राजपुर थाना क्षेत्र में मृतक के नाम से फर्जी सहमति पत्र बनाकर चूना पत्थर खनन पट्टा प्राप्त करने की साजिश, तीन आरोपी गिरफ्तार : Fake Consent Letter

Uday Diwakar
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Fake Consent Letter: बलरामपुर-राजपुर: राजपुर थाना क्षेत्र में एक बड़ा जालसाजी का मामला उजागर हुआ है, जिसमें मृत व्यक्ति के नाम पर फर्जी सहमति पत्र बनाकर चूना पत्थर खनन के लिए पट्टा प्राप्त करने का प्रयास किया गया। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

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Fake Consent Letter मामले का खुलासा

वृहस्पति निवासी बफौली, थाना अंबिकापुर की एक महिला ने राजपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उसके पिता स्व. झाड़ी और चाचा खरीदू के नाम पर ग्राम बधिमा (चौकी बरियो), तहसील राजपुर में कुल 1.014 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। झाड़ी की मृत्यु 26 नवंबर 2019 को हो चुकी थी। इसके बावजूद, 26 जून 2023 को विजय कुमार अग्रवाल (निवासी कुण्डला सिटी, अंबिकापुर) ने मृत झाड़ी के नाम से फर्जी सहमति पत्र प्रस्तुत कर चूना पत्थर के उत्खनन हेतु खनन पट्टा प्राप्त करने की कोशिश की।

पुलिस कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक बलरामपुर-रामानुजगंज वैभव बैंकर ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विश्वदीपक त्रिपाठी और पुलिस अनुविभागीय अधिकारी याकूब मेमन के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी राजपुर निरीक्षक कुमार चंदन सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित की गई। जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि सहमति पत्र मृत व्यक्ति के नाम पर बनवाया गया था, जो पूरी तरह अवैध और धोखाधड़ी है।

गिरफ्तार आरोपी

पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है: विजय कुमार अग्रवाल (40 वर्ष), निवासी चन्दगी राम, हाईट्स ग्राउंड, अग्रेसन वार्ड, थाना कोतवाली, जिला सरगुजा , अरविन्द सारथी उर्फ नईहर साय (36 वर्ष), ग्राम बधिमा (हरिजन पारा), चौकी बरियों, थाना राजपुर, जगरनाथ पोर्ते (36 वर्ष), ग्राम बधिमा (गौटिया पारा), चौकी बरियों, थाना राजपुर।

आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (दस्तावेजों की जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज को असली के रूप में प्रस्तुत करना) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर ने कहा, “यह एक गंभीर अपराध है, जिसमें सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी कर खनन पट्टा प्राप्त किया गया। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि भविष्य में इस प्रकार के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए खनन पट्टा जारी करने की प्रक्रिया को और अधिक सख्त और तकनीकी जांचों से युक्त किया जाएगा।

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