head-on collision between a motorcycle and a scooter in Jashpur: जशपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में तेज रफ्तार ने एक बार फिर दो परिवारों से उनके युवा बेटों को छीन लिया। पत्थलगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत नेशनल हाईवे-43 पर कछार गांव के पास बाइक और स्कूटी के आमने-सामने भिड़ंत में दो युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि आसपास के लोगों ने हादसे को अपनी आंखों से देखकर सिहर उठे। सड़क पर बिखरे वाहन के हिस्से और खून के धब्बे यह बता रहे थे कि टक्कर कितनी जबरदस्त रही होगी।
जानकारी के अनुसार दोनों युवक अलग‑अलग दिशाओं से अपने-अपने काम निपटाकर घर लौट रहे थे। एक युवक तेज रफ्तार बाइक पर सवार होकर पत्थलगांव की ओर जा रहा था, जबकि दूसरा युवक स्कूटी से कछार की ओर बढ़ रहा था। गवाहों का कहना है कि हाईवे के उस हिस्से पर रोशनी और संकेतक कम होने के कारण दोनों वाहन चालकों को एक‑दूसरे का अंदाजा नहीं हो पाया और एक मोड़ पर अचानक आमने‑सामने आ गए। रफ्तार इतनी तेज थी कि दोनों के पास ब्रेक लगाने या दिशा बदलने का समय तक नहीं मिला और देखते ही देखते जोरदार भिड़ंत हो गई।
टक्कर की आवाज सुनते ही आसपास के ग्रामीण और राहगीर घटनास्थल की ओर दौड़े। हादसा इतना भयावह था कि बाइक और स्कूटी के परखच्चे उड़ गए और दोनों युवक कई मीटर दूर जा गिरे। लोगों ने तुरंत दोनों को सड़क किनारे सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। कुछ लोगों ने एम्बुलेंस और पुलिस को फोन लगाया, वहीं अन्य ग्रामीणों ने रास्ता रोककर वाहनों की गति धीमी कराई, ताकि कोई और वाहन इन घायल युवकों को कुचल न दे।
सूचना मिलते ही पत्थलगांव थाना पुलिस और हाईवे पेट्रोलिंग दल मौके पर पहुंचा और पूरे क्षेत्र को घेरकर पंचनामा की औपचारिकता शुरू की। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ की और हादसे के प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए। कुछ दूरी पर गिरे बाइक और स्कूटी के क्षतिग्रस्त हिस्सों को जब्त कर थाने भेजा गया, जबकि सड़क पर पड़े मलबे को हटाकर यातायात दुरुस्त किया गया। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में माना कि हादसे की मुख्य वजह तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना रही।
मृतकों की पहचान आसपास के गांवों के रहने वाले युवकों के रूप में हुई, जिनकी उम्र बीस से तीस वर्ष के बीच बताई जा रही है। दोनों ही युवक अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे और हाल ही में उनकी शादियां हुई थीं। गांव पहुंचते ही जब पुलिस ने परिजनों को हादसे की खबर दी, तो घरों में कोहराम मच गया; माता‑पिता और पत्नियां बेसुध होकर गिर पड़े। पड़ोसी और रिश्तेदार उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे, लेकिन हर किसी की आंखों में यह सवाल था कि आखिर इतनी कम उम्र में किस किस्मत से उनके बच्चे यूं सड़क पर दम तोड़ने को मजबूर हुए।
अगली सुबह पोस्टमार्टम के बाद दोनों युवकों के शव परिजनों को सौंपे गए। गांव में जैसे ही शव पहुंचे, पूरा वातावरण मातम में डूब गया और हजारों की भीड़ अंतिम दर्शन के लिए जमा हो गई। हिंदू रीति‑रिवाज के अनुसार दोनों युवकों का अंतिम संस्कार किया गया, जहां हर किसी ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी और दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। चिता की लपटों के बीच परिजनों की चीखें सुनकर मौजूद लोगों ने संकल्प लिया कि वे अपने घरों के युवाओं को तेज रफ्तार के खतरे के बारे में अवश्य जागरूक करेंगे।
पुलिस ने इस मामले में अपराध दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। हादसे में शामिल दोनों वाहनों की तकनीकी जांच की जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि कहीं ब्रेक फेल या अन्य तकनीकी खराबी तो वजह नहीं रही। साथ ही, सीसीटीवी फुटेज और आसपास से मिले मोबाइल वीडियो के आधार पर यह भी देखा जा रहा है कि कहीं किसी तीसरे वाहन ने ओवरटेक या गलत दिशा में चलकर इस टक्कर को जन्म तो नहीं दिया। रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि किसकी गलती अधिक थी और दोषी के खिलाफ किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
head-on collision between a motorcycle and a scooter in Jashpur
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पत्थलगांव-कछार मार्ग पर वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए न तो पर्याप्त स्पीड ब्रेकर हैं और न ही रात के समय रोशनी की समुचित व्यवस्था। लोगों का कहना है कि कई बार प्रशासन से लिखित शिकायत भी की गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि हाईवे पर संकेतक बोर्ड, रिफ्लेक्टर, स्पीड ब्रेकर और नियमित पेट्रोलिंग की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
यातायात विशेषज्ञों के अनुसार तेज रफ्तार में थोड़ी‑सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है, खासकर तब जब सड़क पर मोड़, ढलान या अंधेरा हो। हेलमेट और अन्य सेफ्टी गियर के बिना बाइक या स्कूटी चलाना जोखिम और बढ़ा देता है, जैसा कि जशपुर के इस दर्दनाक हादसे में साफ दिखाई दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि दोपहिया वाहन चालकों को हमेशा अपनी और दूसरों की जान की कीमत समझते हुए निर्धारित गति सीमा में ही वाहन चलाना चाहिए और सड़क पर मोबाइल फोन या हेडफोन के उपयोग से बचना चाहिए।
इस घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या आधुनिकता और तेज रफ्तार की दौड़ में समाज अपने युवाओं की जिंदगी को यूं ही सड़कों पर गंवाने को मजबूर रहेगा। जशपुर के लोग चाहते हैं कि इस हादसे को केवल एक समाचार न मानकर प्रशासन, पुलिस और आम नागरिक मिलकर सड़क सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं। यदि समय रहते गति पर नियंत्रण, नियमों का पालन और सख्त निगरानी सुनिश्चित हो, तो शायद भविष्य में किसी मां को अपने बेटे की अर्थी ना देखनी पड़े और किसी मासूम के सिर से उसके पिता का साया यूं अचानक न उठे।
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