वेल्डिंग दुकान के अंदर फर्जी अस्पताल संचालित—लखनपुर क्षेत्र में बिना डिग्री के मरीजों का इलाज, वीडियो वायरल : Fake hospital operating inside welding shop – Patients treated without degrees in Lakhanpur area

Uday Diwakar
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Fake hospital operating inside welding shop – Patients treated without degrees in Lakhanpur area: सरगुजा:​​​अंबिकापुर।सरगुजा जिले के लखनपुर क्षेत्र में एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां गौहर अली नामक झोलाछाप डॉक्टर ने वेल्डिंग दुकान के अंदर ही फर्जी अस्पताल खोल रखा है। सोशल मीडिया पर इस अस्पताल का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें तीन कमरों में बेड लगाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। मामले की गंभीरता तब और भी बढ़ जाती है जब यह पता चलता है कि गौहर अली के पास कोई चिकित्सकीय योग्यता या मान्यता नहीं है, बावजूद इसके वह मरीजों को भर्ती कर इलाज और दवाइयां दे रहा है।

लखनपुर के मुख्य सड़क पर स्थित इस वेल्डिंग दुकान को झोलाछाप डॉक्टर ने अस्पताल में तब्दील कर दिया है, जहां कई मरीज भर्ती हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि तीन अलग-अलग कमरों में मरीजों का इलाज चल रहा है, जिसमें वे स्लाइन और इंजेक्शन भी देकर उनकी परेशानियों का आइसारा कर रहे हैं। कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज यहां इलाज कराने आते हैं, जिनमें दूर-दराज के गांवों के लोग भी शामिल हैं।

स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही इस मामले को और भयानक बना रही है। जब भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई के लिए पहुंचना चाहा, तो क्षेत्रीय नेताओं के फोन आने की वजह से उन्हें वापस लौटना पड़ा। इस वजह से यह झोलाछाप इलाज चलाते रहने में सक्षम हो रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में झोलाछाप डॉक्टरों के कारण कई मरीजों की जान जा चुकी है, फिर भी उचित कार्रवाई नहीं हुई है।

जब मीडिया टीम ने इस वेल्डिंग दुकान में घुसकर जांच की, तो दो लोग मरीजों की जांच करते और बिना डिग्री के अवैध तरीके से ब्लड सैंपल लेते भी देखे गए। झोलाछाप डॉक्टर गौहर अली खुद को पैरामेडिकल कोर्स करने वाला बताते हैं, लेकिन वह भी मानते हैं कि उनके पास कोई डिग्री नहीं और क्लीनिक का कोई पंजीयन भी नहीं है। मरीजों की जिंदगी इस नकली अस्पताल में धूमिल होती जा रही है और कभी भी गलत इलाज के कारण जान का खतरा हो सकता है।

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Fake hospital operating inside welding shop – Patients treated without degrees in Lakhanpur area

इस सबके बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज कर रहे हैं, जबकि मरीजों को सरकारी अस्पतालों की ओर भेजा जाता है, जब स्थिति गंभीर हो जाती है। यह मामला न केवल एक चिकित्सा त्रुटि बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता को भी बखूबी दर्शाता है। इस फर्जी अस्पताल की व्यापक जांच और कड़ी कार्रवाई की सख्त जरूरत है ताकि आम जनता की जान बचाई जा सके और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकें।

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यह घटना दिखाती है कि सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर सुधार आवश्यक है, साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के नियमन और मोनिटरिंग में भी सुधार होना चाहिए ताकि इस प्रकार का धोकाधड़ी और जानलेवा इलाज रोका जा सके। इससे क्षेत्रीय लोगों का विश्वास स्वच्छ और प्रमाणिक स्वास्थ्य सेवाओं पर बना रहेगा और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

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