पतिव्रता के लिए खास: हरतालिका तीज पर मां गौरी का शृंगार कैसे करें : How to Decorate Maa Gauri on Hartalika Teej

Uday Diwakar
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  • हरतालिका तीज पर मां गौरी का विशेष शृंगार व्रत के फल को बढ़ाता है।
  • पतिव्रता महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी आयु और खुशहाली के लिए पूजा करती हैं।
  • मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा में 16 प्रकार के श्रृंगार का विशेष महत्व होता है।
  • व्रत के फल और समृद्धि के लिए पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा आवश्यक है।

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How to Decorate Maa Gauri on Hartalika Teej : हरतालिका तीज हिंदू धर्म का एक खास व्रत है, जिसे खासतौर पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए रखती हैं। इसके अलावा, कुंवारी लड़कियां भी इस व्रत को मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना के साथ करती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है, जिसमें मां गौरी का शृंगार करना महत्वपूर्ण होता है। इसे करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

पूजा की तैयारियां

पूजा की शुरुआत से पहले साफ-सफाई और शुद्धता का खास ध्यान रखें। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ सफेद या लाल रंग के वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को अच्छी तरह से साफ करके सजाएं और मां गौरी व भगवान शिव की मूर्तियां या चित्र स्थापित करें। पूजा के लिए आवश्यक सारे सामान जैसे फूल, सिंदूर, चंदन, दीपक, घी, पान, सुपारी, गुड़ और नैवेद्य तैयार रखें।

मां गौरी का शृंगार विधि

मां गौरी का शृंगार करने के लिए सबसे पहले उनकी प्रतिमा या चित्र को लाल चुनरी से ढकें क्योंकि लाल रंग शक्ति और शुभता का प्रतीक है। इसके बाद उनकी माथे पर सिंदूर लगाएं और लाल बिंदी चढ़ाएं। मां गौरी की मंदिर या पूजा स्थान पर चूड़ियाँ पहनाना भी शुभ माना जाता है। साथ ही मेहंदी लगाना भी व्रत के फल को बेहतर बनाता है। फूलों की मालाएं या ताज पहनाकर मां गौरी की पूजा की शोभा बढ़ाई जाती है।

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How to Decorate Maa Gauri on Hartalika Teej पूजा विधि और मंत्र

पूजा के दौरान भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले करें ताकि सभी बाधाएं दूर हों। फिर भगवान शिव के शिवलिंग पर पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद माता पार्वती की पूजा करें और उनके 16 श्रृंगार विधि से करें। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” और “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” जैसे शक्तिशाली मंत्रों का जप करें। पूजा समाप्ति पर कथा सुनना या पढ़ना शुभ होता है और यह व्रत का महत्व बढ़ाता है।

व्रत का फल और दान

व्रत के फल की प्राप्ति के लिए पूजा के बाद किसी सुहागिन ब्राह्मणी महिला को वस्त्र, सिंदूर, चूड़ियाँ और भोजन दान करें। इससे व्रत का प्रभाव और भी बढ़ता है। ध्यान रखें कि व्रत पूर्ण श्रद्धा, मनोभाव से और नियमपूर्वक करना चाहिए। शाम को आरती और प्रसाद वितरण के साथ व्रत का समापन करें।

व्रत के लाभ

हरतालिका तीज पर मां गौरी के इस खास शृंगार से पति की लंबी आयु, परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है। यह व्रत स्त्रियों के लिए विशेष रूप से शुभ और फलदायी माना जाता है। मां पार्वती की कृपा से हर परिवार में सौभाग्य और खुशहाली बनी रहती है।

समापन

इसलिए, इस पावन अवसर पर विधि-विधान से मां गौरी का श्रृंगार कर भक्ति पूर्ण पूजा करें और अपने जीवन में सुख-समृद्धि का आह्वान करें। हरतालिका तीज का यह व्रत आपके जीवन को खुशियों से भर दे।

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