Contaminated water wreaks havoc in Ambikapur: सरगुजा:अंबिकापुर।छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर में दूषित पेयजल की आपूर्ति से फैले पीलिया के प्रकोप ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गौरव पथ स्थित नगर निगम के नवीनतम कार्यालय का जोरदार घेराव कर प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि नगर निगम और जिला प्रशासन की घोर उदासीनता के कारण शहरवासी जहरीले पानी को पीने को मजबूर हैं, जिससे दो लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों बीमार पड़ चुके हैं। कांग्रेस ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की है।
सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय निवासी नगर निगम कार्यालय पहुंचे। उनके हाथों में बैनर, पोस्टर और प्लेकार्ड थे, जिन पर लिखा था- ‘दूषित पानी बंद करो, जिंदगियां बचाओ’, ‘निगम की लापरवाही से मौतें हो रही हैं’ और ‘उच्च जांच समिति गठित करो’। प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे जिला कांग्रेस अध्यक्ष रमेश सिंह ने बताया, “खटिकपारा के 13 वर्षीय बालक रोहन और झंझटपारा के 45 वर्षीय निवासी रामलाल की पीलिया से मौत हो चुकी है। इसके अलावा 40 से अधिक लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि सैकड़ों घरों में लक्षण दिख रहे हैं। नगर निगम का पानी ट्रीटमेंट प्लांट खराब होने के बावजूद सुधार नहीं किया गया।”
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने निगम आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की और ज्ञापन सौंपा। पुलिस ने हल्की लाठीचार्ज की कोशिश की, लेकिन स्थिति नियंत्रण में रही। निगम आयुक्त डॉ. अनिल कुमार ने कहा, “हम पानी की जांच करा रहे हैं। कुछ इलाकों में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए हैं, जिसे दूर करने के लिए क्लोरीनेशन बढ़ाया गया है।” हालांकि, कांग्रेस ने इसे ‘आखिरी पल की कोशिश’ बताते हुए खारिज कर दिया।
अंबिकापुर जिले के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में पीलिया के 150 से अधिक केस दर्ज हो चुके हैं, जिनमें से अधिकांश दूषित पानी से जुड़े हैं। खटिकपारा, झंझटपारा, गौरव पथ, रेलवे स्टेशन रोड और बस स्टैंड क्षेत्र सबसे प्रभावित हैं। जिला अस्पताल में 25 मरीज भर्ती हैं, जबकि निजी क्लिनिकों में भी भीड़ है। विशेषज्ञों का कहना है कि हेपेटाइटिस ए वायरस दूषित पानी से फैल रहा है, जो लीवर को नुकसान पहुंचाता है।
स्थानीय निवासी मीना बाई (खटिकपारा) ने बताया, “हमारे मोहल्ले का नल का पानी पीला और बदबूदार है। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन निगम वाले आश्वासन ही देते रहते हैं।” इसी तरह, झंझटपारा के व्यापारी संघ अध्यक्ष ने कहा कि दुकानें बंद हो रही हैं क्योंकि ग्राहक कम हो गए हैं। आर्थिक नुकसान का अनुमान लाखों में है।
कांग्रेस ने इसे भाजपा सरकार की नाकामी करार दिया। पूर्व विधायक विजय कुमार ने कहा, “सर्जुजा संभाग का यह प्रमुख शहर है, फिर भी बुनियादी सुविधाएं लाइलाज। राज्य सरकार सो रही है।” उन्होंने सीएम विष्णुदेव साय से हस्तक्षेप की मांग की। दूसरी ओर, भाजपा ने कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया। जिला भाजपा अध्यक्ष ने कहा, “निगम कांग्रेस के हाथ में भी था, तब क्या किया? हम तत्काल कदम उठा रहे हैं।”
Contaminated water wreaks havoc in Ambikapur
यह घटना छत्तीसगढ़ में जल संकट की व्यापक समस्या को उजागर करती है। पिछले साल रायगढ़ और कोरबा में भी इसी तरह के मामले सामने आए थे, जहां दूषित पानी से हैजा फैला। विशेषज्ञों के मुताबिक, अंबिकापुर का जल स्रोत समरी नदी पर निर्भर है, जो औद्योगिक कचरे से प्रदूषित हो रही है। नगर निगम का पुराना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट क्षमता से बाहर है और नया प्लांट अभी निर्माणाधीन।
निवासियों ने आरोप लगाया कि निगम ने पानी की नियमित जांच नहीं की। RTI से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले छह माह में केवल दो बार जल परीक्षण हुआ, जिसमें भी बैक्टीरिया पाए गए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं। जिला कलेक्टर ने बैठक बुलाई है, लेकिन कांग्रेस ने इसे ‘दिखावा’ बताया। स्वास्थ्य विभाग ने अब मास्क वितरण और जागरूकता अभियान शुरू किया है।
यह भी पढ़ें-नमनाकला में 13 वर्षीय बालक की पीलिया से मौत, शहर में 50 संक्रमित; प्रशासन सतर्क