Hindi fortnight concludes and guest house is inaugurated at Jawahar Navodaya Vidyalaya Surguja: सरगुजा:अम्बिकापुर। जवाहर नवोदय विद्यालय, सरगुजा में हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह एवं नवनिर्मित अतिथि गृह का शुभारंभ आयोजन बड़े उत्साह और सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन विद्यालय के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ, जिसमें हिंदी भाषा के विकास, विद्यार्थी प्रतिभा के संवर्धन और आधुनिक सुविधाओं के निर्माण का समन्वय देखने को मिला। पूरे समारोह में विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों, क्षेत्रीय सांसद, और समाज के गणमान्य व्यक्तियों ने सक्रिय रूप से भाग लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे यह आयोजन शिक्षाप्रद, मनोरंजक और प्रेरक बन गया।
Hindi fortnight concludes and guest house is inaugurated at Jawahar Navodaya Vidyalaya Surguja
जवाहर नवोदय विद्यालय में हिंदी पखवाड़ा प्रतिवर्ष मनाया जाता है, जिसका मूल उद्देश्य हिंदी भाषा की महत्ता को प्रोत्साहित करना, विद्यार्थियों में भाषा प्रेम को बढ़ावा देना, उनकी अभिव्यक्ति कला को विकसित करना और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखना होता है। यह आयोजन दो सप्ताह तक चलता है, जिसमें कविता लेखन, निबंध, कहानी, सुलेख, चित्रकला, प्रश्नोत्तरी, वाद-विवाद, नृत्य, और गीत जैसी गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। इस वर्ष भी 14 से 28 सितंबर तक हिंदी पखवाड़ा मनाया गया, जिसका समापन समारोह विशेष आयोजन के साथ संपन्न हुआ।
समारोह की शुरुआत विद्या के देवता माँ सरस्वती की वंदना से हुई, जिसके बाद दीप प्रज्वलन किया गया। विद्यार्थियों ने देशभक्ति और सांस्कृतिक गीतों से सभा को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह की मुख्य शोभा सांसद चिंतामणि महराज की उपस्थिति से हुई, जिन्होंने हिंदी भाषा के प्रति अपने गहन श्रद्धा और विद्यार्थियों को प्रेरित करने के भाव प्रकट किए।

सांसद चिंतामणि महराज का प्रेरणादायक उद्बोधन
सांसद ने अपने उद्बोधन में हिंदी भाषा की महत्ता, इतिहास और उसकी सामाजिक, सांस्कृतिक भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी सिर्फ भाषा नहीं, हमारी संस्कृति की आत्मा है जो हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है। “हिंदी को सशक्त बनाना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है। हमारी भाषा में हमारी सांस्कृतिक पहचान निहित है, जो हमें एकता और समरसता की दिशा में अग्रसर करती है।” सांसद महराज ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे हिंदी भाषा को वाणी का माध्यम ही नहीं बल्कि संवेदनाओं, विचारों और कल्पनाओं के अभिव्यक्ति का सर्वोत्तम माध्यम बनाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षण संस्थान जैसे नवोदय विद्यालय हिंदी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जहां ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चे भी आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहते हैं। भाषाई विविधता की कदर करते हुए हिंदी को सभी स्तरों पर अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने नवनिर्मित अतिथि गृह के उद्घाटन की भी सराहना की, जिससे विद्यार्थियों और आगंतुकों को बेहतर सुविधा मिलेगी।

