Female Staff Accused the Principal of Sexual Harassment in Jashpur: जशपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के बगीचा थाना क्षेत्र में स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिमड़ा के प्राचार्य सुधीर कुमार बरला पर यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगा है। स्कूल की महिला व्याख्याता और महिला कर्मचारी ने लंबे समय तक प्राचार्य के अशोभनीय व्यवहार और यौन शोषण की शिकायत की। इन शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया गया और पुलिस ने इस मामले में दो FIR दर्ज कर आरोपी प्राचार्य को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही विभागीय जांच और प्राचार्य के निलंबन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
Female Staff Accused the Principal of Sexual Harassment in Jashpur
यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इस स्कूल में प्राचार्य ने एक महिला व्याख्याता के साथ अभद्र व्यवहार किया था। पहले भी 14 नवंबर को, बाल दिवस के दिन, एक महिला व्याख्याता ने प्राचार्य पर अश्लील बातें करने और छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था। इसके अलावा, महिला कर्मचारियों ने भी प्राचार्य के फोन पर अश्लील संदेश भेजने और धमकी देने जैसी चीजों का खुलासा किया। इन सभी शिकायतों का सिलसिला पंचायत स्तर तक पहुंचा लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
जब ये शिकायतें शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचीं, तो उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लिया। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी और प्राचार्य को गिरफ्तार करके अदालत में पेश किया गया। हालांकि उसे जमानत मिल गई है, लेकिन विभागीय जांच के कारण उसके निलंबन की तैयारी चल रही है। शिक्षा अधिकारी प्रमोद भटनागर ने बताया कि स्कूल में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मामलों को न तो नजरअंदाज किया जाएगा और न ही इनके साथ कोई छूट दी जाएगी।
इस तरह की घटनाएं रोकने के लिए स्कूलों में शिकायत निवारण समितियों का गठन जरूरी है, जिन्हें तुरंत और प्रभावी तरीके से काम करना चाहिए। इसके अलावा, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए नियमित जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित करनी चाहिए, ताकि संवेदनशीलता और जागरूकता बनी रहे।
यह मामला शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी चेतावनी है कि जहां एक तरफ हमें शिक्षा के स्तर को सुधारना है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण भी बनाना जरूरी है, जहां शिक्षक और कर्मचारी खुशी से काम कर सकें और छात्र बिना किसी भय और दबाव के पढ़ाई कर सकें।
जांच पूरी होने के बाद विभाग दोषी पाए गए प्राचार्य के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा। पुलिस और प्रशासन पीड़ितों को न्याय दिलाने में पूरी मदद कर रहे हैं। इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर मुद्दों पर सतर्कता और सख्ती आवश्यक है ताकि हर कोई सुरक्षित माहौल में जीवन व्यतीत कर सके।
सामाजिक और शैक्षिक जगत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे पर सभी को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि ऐसे अपराध फिर दोबारा न हों और पीड़ितों को उचित न्याय मिल सके। यह मामला सरकार की महिला सुरक्षा नीतियों की परीक्षा भी है, जिसमें दोषी को सजा मिलनी चाहिए और पीड़ितों को पूरा संरक्षण मिला होना चाहिए।
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