ण हैं, लेकिन स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए और भी कड़े उपाय जरूरी हैं। भारत-नेपाल सीमा पर भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है ताकि सीमा पार अपराधियों की गतिविधियों को रोका जा सके।
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