Elephant attack in Kenadand village of Kansabel forest range: जशपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कांसाबेल वन परिक्षेत्र के केनाडांड़ गांव में सुबह एक दुखद हादसा हुआ। दल से बिछड़े एक जंगली हाथी ने घर के पीछे बाड़ी में गई दादी-पोती पर हमला कर दिया, जिसमें जहां 57 वर्षीय महिला देरोठिया बाई की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, वहीं उसकी पांच वर्षीय पोती गंभीर रूप से घायल हो गई है।
सुबह केनाडांड़ गांव में आम दिनों की तरह सन्नाटा पसरा था। देरोठिया बाई अपने घर के पीछे बाड़ी में पौधों को देखने गई थीं। उनकी पोती भी उनके साथ थी। बाड़ी के आसपास अचानक ग्रामीणों ने अकेले भटकते हुए एक जंगली हाथी को देखा। पहले तो लोग हाथी को देखकर सहम गए, किन्तु महिला और उसकी पोती ने डर के बावजूद कुतूहलवश हाथी को करीब से देखने की कोशिश की। तभी हाथी अचानक आक्रामक हो गया और दोनों पर हमला कर दिया। देरोठिया बाई की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पोती गंभीर रूप से घायल हो गई और उसका पैर टूट गया।
परिवार में यह हादसा गहरा आघात लेकर आया है। घटना की खबर लगते ही आसपास के ग्रामीण भी घर पहुंच गए। पोती की हालत गंभीर थी, इसलिए स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उसे इलाज के लिए तुरंत पत्थलगांव अस्पताल भिजवाया। डॉक्टरों ने बच्ची का उपचार शुरू किया और उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई है, मगर मानसिक और शारीरिक पीड़ा से जूझना आसान नहीं।
केनाडांड़ गांव व आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ सालों से जंगली हाथियों का आना-जाना, फसलों को नुकसान पहुँचना और ग्रामीणों पर हमले आम समस्या बनती जा रही है। हाथियों का 27 सदस्यीय दल इस क्षेत्र में लंबे समय से विचरण कर रहा था। वन विभाग लगातार मोनिटरिंग कर रहा था, मगर दल से बिछड़कर अकेला हाथी रिहायशी इलाके में पहुँच गया। बताया जाता है कि दल से बिछड़ने के बाद हाथी अधिक हिंसक हो जाते हैं और इंसानों के लिए ख़तरा पैदा करते हैं।
घटना के बाद वन विभाग की टीम और स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने मृतका के परिजनों को 25,000 रुपये की तत्काल सहायता राशि दी, साथ ही राहत व क्षतिपूर्ति की पूरी प्रक्रिया शुरू की. वन विभाग ने ग्रामीणों को हाथियों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। विभाग के अधिकारी गाँव में तैनात किए गए हैं ताकि हाथी को जंगल की ओर खदेड़ने की कोशिश की जा सके और गांववाले सुरक्षित रह सकें।
वन विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी। रात्रि पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है और गांव के लोगों को किसी भी संदिग्ध गतिविधि या हाथी की उपस्थिति की सूचना तुरंत विभाग को देने का अनुरोध किया गया है।
दादी-पोती पर हुए हमले के बाद पूरे केनाडांड़ गांव में दहशत व्याप्त हो गई है। लोग रात के समय खेतों और घरों के बाहर निकलने से हिचक रहे हैं। इस हाथी ने न केवल मानव जीवन, बल्कि आसपास की फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों को आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि वन विभाग क्षेत्र में हाथियों की नियंत्रित निगरानी करे और रैपिड रिस्पॉन्स टीम हर समय उपलब्ध रहे। स्कूल जाने वाले बच्चों, वृद्धजन और महिलाएँ अधिक डरी हुई हैं, अतः प्रशासन से सुरक्षा के अतिरिक्त इंतज़ाम और मुआवजे की मांग की जा रही है।
वन्य जीव विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के उत्तरी भाग में मानव-हाथी संघर्ष पिछले दशक में कई गुना बढ़ गया है। मुख्य कारण वन क्षेत्र में खनन और खेती के विस्तार, जंगल कटाई और हाथियों के पारंपरिक मार्गों में बदलाव रहे हैं। वर्तमान में सरकार हाथियों की निगरानी, ट्रैकिंग तथा संचार सिस्टम विकसित कर रही है ताकि घटनाओं की पूर्व सूचना ग्रामीणों तक अविलंब पहुँच सके।
वन विभाग ने चेतावनी दी है कि हाथी आमतौर पर शांत होते हैं, परन्तु दल से बिछड़ने, चोट लगने, अथवा भूखे या आक्रोशित होने पर उनका व्यवहार आक्रामक हो जाता है। ग्रामीणों को सुझाव दिया गया है कि वे कोई तेज आवाज न करें, हाथी से दूरी बनाए रखें और समूह बनाकर चलें, साथ ही किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में वन विभाग या पुलिस को तुरंत सूचित करें।
Elephant attack in Kenadand village of Kansabel forest range
हाथी हमले के परिणामस्वरूप न केवल पीड़ित परिवार, बल्कि पूरा गांव व्यथित है। देरोठिया बाई का परिवार आर्थिक विपन्नता की स्थिति में पहुंच गया है। खेतों में नुकसान, अस्पताल के खर्चे और सुरक्षा की चिंता से ग्रामीण परेशान हैं। स्थानीय प्रशासन ने पूर्ण मुआवजे का आश्वासन दिया है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती घटनाओं के चलते पूरे जिले में रात्रि गश्त, चेतावनी प्रणाली व सूचना तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है। वन विभाग, पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से ग्रामीणों को जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण सत्र और तात्कालिक सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।
इस हादसे ने प्रशासन के सामने नई चुनौती रख दी है। जंगल-जंगल में हाथियों की आवाजाही, दल से बिछड़ने की समस्या, खेती-बाड़ी के नुकसान, व मानव जीवन की सुरक्षा अपनाने के लिए सभी स्तरों पर सतत प्रयास जरूरी हैं।
संपूर्ण प्रशासन, सामाजिक संगठन और ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने भी परिवार को समर्थन देने और प्रशासन से त्वरित सहायता की अपील की है। महिला की अंत्येष्टि पूरे सम्मान के साथ की गई और पोती की चिकित्सा के लिए आर्थिक एवं भावनात्मक मदद दी जा रही है।

उत्तरी छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में हाथी मानव संघर्ष की बढ़ती घटनाएँ वन संरक्षण, जागरूकता और त्वरित राहत योजनाओं की आवश्यकता को उजागर करती हैं। सरकारी स्तर पर संकट निवारण, संरक्षित मार्ग, फेंसिंग, अलार्म सिस्टम और सामुदायिक सुरक्षा टुकड़ी की योजना को गंभीरता से लागू करने की जरूरत है।
वन विभाग, प्रशासन, सामाजिक संगठन और ग्रामीणों की साझी जिम्मेदारी है कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके। हादसे के पीड़ित परिवार को आर्थिक राहत, इलाज और पुनर्वास का अधिकार मिलना चाहिए, साथ ही क्षेत्र में सुरक्षा का वातावरण बहाल करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
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