झाड़-फूंक के बहाने बगीचा में पहाड़ी कोरवा युवती से सामूहिक दुष्कर्म, बच्चे के जन्म के बाद खुला राज : hill Korwa woman was gang-raped in a garden under the pretext of exorcism

Uday Diwakar
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hill Korwa woman was gang-raped in a garden under the pretext of exorcism: जशपुर:  छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के बगीचा थाना क्षेत्र से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे इलाके को हिला दिया है। झाड़-फूंक के बहाने एक पहाड़ी कोरवा युवती को फंसाकर तीन हैवानों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। मामला तब सामने आया जब पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया और अस्पताल में डॉक्टरों को पूरी हकीकत का अंदेशा हुआ। यह वारदात न केवल इंसानियत के नाम पर बदनुमा दाग है, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे आज भी ग्रामीण अंचलों में अंधविश्वास और महिला असुरक्षा की गहरी जड़ें समाज को खोखला कर रही हैं।

यह घटना बगीचा थाना क्षेत्र के एक छोटे से आदिवासी गांव की है, जहां ज्यादातर लोग पारंपरिक पेशे और झाड़-फूंक जैसे अंधविश्वासों में विश्वास रखते हैं। गांव की 20 वर्षीय पहाड़ी कोरवा युवती पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रही थी। परिजन इलाज के लिए उसे किसी वैद्य या झाड़-फूंक करने वाले के पास ले जाने की सोच रहे थे। इसी दौरान, गांव के ही तीन युवक—जिनकी पहचान पुलिस ने बाद में अलग-अलग तौर पर की—ने युवती के परिवार को यह कहकर भरोसे में लिया कि वे उसके ऊपर ‘भूत-प्रेत का साया’ उतार सकते हैं और झाड़-फूंक से वह ठीक हो जाएगी।

युवती के परिवारजन उनकी बातों में फंस गए और उन्होंने आरोपियों को घर बुला लिया। आरोपियों ने रात में झाड़-फूंक करने का बहाना बनाया और युवती को जंगल के किनारे ले गए, जहां उन्होंने किसी झाड़-फूंक की रस्म करने की बात कही। वहां पहुंचने पर युवती को पहले तो कोई शक नहीं हुआ, लेकिन जब आरोपियों ने उसे कोई पेय पदार्थ पिलाया, तो वह बेहोश हो गई।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने युवती को नशीला पदार्थ पिलाकर उससे सामूहिक दुष्कर्म किया। बेहोशी की हालत में युवती को अत्याचार का शिकार बनाया गया। जब युवती को होश आया, तो वह दर्द से कराह रही थी। लेकिन आरोपियों ने उसे धमकी दी कि अगर उसने किसी को कुछ बताया, तो वे उसके परिवार को जान से मार देंगे।

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पीड़िता ने किसी तरह घर पहुंचने की कोशिश की, लेकिन उसकी हालत नाजुक थी। इसी बीच, आरोपियों के डर के कारण उसके परिवारजन भी कुछ दिन चुप रहे। जब युवती की तबीयत बिगड़ गई, तो वही आरोपी उसे स्थानीय बगीचा अस्पताल लेकर पहुंचे ताकि शक न हो। अस्पताल में पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने पाया कि युवती को किसी नशीले पदार्थ का प्रभाव रहा है और उसके शरीर पर चोटों के निशान भी हैं।

पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि झाड़-फूंक के बहाने आरोपियों ने कई बार युवती के साथ अत्याचार किया। वे उसे बार-बार जंगल में ले जाते, नशीला पदार्थ खिलाते और अपनी हवस का शिकार बनाते रहे। धीरे-धीरे युवती गर्भवती हो गई। लेकिन भय और समाज के डर से उसने कुछ नहीं बताया।

यहां तक कि जब उसके गर्भ का आकार बढ़ने लगा, तब भी गांव वालों को किसी तरह भ्रमित कर दिया गया कि यह किसी “दैवी प्रभाव” का असर है। अंधविश्वास और दबाव के कारण किसी ने गंभीरता से जांच नहीं कराई।

कुछ महीनों बाद जब युवती ने एक बच्चे को जन्म दिया, तभी सारा मामला उजागर हुआ। डॉक्टरों और आशा कार्यकर्ता ने जब परिवार से सवाल किए कि युवती के विवाह का पता दें, तो सच धीरे-धीरे सामने आने लगा। युवती के परिजनों ने प्रारंभ में कुछ छिपाने की कोशिश की, लेकिन अंततः उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों से गांव के तीन युवक झाड़-फूंक के बहाने आते-जाते रहे थे।

