सियासी संग्राम: अंबिकापुर में महिला सुरक्षा पर कांग्रेस का मौन कैंडल मार्च, पुलिस को निशाने पर : Congress Holds Silent Candlelight March on Women’s Safety in Ambikapur

Uday Diwakar
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Congress Holds Silent Candlelight March on Women’s Safety in Ambikapur: सरगुजा:​​​अंबिकापुर: अंबिकापुर की सड़कों पर एक मौन कैंडल मार्च ने राजनीतिक हलचल मचा दी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस की कथित निष्क्रियता का विरोध जताया। मोमबत्तियों की रोशनी में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे, नारे लगाए और सरकार पर सीधा निशाना साधा। यह प्रदर्शन हालिया अपराध घटनाओं के बाद भड़का, जहां महिलाओं पर हमलों के मामलों में पुलिस की ढिलाई के आरोप लगे। BJP ने इसे राजनीतिक ड्रामा करार दिया, लेकिन कांग्रेस ने इसे बेटियों की सुरक्षा का सवाल बताया।


अंबिकापुर, सूरजपुर जिले का प्रमुख शहर, आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के बावजूद महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जूझ रहा है। पिछले एक महीने में तीन दुष्कर्म के प्रयास, दो छेड़खानी और एक हत्या के मामले दर्ज हुए। एक घटना में 19 वर्षीय लड़की को रात में लौटते वक्त बदमाशों ने घेर लिया, लेकिन पुलिस की देरी से आरोपी फरार हो गए। कांग्रेस नेता ने कहा, “पुलिस थाने में FIR तक नहीं लिखती, क्या बेटियां असुरक्षित घूमें?” स्थानीय महिलाएं भी सड़कों पर उतरीं, जिन्होंने रोजमर्रा की असुरक्षा की कहानियां सुनाईं।


कांग्रेस जिला अध्यक्ष की अगुवाई में शुरू हुआ मार्च मुख्य चौक से विधानसभा तक निकला। कार्यकर्ता काले बैलून और प्लेकार्ड लेकर चले, जिन पर लिखा था— “पुलिस सो रही है, बेटियां रो रही हैं”, “महिला सुरक्षा में BJP फेल”। स्पीकर ने पुलिस पर निष्क्रियता के तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा, “मिशन शक्ति योजना कागजों में सिमट गई। थानों में महिला डेस्क नाममात्र के हैं।” मार्च के अंत में एक ज्ञापन DM को सौंपा गया, जिसमें 24 घंटे CCTV, पेट्रोलिंग बढ़ाने और दोषियों को फांसी की मांग की गई। सैकड़ों महिलाओं ने हिस्सा लिया, जो इसे ऐतिहासिक बतला रही हैं।


BJP नेताओं ने कांग्रेस के मार्च को सियासी स्टंट कहा। जिला अध्यक्ष बोले, “कांग्रेस सत्ता से बाहर होने पर ड्रामा कर रही। हमारी सरकार ने महिला हेल्पलाइन 181 सक्रिय की, थानों में महिला थाना खोला। अपराध दर घटी है।” उन्होंने कांग्रेस शासनकाल के पुराने मामलों का जिक्र किया। एक BJP विधायक ने कहा, “विपक्ष सड़कों पर उतरता है तो समर्थन, सत्ता में आते ही भूल जाते।” दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच तनाव रहा, लेकिन पुलिस ने शांतिपूर्ण रखा।

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SP ने सफाई दी कि सभी मामलों में FIR दर्ज, आरोपी गिरफ्तार। “हमारी टीमें रात-दिन मुस्तैद हैं। 2026 में अपराध दर 15% घटी।” उन्होंने विशेष ड्राइव का ऐलान किया— ग्रामीण क्षेत्रों में सेल्फ डिफेंस कैंप, स्कूलों में जागरूकता। लेकिन विपक्ष ने आंकड़ों पर सवाल उठाए। महिला संगठनों ने समर्थन दिया, कहा कि जमीनी हकीकत अलग है। अंबिकापुर में रात के बाद सड़कें सुनसान, लड़कियां डर से घरों में कैद।


यह सियासी संग्राम असल में बेटियों की सुरक्षा का सवाल है। आदिवासी क्षेत्र में साक्षरता कम, जागरूकता कम— अपराधी मौके तलाशते। विशेषज्ञों का कहना है, राजनीति से ऊपर उठकर समाधान चाहिए। CM ने ट्वीट कर जांच के आदेश दिए। स्थानीय व्यापारियों ने समर्थन जताया, कहा— “सुरक्षित शहर ही समृद्ध शहर।” अब सवाल यह है कि क्या यह मार्च बदलाव लाएगा? या सियासत की भूनी में दब जाएगा? अंबिकापुर की बेटियां इंतजार कर रही— न्याय और सुरक्षा का।

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