छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य बजट: 1600 डॉक्टर भर्ती, 4500 करोड़ से मुफ्त इलाज का कायाकल्प : Chhattisgarh Health Budget

Uday Diwakar
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Chhattisgarh Health Budget: सरगुजा:​​​अंबिकापुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में पिछले दो वर्षों के दौरान हुए क्रांतिकारी परिवर्तनों का विस्तृत ब्यौरा पेश किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इन दो वर्षों में न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया है, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में मानव संसाधन की भारी कमी को दूर करने के लिए ऐतिहासिक कदम भी उठाए गए हैं।

मंत्री जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे पहले डॉक्टर भर्ती अभियान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने 1600 नए डॉक्टरों की भर्ती पूरी कर ली है, जो प्रदेश के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का बड़ा कदम है। इससे पहले चिकित्सा क्षेत्र में डॉक्टरों की कमी एक बड़ी समस्या थी, जिसके कारण मरीजों को जिला अस्पतालों से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक उचित इलाज नहीं मिल पाता था। अब ये नए डॉक्टर सरगुजा, बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों सहित सभी जिलों में तैनात किए जा चुके हैं।

स्वास्थ्य बजट के संदर्भ में मंत्री ने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में 4500 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है, जो मुफ्त इलाज योजनाओं के लिए समर्पित है। इस राशि से शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना को नई गति मिली है। गरीब परिवारों को अब महंगे इलाज का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। मंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण इलाज को वहनीय और सुलभ बनाना है। इस योजना के तहत अब तक लाखों मरीजों को निःशुल्क उपचार प्रदान किया जा चुका है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जायसवाल ने बुनियादी ढांचे के विकास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 25 नए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण किया गया है, जबकि 50 मौजूदा अस्पतालों का उन्नयन कार्य पूरा हो चुका है। सरगुजा प्रमखंड के कुनकुरी और मनेंद्रगढ़ में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए विशेष फंड जारी किया गया है। इसके अलावा, डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल रायपुर में एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी आधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं। नक्सल प्रभावित जिलों के लिए 220 करोड़ रुपये का अलग प्रावधान किया गया है, जिससे वहां की स्वास्थ्य सेवाएं सशक्त हुई हैं।

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मानव संसाधन विकास के क्रम में नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने जानकारी दी कि 5000 नर्सों और तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 1000 से अधिक क्लिनिक संचालित हो रहे हैं, जो मजदूरों और किसानों को तत्काल चिकित्सा सुविधा प्रदान कर रहे हैं। सिकल सेल एनीमिया जैसे जनजातीय रोगों के लिए विशेष संस्थान स्थापित किए गए हैं। जशपुर और मनेंद्रगढ़ में फिजियोथेरेपी केंद्र भी चालू हो चुके हैं।

मंत्री ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि दो वर्ष पूर्व जिला अस्पतालों में औसतन 40 प्रतिशत बेड खाली रहते थे, लेकिन अब यह आंकड़ा घटकर 10 प्रतिशत रह गया है। मरीजों की संतुष्टि दर 65 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत हो गई है। आयुष्मान भारत योजना के तहत 182 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 1850 करोड़ आवंटित हैं। इन योजनाओं से प्रदेश के 80 लाख से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।

सरगुजा संभाग के संदर्भ में मंत्री ने विशेष रूप से उत्साह दिखाया। उन्होंने कहा कि अंबिकापुर जिला अस्पताल को सुपर स्पेशलिटी का दर्जा दिया जा रहा है। यहां कार्डियक और कैंसर विभाग स्थापित हो रहे हैं। सरगुजा के दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की संख्या दोगुनी कर दी गई है। प्रयास विद्यालयों के साथ स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन नियमित रूप से हो रहा है। मंत्री ने स्थानीय जनजातीय परिवारों को चना वितरण योजना से भी जोड़ा, जो पोषण सुधार में सहायक सिद्ध हो रही है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग नई ऊंचाइयों को छू रहा है, ऐसा दावा करते हुए जायसवाल ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले सरकारें केवल घोषणाएं करती थीं, लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार कार्यान्वयन पर जोर दे रही है। केंद्रीय बजट 2026 में भी छत्तीसगढ़ को स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेष सहायता मिली है, जिसमें जनजातीय स्वास्थ्य वेधशालाओं का प्रावधान शामिल है। इससे राज्य की विकास रफ्तार और तेज होगी।

Chhattisgarh Health Budget

मंत्री ने अंत में भविष्य की योजनाओं का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष 2000 और डॉक्टर भर्ती का लक्ष्य है। सभी जिला अस्पतालों में 108 एम्बुलेंस सेवाएं चालू होंगी। सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों की संख्या 10 तक पहुंचेगी। आयुष्मान योजना को और विस्तार दिया जाएगा, ताकि कोई भी गरीब इलाज से वंचित न रहे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी उपलब्धियों का पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन दिखाया।

यह प्रेस कॉन्फ्रेंस प्रदेश की स्वास्थ्य यात्रा का एक मील का पत्थर साबित हुई। सरगुजा और छत्तीसगढ़ के लोगों में उत्साह है कि अब उन्हें दिल्ली या नागपुर नहीं जाना पड़ेगा। सरकार की यह पहल अंत्योदय के सिद्धांत को साकार कर रही है।

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