










Commission Embezzlement is Rampant in the Health Department: रायपुर : स्वास्थ्य विभाग, जिसे कभी सेवा का केंद्र माना जाता था, आज भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के वायरस से बुरी तरह प्रभावित हो चुका है। चिकित्सा संसाधनों, दवाओं की खरीदारी, उपकरणों और विभागीय भर्तियों तक, हर जगह कमीशन का खेल बढ़ता ही जा रहा है।


Commission Embezzlement is Rampant in the Health Department
देखा गया की रायपुर हॉस्पिटल में ऐसी दवाई बहुत सारी संख्या में रखा गया है जिसमे से कई दवाई के एक्सपायरी डेट खत्म हो चुकी है और बहुत सारी ऐसी दवाइया है जिसका डेट 3 मंथ समाप्त हो जाएगी।

जैसे-जैसे स्वास्थ्य का बजट बढ़ता है, वैसे-वैसे कमीशन और भ्रष्टाचार के मामले भी बढ़ते जाते हैं। नतीजा यह होता है कि असल में मरीजों तक सुविधाएं नहीं पहुंच पातीं और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग होता है कमीशनखोरी की वजह से गरीब और जरूरतमंद लोगों को न केवल आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है, बल्कि अपनों के इलाज के लिए कर्ज तक लेना पड़ जाता है।

सरकार समय-समय पर जांच के निर्देश और कार्रवाई करती है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की चुप्पी और बड़े पैमाने पर फैले नेटवर्क की वजह से समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है। मीडिया और समाजसेवियों द्वारा आवाज उठाने पर भी कइयों को धमकी दी जाती है या उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।

स्वास्थ्य विभाग में कमीशनखोरी देश की चिकित्सा व्यवस्था पर एक बड़ा कलंक बन चुकी है। जब तक सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति ईमानदारी से लागू नहीं होती और जनता जागरूक होकर सवाल नहीं पूछती, तब तक इस गोरखधंधे पर पूरी तरह से अंकुश लगाना मुश्किल है। स्वास्थ्य सेवाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है—वरना जनता का भरोसा टूटता जाएगा और व्यवस्था की साख लगातार गिरती जाएगी।
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