Family carries body on a cot for miles on foot Roadless village in Sitapur: सरगुजा:अंबिकापुर। 2 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत भारतपुर के लकरालता टोला में एक परिवार को अपने प्रियजन की मौत के बाद सड़क अभाव का कड़वा दंश झेलना पड़ा। 45 वर्षीय सुरेंद्र तिर्की का शव ‘चीनी पानी’ तालाब से बरामद होने के बाद परिजनों को पोस्टमॉर्टम और अंतिम संस्कार के लिए मीलों खाट पर लादकर पैदल चलना पड़ा। यह घटना विकास के ऊंचे दावों के बीच ग्रामीण भारत की उस काली सच्चाई को नंगा करती है, जहां बुनियादी सुविधाएं आज भी सपना बनी हैं।
लकरालता टोला निवासी सुरेंद्र तिर्की घर से मछली पकड़ने निकले थे। परिजनों ने तीन दिनों तक खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। 31 दिसंबर को गांव के पास स्थित ‘चीनी पानी’ तालाब में उनका शव तैरता हुआ मिला। ग्रामीणों के अनुसार, गहरे पानी में पैर फिसलने से वे डूब गए। सुरेंद्र मजदूरी कर परिवार चलाते थे। पत्नी मंगला तिर्की (40) और तीन बच्चे (15, 12, 8 वर्ष) के सहारे पर आश्रित थे।
शव मिलते ही ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। लेकिन सबसे बड़ा दर्द तब हुआ जब शव को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाना था। लकरालता टोला से मुख्य मार्ग तक कोई पक्की सड़क नहीं। न ही कोई वाहन पहुंच सकता था। परिजनों ने चारपाई (खाट) पर शव लादा और 7 किलोमीटर पैदल चलकर भारतपुर पहुंचे। वहां से एम्बुलेंस मिली, जो शव को अंबिकापुर जिला अस्पताल ले गई। पोस्टमॉर्टम के बाद फिर वही प्रक्रिया—खाट पर शव लादकर अंतिम संस्कार स्थल तक पैदल यात्रा। मंगला रोते हुए बोलीं, “पति की मौत पर दुख कम था, लेकिन यह अपमान सहना पड़ा। सड़क होती तो क्या ऐसा होता?”
सड़कहीन गांव की काली सच्चाई
लकरालता टोला, जो मुख्यालय अंबिकापुर से 45 किलोमीटर दूर है, आदिवासी बहुल क्षेत्र है। यहां 200 से ज्यादा परिवार रहते हैं, ज्यादातर हल्बा और गोंड जनजाति के। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2018 में सड़क स्वीकृत हुई, लेकिन काम अधूरा। सरपंच रामेश्वर सिंह ने बताया, “15 करोड़ का प्रस्ताव था, लेकिन ठेकेदार ने 30 प्रतिशत ही काम किया। बरसात में कीचड़, सूखे में धूल। बीमार पड़ने पर भी वाहन नहीं आता।”
भारतपुर पंचायत में 10 से ज्यादा टोले ऐसे हैं जहां सड़क नहीं। सीतापुर विधानसभा में 40 प्रतिशत गांव सड़कविहीन। जिला पंचायत सदस्य इंदु बाई ने कहा, “चुनावी वादे तो होते हैं, लेकिन बजट कहां जाता है?” वीडियो और फोटो वायरल होने पर सोशल मीडिया पर #सरगुजासड़कबचाओ ट्रेंड कर रहा है।
सरगुजा कलेक्टर ने घटना पर संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए। एसडीएम सीतापुर आर.एन. चंद्रवंशी ने कहा, “एम्बुलेंस की कमी थी, जल्द सुधार करेंगे। सड़क कार्य तेज होगा।” लेकिन स्थानीय एसपी ने खुलासा किया कि जिले में 25 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र सड़कहीन हैं। 2024 में 150 से ज्यादा मौतें सड़क अभाव से जुड़ी—ज्यादातर गर्भवती महिलाओं और मरीजों की।
एनएचआरआई (नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन) ने इसी साल सरगुजा पर नोटिस जारी किया था। ग्रामीण विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 5000 किमी ग्रामीण सड़कें लंबित हैं। सरगुजा में 20 प्रतिशत पंचायतें ऐसी जहां पोस्टमॉर्टम के लिए शव पैदल ले जाया जाता है।
मंगला तिर्की ने बताया, “सुरेंद्र मजदूरी से 300-400 रुपये रोज कमाते थे। अब बच्चे भूखे हैं। सरकार मदद करे।” पड़ोसी गोविंद मरकम बोले, “हर साल 2-3 मौतें तालाब डूबने से। गहराई नापी नहीं गई।” बच्चे स्कूल नहीं जा पाते क्योंकि रास्ता खराब। स्वास्थ्य केंद्र 15 किमी दूर।
पर्यावरणविद् डॉ. रमेश पटेल ने कहा, “सड़क न होने से आपात सेवाएं प्रभावित। जल संरक्षण पर फोकस करें, तालाबों पर रेलिंग लगाएं।” पूर्व विधायक गोविंदलाल साव ने आलोचना की, “15 साल से सत्ता में हैं, फिर भी गांव अंधेरे में। विशेष पैकेज लाएं।”
कांग्रेस ने विधानसभा में मामला उठाने का ऐलान किया। भाजपा ने कहा, “काम चल रहा है, विपक्ष भ्रम फैला रहा।” स्थानीय पत्रकार संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन दिया।
Family carries body on a cot for miles on foot Roadless village in Sitapur
सरगुजा में 2023 में एक गर्भवती महिला को खाट पर ले जाया गया, बच्चा रास्ते में मर गया। 2024 में बुजुर्ग की मौत पर वैसी ही त्रासदी। सीतापुर में 5 तालाब बिना सुरक्षा के। भारतपुर पंचायत में बिजली भी आंशिक।
यह घटना सरगुजा में आंदोलन की चिंगारी बन रही। ग्रामीण धरने की योजना बना रहे। सोशल मीडिया पर 50 हजार शेयर। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने ट्वीट किया, “जांच करवाएंगे।”
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