पीएससी परीक्षाओं पर कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का हमला, भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप : Congress President Deepak Baij Attacks PSC exams Accuses BJP of Corruption

Uday Diwakar
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  • प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार ने चुनाव में यूपीएससी जैसी पारदर्शी पीएससी परीक्षा कराने का वादा किया था, लेकिन अब इस परीक्षा को पूरी तरह से भ्रष्टाचार और गड़बड़ी का शिकार बना दिया है।
  • दीपक बैज ने पीएससी परीक्षा की जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग की है, साथ ही कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करने वालों के नाम सार्वजनिक होना परीक्षा की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल है।

Congress President Deepak Baij Attacks PSC exams Accuses BJP of Corruption: रायपुर : छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने हाल ही में प्रेस वार्ता में भाजपा सरकार पर राज्य लोक सेवा आयोग (पीएससी) की परीक्षा प्रणाली में व्यापक भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय भाजपा ने जनता से पीएससी परीक्षाओं को यूपीएससी के समान पारदर्शिता और निष्पक्षता से कराने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद यह वादा पूरी तरह टूट गया। बैज ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने पीएससी परीक्षाओं को ही व्यंग्य और मजाक बना दिया है, जिससे हजारों परीक्षार्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है।

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Congress President Deepak Baij Attacks PSC exams Accuses BJP of Corruption

दीपक बैज ने साफ कहा कि भाजपा ने चुनाव के वक्त युवाओं को यूपीएससी जैसी निष्पक्ष पीएससी परीक्षा दिलाने का वादा करके भरोसा जीता, लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार ने इस वादे को पूरी तरह से भूल गया। उन्होंने कहा, “आज पेपर लीक, भ्रष्टाचार और पक्षपात की जोर-शोर से घटनाएं हो रही हैं, जिससे पीएससी की विश्वसनीयता खत्म हो चुकी है।” भाजपा सरकार पर परीक्षा प्रक्रिया को धूमिल करने और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि यह बड़ा धोखा है।

बैज ने पीएससी की परीक्षा प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और मूल्यांकन का काम ऐसे व्यक्तियों को दिया जा रहा है जिन्हें इस कार्य के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। कुछ शिक्षक नियमों और मानकों के खिलाफ कॉपी जांच में लगे हुए हैं, जो पूरे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है। उन्होंने बिलासपुर के पीजीबीटी कॉलेज के कुछ शिक्षकों का नाम लेकर कहा कि ये भी जांचकार्य में लगे हैं, जबकि वे डेपुटेशन पर हैं या नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

बैज ने यह भी कहा कि परीक्षा में प्रतिभागियों को नौटंकी और “सोल्वर” के जरिए मदद दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा में ‘धोखाधड़ी’ इतनी बढ़ गई है कि इससे न्याय संगत भर्ती प्रक्रिया पर गहरा विश्वास टूट गया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने परीक्षा की गोपनीयता के उल्लंघन को लेकर खास चिंता जताई। उन्होंने कहा, “जब 5वीं और 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में कॉपी जांच के लिए जिम्मेदार लोगों के नाम भी गोपनीय रखे जाते हैं, तो पीएससी जैसी उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा में भी नामों को गोपनीय रखना चाहिए। लेकिन यहाँ नाम सार्वजनिक हो रहे हैं जो परीक्षण की सुरक्षा और निष्पक्षता से खिलवाड़ है।”

सीबीआई जांच की मांग

बैज ने प्रदेश सरकार से मांग की कि वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के लिए तुरंत सीबीआई को कार्यभार सौंपें। उनका कहना था कि केवल एक स्वतंत्र और सक्षम जांच एजेंसी ही इस भ्रष्टाचार के पूरे जाल को उजागर कर सकती है और पीएससी की साख को वापस ला सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच के बाद दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।

बैज ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से न केवल परीक्षाओं की विश्वासनीयता खत्म हो रही है, बल्कि प्रदेश के युवाओं का भविष्य भी खतरे में पड़ गया है। उन्होंने बताया कि आज के युग में जब प्रतिस्पर्धा बेहद तेज है, ऐसे में भ्रष्टाचार और पक्षपात युवाओं के सपनों पर पानी फेर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम यह नहीं चाहेंगे कि छत्तीसगढ़ के युवा इस तरह की गड़बड़ी के कारण बेरोजगार और निराश हो जाएं।”

बैज ने आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने और सतह से नीचे करने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि पीएससी जैसी अहम परीक्षाओं में यदि गड़बड़ी का लगातर पर्दाफाश हो रहा है, तो सरकार को तुरंत कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “लोग जवाबदेही चाहते हैं, इसलिए हम इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएंगे।”

पिछले वर्षों में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में कई बार धांधली और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। सीबीआई ने इन मामलों की जांच कर कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका उजागर की है। 2021 के पीएससी भर्ती मामले में गंभीर अनियमितताओं के कारण अब तक कई ठिकानों पर छापेमारी भी हुई है। इससे साबित होता है कि केवल विभागीय जांच से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि कड़ी और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है।

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