हिंदी पखवाड़ा के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं ने विद्यार्थियों की प्रतिभा और रचनात्मकता को नए आयाम दिए। बच्चों ने कविता, कहानी, निबंध, सुलेख, चित्रकला, प्रश्नोत्तरी, वाद-विवाद और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भाग लेकर हिंदी भाषा के प्रति अपने अनुराग का प्रदर्शन किया। प्रत्येक प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को समारोह में पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
प्रतियोगिता के विजेताओं में अमित कुमार, हिना खानम (कविता लेखन), प्रीति कुमारी, अभिराम यादव (सुलेख), निरंजन कुमार, अपराजिता राज (निबंध), कविता कुमारी, आरुषि कुमारी (कहानी लेखन), अंकित कुमार, गोपाल कृष्ण (पेंटिंग और चित्रकला), विक्रम कुमार, हिमांशी (प्रश्नोत्तरी) प्रमुख रूप से सम्मिलित थे। इन विधाओं में बच्चों की प्रस्तुति न केवल उच्च स्तरीय थी, बल्कि उनके प्रयासों ने हिंदी के प्रति नए उत्साह का संचार भी किया।
प्रतियोगिताओं के अलावा बच्चों द्वारा प्रस्तुत गीत, नृत्य, नाटिका और कविताएँ सभा को मनोहर और उल्लसित बनाने में सहायक हुईं। इससे न केवल बच्चों का मनोबल बढ़ा बल्कि हिंदी भाषा व साहित्य के प्रति उनमें नए प्रकार की लगाव जागृत हुई। प्रतिभागियों ने सामाजिक, नैतिक और सांस्कृतिक विषयों पर हिंदी के माध्यम से संवेदनशीलता और जागरूकता भरी अभिव्यक्ति की।

समारोह का एक और विशेष आकर्षण था विद्यालय के परिसर में बने अतिथि गृह का उद्घाटन। स्कूल प्रशासन ने दशकों से अतिथि गृह निर्माण की आवश्यकता के लिये पहल की थी, जिससे पर्यवेक्षक, अभिभावक और अतिथि बिना किसी असुविधा के विद्यालय में ठहर सकें। सांसद चिंतामणि महराज ने अतिथि गृह का फीता काटकर विधिवत उद्घाटन किया। उन्होंने इस उपक्रम की सराहना करते हुए बताया कि आधुनिक सुविधाओं के साथ अतिथि गृह विद्यालय की गरिमा को बढ़ाएगा और विद्यालय की सेवाओं में सुधार लाएगा।
विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकों और अभिभावकों ने मिलकर इसे एक उपलब्धि बताया और आशा जताई कि भविष्य में इस तरह के और निर्माण कार्य विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था को और उन्नत बनाएंगे। अतिथि गृह में रहने की बेहतर व्यवस्था, साफ-सफाई, सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे आगंतुकों का अनुभव सुखद हो।
विद्यालय के हिंदी विभाग के प्रभारी प्रमोद कुमार, भागवत प्रसाद, नीलम शर्मा, रघुनाथ मंडल आदि शिक्षकों ने पूरे आयोजन में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बच्चों की भाषा प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ उन्हें हिंदी की महत्ता समझाई, जिससे बच्चे अपनी भाषा के लिए जागरूक हुए। समझाया गया कि हिंदी भावनाओं, संस्कारों और विचारों का संप्रेषण करती है जो हमें हमारी संस्कृति की ओर वापस जोड़ती है।
अभिभावकों ने विद्यालय प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों में भाषा के प्रति आत्मसम्मान और राष्ट्रीय भावना का संचार करते हैं। उन्होंने आगे भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने की मांग की जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। शिक्षक-शिक्षिका और अभिभावक मिलकर न केवल विद्यार्थियों की सहायता करते हैं बल्कि उनका उत्साह भी बढ़ाते हैं।
