बिलासपुर रेलवे कोचिंग डिपो में 133KV हाईटेंशन तार की चपेट में ठेका कर्मी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल : Contract worker in Bilaspur Railway Contact with 133KV High Tension Wire

Uday Diwakar
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  • बिलासपुर रेलवे कोचिंग डिपो में वंदे भारत ट्रेन के एक्स्ट्रा कोच की सफाई के दौरान ठेका कर्मचारी प्रताप बर्मन 133KV हाईटेंशन तार की चपेट में आ गया, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गया।
  • इस हादसे का लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं और कर्मचारियों ने रेलवे प्रशासन से सुरक्षा प्रोटोकॉल की कड़ी समीक्षा और लापरवाहियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

Contract worker in Bilaspur Railway Contact with 133KV High Tension Wire: बिलासपुर :बिलासपुर रेलवे कोचिंग डिपो में 133KV हाईटेंशन तार की चपेट में आकर ठेका कर्मी प्रताप बर्मन गंभीर रूप से झुलस गया। यह हादसा वंदे भारत ट्रेन के एक्स्ट्रा कोच की धुलाई के दौरान हुआ। प्रताप बर्मन जांजगीर-चांपा जिले के मुलमुला का निवासी है। मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।

Contract worker in Bilaspur Railway Contact with 133KV High Tension Wire

हादसे के समय कर्मचारी प्रताप कोच की सफाई कर रहा था। अचानक उसका संपर्क ऊपर से गुजर रहे 133KV हाईटेंशन तार से हो गया। हादसा इतना भयंकर था कि वह मौके पर गिर पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही अन्य कर्मचारी उसे तुरंत वहां से हटाकर अस्पताल ले गए। रेलवे अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद नाजुक हालत के कारण उसे सिम्स और फिर अपोलो अस्पताल रेफर किया गया।

इस घटना ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। कर्मचारी और ठेका कर्मी आरोप लगा रहे हैं कि कोचिंग डिपो के क्षेत्र में बिजली सप्लाई कब बंद होगी और कब चालू होगी इसकी कोई स्पष्ट सूचना या निर्देश कर्मचारी को नहीं दिया गया। सुरक्षा मानकों और औद्योगिक सुरक्षा नियमों का उल्लंघन होने के कारण यह दुर्घटना हुई। रेलवे कर्मचारियों ने रेलवे प्रशासन से इस हादसे की तत्काल जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

रेलवे क्षेत्र में सेवा और मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन जरूरी होता है। खासकर 133KV जैसे हाई टेंशन तारों के नजदीक काम करते समय अतिरिक्त सावधानी और बिजली सप्लाई बंद करना अनिवार्य होता है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में एनटीपीसी में हुए हादसे के बाद यह दुर्घटना सुरक्षा के प्रति रेलवे और ठेकेदारों की जिम्मेदारी को और बढ़ा देती है।

पटरी निरीक्षण, वैधानिक लॉकआउट-टैगआउट प्रक्रियाओं, और परमिट-टू-वर्क जैसे मानकों का सख्ती से पालन न होना लापरवाही के दायरे में आता है। कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण और पीपीई किट उपलब्ध कराना भी जरूरी है जिससे भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

रेलवे विभाग ने अभी तक इस हादसे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन कर्मचारियों की मांग पर जल्द ही जांच शुरू होने की संभावना है। रेलवे प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वे सुरक्षा प्रोटोकॉल का पुनर्निरीक्षण करेंगे और कड़ाई से पालन सुनिश्चित करेंगे।

यह हादसा रेलवे कर्मचारियों की सुरक्षा की अनदेखी को उजागर करता है और रेलवे विभाग के लिए गंभीर चेतावनी है कि वह अपने सुरक्षा उपायों को मजबूत करे। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे विभाग को ठेकेदारों और कर्मचारियों दोनों को बेहतर प्रशिक्षण और सुरक्षित कार्य क्षेत्रों का आश्वासन देना होगा।

इस हादसे ने रेलवे कर्मचारियों के बीच आशंका और भय पैदा कर दिया है। स्थानीय लोग और कर्मचारी सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और दुर्घटना से पीड़ित प्रताप बर्मन के त्वरित स्वास्थ्य लाभ की कामना कर रहे हैं। प्रशासन से यह भी आग्रह किया जा रहा है कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और आगे इस तरह की लापरवाहियों को दोबारा न होने दिया जाए।

बिलासपुर रेलवे कोचिंग डिपो में हुई इस घटना ने रेलवे सुरक्षा की चग गई कमियों और लापरवाहियों को उजागर कर दिया है। यह एक आह्वान है कि रेल प्रशासन और ठेकेदार सुरक्षा को सर्वोपरि रखें ताकि अगली बार कोई जान या गंभीर चोट का मामला न हो।

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