हसदेव परसा कोल ब्लॉक में पेड़ों की कटाई से हो रही जीव-जंतुओं की मौत : Death of Animals

Uday Diwakar
3 Min Read

Death of Animals: सरगुजा – अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र के परसा कोल ब्लॉक में कोयला खनन के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है, जिससे इलाके की जैव विविधता और वन्य जीवों का जीवन खतरे में पड़ गया है। बीते कुछ दिनों में परसा, पीईकेबी और केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक के जंगलों में हजारों पेड़ों को काटा गया है, जिसके चलते स्थानीय आदिवासी समुदाय, पर्यावरण प्रेमी और सामाजिक संगठन लगातार विरोध जता रहे हैं।

image 289

Death of Animals भारी संख्या में पेड़ों की कटाई

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, हसदेव क्षेत्र में अब तक करीब 94,000 से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं और आने वाले समय में लगभग 2.75 लाख पेड़ों की कटाई की योजना है। अकेले परसा कोल ब्लॉक में 96,000 से ज्यादा पेड़ों को हटाया जा रहा है, जबकि अन्य खदान क्षेत्रों में भी लाखों पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। अनुमान है कि इन परियोजनाओं के चलते कुल 10 से 12 लाख पेड़ों की बलि दी जा सकती है।

- Advertisement -
Website Designer in AmbikapurWebsite Designer in Ambikapur

image 291

वन्य जीवों के अस्तित्व पर खतरा

इस अंधाधुंध कटाई की वजह से हसदेव के घने जंगलों में रहने वाले वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास तेजी से खत्म हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल पक्षी, सरीसृप और छोटे जीव, बल्कि हाथी, तेंदुआ जैसे बड़े वन्य प्राणी भी प्रभावित हो रहे हैं। कई जीव-जंतुओं के विस्थापित होने और मौत की खबरें सामने आ रही हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों की रिपोर्टों में भी मानव-वन्यजीव संघर्ष और जैव विविधता के नुकसान को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है।

image 290

ग्रामीणों और आदिवासी समुदायों का कहना है कि उन्होंने कभी भी पेड़ों की कटाई या खनन के लिए सहमति नहीं दी है। वे लगातार सरकार और कंपनियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले को लेकर सुनवाई चल रही है। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र, राज्य सरकार और संबंधित कंपनियों से जवाब मांगा है और परसा कोल ब्लॉक में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग की गई है।

हसदेव अरण्य के जंगलों में कोयला खनन के लिए हो रही पेड़ों की कटाई से न केवल पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि जीव-जंतुओं की जान पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय निवासियों, पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि इस विनाशकारी प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए और हसदेव के जंगलों को बचाया जाए।

यह भी पढ़ें-दुर्ग पुलिस ने सेक्स रैकेट का किया भंडाफोड़, छह आरोपी गिरफ्तार

Share This Article
Leave a Comment