Corruption Exposed in Chhattisgarh Health Department: रायपुर : 3 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार का एक बड़ा खुलासा हुआ है। अपर सचिव अमित कटारिया के नाम का इस्तेमाल कर एक गिरोह नर्सिंग होम्स और दवा कंपनियों से करोड़ों की वसूली कर रहा था। रायपुर पुलिस ने शुक्रवार को छापेमारी कर तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया।
पुलिस जांच में पता चला कि गिरोह अमित कटारिया के नाम का फर्जी लेटरहेड इस्तेमाल करता था। नर्सिंग कॉलेजों को लाइसेंस, दवा सप्लायर्स को टेंडर और प्राइवेट हॉस्पिटल्स को भ्रष्टाचार-मुक्त प्रमाणपत्र देने के नाम पर 10 लाख से 1 करोड़ तक की रंगदारी मांगता था। एक आरोपी ने कबूल किया कि उन्होंने पिछले छह महीनों में 5 करोड़ से ज्यादा वसूल लिए। फर्जी व्हाट्सएप नंबरों से धमकी भरे मैसेज भेजे जाते थे, जिसमें सचिव के हस्ताक्षर वाली फर्जी सर्कुलर जोड़े जाते। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह गैंग नई दिल्ली से संचालित हो रहा था, लेकिन स्थानीय एजेंट रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में सक्रिय थे।
रायपुर के लालगंगा थाने की टीम को मुखबिर से सूचना मिली। गुरुवार रात शंकर नगर और देवेंद्र नगर में छापे मारे गए। आरोपियों के पास से 25 लाख नकद, 10 फर्जी लेटरहेड, 5 लग्जरी फोन और सचिव के नाम की स्टैंप बरामद हुए। मुख्य आरोपी विजय पांडे पूर्व स्वास्थ्य विभाग कर्मचारी है, जिसे निलंबन के बाद बदला लेने की बात सामने आई। उसके साथी सोनू वर्मा और राकेश साहू ने तकनीकी सहायता दी। एसएसपी रायपुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह रैकेट पूरे राज्य के स्वास्थ्य तंत्र को कमजोर कर रहा था। ईडी को भी सूचित किया गया है।”
Corruption Exposed in Chhattisgarh Health Department
स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने बयान जारी कर कहा कि उनका नाम फंसाने की साजिश है। विभाग ने सभी लाइसेंस प्रक्रियाओं पर रोक लगा दी। कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा, जबकि बीजेपी ने स्वतंत्र जांच की मांग की। छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल ने अलर्ट जारी किया। पिछले साल भी स्वास्थ्य विभाग में 200 करोड़ के टेंडर घोटाले का मामला सामने आया था, जो अब फिर सुर्खियों में है। गिरोह के लिंक दुर्गा मां पैकेज और कोविड किट घोटालों से भी जुड़ सकते हैं।
पुलिस ने साइबर सेल से डिजिटल ट्रaces खंगालने को कहा। चार और संदिग्धों की तलाश जारी है। सीएम विष्णुदेव साय ने सख्त निर्देश दिए। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो भी जांच में शामिल हो गया। डॉक्टर एसोसिएशन ने कहा, “यह मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ है।” मामला कोर्ट में पहुंच चुका है।
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