In Ambikapur the Shivshankar Kirtan Mandali will uphold a 46-year-old tradition: सरगुजा:अंबिकापुर। महाशिवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर एक बार फिर अंबिकापुर शिवभक्ति के रंग में रंगने जा रहा है। प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री शिवशंकर कीर्तन मण्डली, केदारपुर द्वारा भगवान शिव जी की ऐतिहासिक एवं भव्य बारात निकाले जाने की तैयारियां जोरों पर हैं।
इसी क्रम में मण्डली के सदस्यों का एक दल माँ गौरी मंदिर पहुँचा, जहाँ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ श्री गौरीशंकर विवाह निमंत्रण पत्र का विधिवत आदान-प्रदान किया गया। यह 46 वर्ष पुरानी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो स्थानीय शिवभक्तों के बीच गहरी आस्था जगाती है।
श्री शिवशंकर कीर्तन मण्डली की स्थापना 1980 के दशक में हुई थी, जब केदारपुर के कुछ भक्तों ने भगवान शिव की भव्य शोभायात्रा आयोजित करने का संकल्प लिया। विगत 46 वर्षों से लगातार यह मण्डली शिवमंदिर सहेली गली, केदारपुर से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरने वाली शिवबारात निकाल रही है। इस बारात में भगवान शिव के विभिन्न रूपों की प्रतिमाएँ, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनियाँ, भक्ति भजनों की धुनें और सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति इसे अंबिकापुर का प्रमुख धार्मिक आकर्षण बनाती है।
मण्डली के वरिष्ठ सदस्यों के अनुसार, यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि सामुदायिक एकता का भी प्रतीक है। हर वर्ष हजारों की संख्या में भक्त इस बारात में शामिल होते हैं, जो महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर निकाली जाती है।
गौरीशंकर विवाह निमंत्रण की रस्म
माँ गौरी मंदिर में पहुँचे मण्डली सदस्यों ने पारंपरिक विधि-विधान से श्री गौरीशंकर विवाह का निमंत्रण पत्र देवी माँ को अर्पित किया। यह रस्म भगवान शिव-पार्वती के दिव्य विवाह का प्रतीक है, जो महाशिवरात्रि पर्व का मूल आधार है। पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच निमंत्रण पत्र का आदान-प्रदान किया गया, जिसके बाद मण्डली सदस्यों ने आरती उतारी और प्रसाद ग्रहण किया।
यह रस्म 46 वर्षों से चली आ रही है और इसे अंबिकापुर की धार्मिक संस्कृति का अभिन्न अंग माना जाता है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि माँ गौरी की कृपा से ही यह परंपरा सफलतापूर्वक निभाई जा रही है।
इस वर्ष की शिवबारात के लिए मण्डली ने विशेष तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। शिवमंदिर सहेली गली से प्रारंभ होने वाली यह बारात शहर के मुख्य बाजारों, धार्मिक स्थलों और प्रमुख चौराहों से होकर गुजरेगी। बारात में भगवान शिव का विशाल जुलूस, नंदी वाहन, डमरू वादक दल, भूत-प्रेतों के रूप में सजे कलाकार और भक्ति संगीत दल शामिल होंगे।
मण्डली के संयोजक ने बताया कि इस बार विशेष रूप से युवाओं को जोड़ने के लिए डिजिटल माध्यमों से प्रचार किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर बारात की जानकारी साझा की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक युवा पीढ़ी इस परंपरा से जुड़ सकें। इसके अलावा, स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों से भी सहयोग लिया जा रहा है।
अंबिकापुर के विभिन्न समाजों से इस बारात में सहयोग की अपील की गई है। स्थानीय प्रशासन ने भी यातायात और सुरक्षा व्यवस्था के लिए विशेष तैयारियाँ करने के निर्देश जारी किए हैं। पुलिस विभाग मार्ग सुगमता और भीड़ प्रबंधन हेतु विशेष टीम तैनात करेगा।
महिला मंडलियों द्वारा बारात मार्ग पर रंगोली सज्जा और स्वागत द्वार बनाए जाएँगे। स्कूली बच्चों को भी इस धार्मिक आयोजन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मण्डली ने स्थानीय पार्षदों और सामाजिक संगठनों से भी समन्वय स्थापित किया है।
महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व
महाशिवरात्रि हिंदू पंचांग का प्रमुख पर्व है, जो फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया था, यही कारण है कि इसे गौरीशंकर विवाह के रूप में भी जाना जाता है। रात्रि जागरण, शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाना, दूध-दही अभिषेक और भजन-कीर्तन महाशिवरात्रि के प्रमुख अनुष्ठान हैं।
अंबिकापुर में इस पर्व पर विभिन्न शिवमंदिरों में विशेष पूजाएँ आयोजित होती हैं। शिवशंकर कीर्तन मण्डली की बारात इस पर्व को और भव्य बनाने का माध्यम बनी हुई है।
मण्डली के युवा सदस्यों का कहना है कि डिजिटल युग में भी यह परंपरा जीवंत रखना चुनौतीपूर्ण है। वे लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो कवरेज के माध्यम से इसे व्यापक बनाने का प्रयास कर रहे हैं। युवाओं से आह्वान किया गया है कि वे इस सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखें।
स्थानीय शिक्षाविदों ने भी इस परंपरा को स्कूल पाठ्यक्रम से जोड़ने का सुझाव दिया है, ताकि नई पीढ़ी अपने सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित हो सके।
In Ambikapur the Shivshankar Kirtan Mandali will uphold a 46-year-old tradition
अंबिकापुर के निवासियों में शिवबारात को लेकर जबरदस्त उत्साह है। महिलाएँ घरों में विशेष सफाई और पूजा की तैयारियाँ कर रही हैं, जबकि पुरुष बारात में शामिल होने के लिए उत्सुक हैं। स्थानीय व्यापारियों ने भी विशेष छूट और भक्ति संगीत कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है।
यह परंपरा न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक बन चुकी है। विभिन्न जाति-धर्म के लोग इसमें भाग लेते हैं, जो अंबिकापुर की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है।
श्री शिवशंकर कीर्तन मण्डली ने सभी अंबिकापुरवासियों से आह्वान किया है कि वे इस पावन अवसर पर बढ़-चढ़कर भाग लें। महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ की कृपा सभी पर बरसने की कामना के साथ मण्डली अपनी 46 वर्ष पुरानी परंपरा को निरंतर निभाने के लिए कटिबद्ध है।
यह आयोजन अंबिकापुर की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में स्वर्णिम अध्याय जोड़ता रहेगा। सभी भक्तों से विनम्र अनुरोध है कि वे इस भव्य शिवबारात में अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें।
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