समापन समारोह में विद्यार्थियों ने समर्पित भाव के साथ संस्कृतिपरक प्रस्तुतियां दीं। इनमें सरस्वती वंदना, राष्ट्रगान, लोकगीत, समूह नृत्य और हिंदी कविताएं प्रमुख थी। प्रस्तुतियों ने समाज में चेतना, प्रेम और भाषा के प्रति सम्मान का संदेश दिया। नाटिका एवं संवादों के माध्यम से बच्चों ने हिंदी के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में विद्या के महत्व को समझाते हुए बच्चों ने हिंदी भाषा की बेमिसाल भूमिका प्रस्तुत की जो न केवल संवाद का माध्यम है बल्कि समाज के निर्माण में सहायक भी है। इस तरह का आयोजन बच्चों के लिए शिक्षा के साथ संस्कार व संस्कृति का भी सशक्त स्तंभ बनता है।
समारोह का मुख्य संदेश यही था कि हिंदी न केवल संवाद की भाषा है, बल्कि यह भारत की आत्मा और सांस्कृतिक मूल है। शिक्षकों, सांसद एवं अभिभावकों ने हिंदी को शिक्षा प्रणाली में मजबूत करने, प्रशासन में बढ़ावा देने और इकाई भाव के लिए आवश्यक बताया। हिंदी पखवाड़ा जैसे आयोजन समाज में भाषा के प्रति जागरूकता फैला रहे हैं, विशेष रूप से नवोदय विद्यालय जैसे संस्थान ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और संस्कृति के केंद्र बन रहे हैं।
प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे हिंदी को न केवल स्कूल की भाषा बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएंगे। यह भावना सभी में समाई कि भाषा प्रेम से ही राष्ट्रीयता और सामाजिक समरसता मजबूत होती है।
प्राचार्य तथा विद्यालय प्रशासन ने कहा कि भविष्य में पाठ्यक्रम एवं अध्यापन पद्धति में हिंदी को और प्रभावी बनाना, आधुनिक तकनीकी संसाधनों का इसमें समावेश तथा बच्चों में अभिव्यक्ति कौशल की वृद्धि प्राथमिकता होगी। विद्यार्थी हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी और अन्य भाषाओं का ज्ञान भी प्राप्त करते रहेंगे ताकि वे वैश्वीकरण की चुनौतियों का सामना कर सकें। अतिथि गृह, आधुनिक पुस्तकालय, लैब सुविधाओं के विकास से विद्यालय का स्वरूप और उन्नत होगा।
विद्यालय परिवार ने आशा जताई कि आने वाले वर्षों में हिंदी पखवाड़ा और पठन-पाठन से संबंधित गतिविधियां और भी विस्तृत और सफल होंगी। आधुनिक शिक्षण पद्धतियों एवं सांस्कृतिक समर्पण के संयोजन से नवोदय विद्यालय न केवल शिक्षा का आदर्श बनेगा बल्कि हिंदी के गौरव का भी प्रतीक बनता रहेगा।
जवाहर नवोदय विद्यालय, सरगुजा में हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह एवं अतिथि गृह का शुभारंभ न केवल एक भव्य कार्यक्रम था, बल्कि यह हिंदी भाषा, शिक्षा और संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रतीक है। बच्चों की प्रतिभा, शिक्षकों की मेहनत, अभिभावकों की सहभागिता और प्रशासन की सक्रियता ने इस आयोजन को ऐतिहासिक और प्रेरक बना दिया।
यह समारोह भावी पीढ़ी के लिए हिंदी को मजबूती से पकड़ने, शिक्षा में नए आयाम स्थापित करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए एक सशक्त संदेश है। नवोदय विद्यालय ने यह जताया है कि भाषा की रक्षा और संवर्धन में शिक्षा की अहम भूमिका होती है और हिंदी पखवाड़ा इस दिशा में कदम बढ़ाता रहेगा।
इस भव्य आयोजन ने सभी उपस्थित जनों के दिलों में हिंदी के प्रति निष्ठा और गर्व की भावना को और प्रबल किया तथा शिक्षा, संस्कृति और आधुनिकता के संगम का परिचय दिया। आने वाले वर्षों में ऐसे आयोजन और अधिक विस्तारपूर्वक होंगे और नवोदय विद्यालय अपने क्षेत्र और शिक्षा की दुनिया में गौरवशाली स्थान बनाए रखेगा।
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