छत्तीसगढ़ एनएचएम संविदा कर्मियों की मांगें, एनएचएम कर्मचारियों की 10 सूत्रीय मांगें : Demands of Chhattisgarh NHM contract Workers

Uday Diwakar
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Demands of Chhattisgarh NHM contract Workers : अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत लगभग 16 हजार कर्मचारी कार्य कर रहे हैं जिसमें चिकित्सकीय तथा प्रबंधकीय दोनों ही प्रकार के कैडर मिलकर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से संपादित करने का सफलतापूर्वक कार्य करते आ रहे हैं जिससे राज्य को स्वास्थ्य क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है। कोविड काल में विषम परिस्थितियों में कार्य किया गया, कई संविदा कर्मचारियों को जान भी गंवानी पड़ी।

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Demands of Chhattisgarh NHM contract Workers

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारी वर्ष 2018 में निर्मित मानव संसाधन नीति के दिशा निर्देशों के तहत कार्य करते हैं। समय के साथ कर्मचारियों की समस्याओं में इजाफा होता जा रहा है तथा अब मानव संसाधन नीति में बदलाव की भी आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ अधोलिखित 10 बिंदु मांगों की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करवा कर मांग पूर्ति का निवेदन करता है-

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संविलियन एवं स्थायीकरण – एन एच एम के अनुभवी संविदा कर्मियों का सेवाकाल एवं कार्य की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए, अन्य राज्यों की तर्ज पर इनका संविलियन किया जाए। स्वयं छत्तीसगढ़ प्रदेश में शिक्षा विभाग में कार्यरत हजारों शिक्षाकर्मियों का शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया है।

पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना- एक पृथक पब्लिक हेल्थ कैडर का गठन कर क्लिनिकल तथा मैनेजमेंट कैडर के एन एच एम कर्मचारियों को इसमें समायोजित किया जाए, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था में स्थायित्व एवं पेशेवर गुणवत्ता सुनिश्चित हो। अवगत होना चाहेंगे कि पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना का विजन नवीन राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का एक महत्वपूर्ण विषय है तथा माननीय नरेंद्र मोदी जी की केंद्र सरकार का भी इस पर जोर दिया गया।

ग्रेड पे निर्धारण- पद, योग्यता एवं कार्य अनुभव के अनुसार समान कार्य के लिए समान वेतन की नीति लागू कर ग्रेड पे निर्धारित किया जाए। मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान राज्यों में NHM कर्मचारियों हेतु ग्रेड पे व्यवस्था लागू की गई है। ग्रेड पे के माध्यम से वेतन विसंगति का निराकरण भी होगा।

कार्य मूल्यांकन (CR) व्यवस्था में पारदर्शिता- कई प्रकरणों में देखा जा रहा है कि, किसी कर्मचारी का कार्य मूल्यांकन व्यक्तिगत दुर्भावना के आधार पर खराब कर दिया जाता है इसमें पारदर्शिता लाने बाबत व्यवस्था बनाई जाये।

लंबित 27 प्रतिशत वेतन वृद्धि- जुलाई 2023 को संविदा कर्मचारियों हेतु घोषित 27 प्रतिशत वेतन वृद्धि कई अन्य विभागों जैसे मनरेगा, आजीविका मिशन, आवास योजना में प्रदाय किया जा चुका है एन एच एम कर्मचारी आज पर्यंत तक उक्त लाभ से वंचित हैं।

नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण – जब तक स्थाईकरण हेतु नीति नहीं बन जाती तब तक स्वास्थ्य विभाग में हो रही नियमित भर्तियों में एन एच एम कर्मचारियों के लिए मध्य प्रदेश की तरह 50% सीटें आरक्षित की जावे जिससे अनुभवी मानव संसाधन का लाभ प्रदेश को मिल सके।

अनुकंपा नियुक्ति – सेवा काल के दौरान दिवंगत एन एच एम कर्मियों के परिजनों को मानवीय आधार पर अनुकंपा नियुक्ति की सुविधा प्रदान की जाए। यह सुविधा मध्य प्रदेश में लागू की गई है जबकि छत्तीसगढ़ में यह बिजली विभाग में प्रदान की जा रही है।

मेडिकल एवं अन्य अवकाश की सुविधा – एन एच एम संविदा कर्मियों को भी नियमित कर्मियों के समकक्ष सवैतनिक चिकित्सा अवकाश, संतान पालन अवकाश, अर्जित अवकाश जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएं।

स्थानांतरण नीति – विशेष परिस्थितियों जैसे चिकित्सकीय आवश्यकता, पारिवारिक दायित्व, पति-पत्नी प्रकरण को ध्यान में रखते हुए एक पारदर्शी एवं मानवीय स्थानांतरण नीति बनाई जाए।

न्यूनतम 10 लाख तक कैशलेस चिकित्सा बीमा सुविधा- अल्प वेतन में कार्य कर रहे एन एच एम संविदा कर्मी जब किसी रोग या दुर्घटना से पीड़ित होते हैं तो परिवार पर आर्थिक बोझ पड़ता है कई प्रकरण में धन के अभाव में कर्मचारी की जान भी चली जाती है, उक्त प्रावधान से सामाजिक सुरक्षा पुष्ट होगी।

    संघ की यह भी माँग है कि, सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा का ध्यान करते हुए अस्पतालों में कार्यरत HWC संगवारी की सेवा निरंतर करते हुए पद को ROP में स्वीकृत किया जाये।

    हम सभी आशा करते हैं कि 16 हजार एन एच एम कर्मियों तथा उनके 16 हजार परिवारों को आप का अमूल्य सहयोग अवश्य प्राप्त होगा।

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