इस खुलासे के बाद अस्पताल प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। बगीचा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़िता का बयान दर्ज किया। बयान के आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म, हत्या की कोशिश और साक्ष्य मिटाने जैसे गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

hill Korwa woman was gang-raped in a garden under the pretext of exorcism

राज खुलने से पहले, आरोपियों ने युवती की पहचान मिटाने के लिए उसे मौत के घाट उतारने की भी कोशिश की थी। एक घटना के दौरान, जब युवती ने विरोध किया, तो उन्होंने उसके सिर पर भारी पत्थर पटक दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इसके बाद भी उन्होंने उसे अकेला जंगल में छोड़ दिया, यह सोचकर कि वह मर चुकी होगी। लेकिन युवती किसी तरह घर पहुंच गई।

गांव के लोगों ने तब उसकी हालत देखी, तो उन्हें लगा कि किसी जानवर ने हमला किया है। इस भ्रम के बीच अपराधियों ने निश्चिंतता से घूमना जारी रखा। जैसे ही बच्चा पैदा होने के बाद केस सामने आया, पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए एक विशेष टीम गठित की। पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर सभी तीन आरोपियों की पहचान की और उन्हें गांव से गिरफ्तार किया। प्रारंभिक पूछताछ में तीनों ने अपराध स्वीकार किया।

पुलिस अधीक्षक (एसपी) जशपुर ने मीडिया को बताया कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील है और पीड़िता को राज्य महिला आयोग तथा प्रशासन की ओर से पूरी सुरक्षा व मदद दी जा रही है। आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि ऐसा अपराध दोबारा न हो।

घटना के खुलासे के बाद पूरे बगीचा क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया है। पहाड़ी कोरवा जनजाति से जुड़ी यह युवती अब भी सदमे में है। उसके परिवार को समाज से सहयोग और संरक्षण की जरूरत है। कई सामाजिक संगठन और महिला मोर्चे इस घटना को लेकर मुखर हो उठे हैं।

बगीचा और आसपास के इलाकों के ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन ऐसे मामलों में झाड़-फूंक जैसी कुप्रथाओं पर सख्ती से रोक लगाए और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे। यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में मौजूद अंधविश्वास और महिला सुरक्षा के प्रति लापरवाही का प्रतिबिंब है। आज भी कई ग्रामीण महिलाएं शिक्षा और जागरूकता के अभाव में ऐसे झांसे में फंस जाती हैं।

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार और प्रशासन को जनजातीय इलाकों में विशेष अभियान चलाकर जागरूकता फैलानी चाहिए। झाड़-फूंक के नाम पर होने वाले अपराधों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने की जरूरत है।

जशपुर में हुई इस दरिंदगी की जानकारी मिलते ही राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। उन्होंने पीड़िता को तत्काल आर्थिक सहायता, सुरक्षित आवास और लंबी अदालत प्रक्रिया के दौरान कानूनी सहायता मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं जिला प्रशासन ने भी स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया है कि पीड़िता और उसके नवजात की विशेष देखभाल की जाए। चिकित्सा टीम को हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराने को कहा गया है।

यह घटना केवल एक गांव या जिले का मुद्दा नहीं है। यह उस मानसिकता की तस्वीर है, जहां अंधविश्वास, भय और सामाजिक दबाव महिलाओं को असुरक्षित बना देता है। ग्रामीण महिलाएं अगर शिक्षित और सशक्त हों, तो उन्हें ऐसे अपराधियों के झांसे में आने से रोका जा सकता है। स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाएं अब पीड़िता के गांव में जाकर महिलाओं और युवतियों को जागरूक कर रही हैं कि किसी भी अंधविश्वास या झाड़-फूंक के नाम पर किसी अजनबी पर भरोसा न करें।

जशपुर का बगीचा कांड केवल कानून से संबंधित अपराध नहीं, बल्कि समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाली घटना है। यह बताती है कि विकास और आधुनिकता के युग में भी महिलाएं किस हद तक असुरक्षित हैं। झाड़-फूंक जैसी कुप्रथाएं जब तक समाज से समाप्त नहीं होंगी, तब तक ऐसी घटनाएं बार-बार हमें शर्मसार करती रहेंगी।

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