संघर्ष और मेहनत का फल: मैनपाट की चंचल पैंकरा ने CGPSC 2024 में ST वर्ग में प्रथम रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर बनकर प्रदेश को किया गौरवान्वित : Chanchal Pankra from Mainpat made the state proud by securing the first rank in the ST category in the CGPSC 2024 and becoming a Deputy Collector

Uday Diwakar
4 Min Read

Chanchal Pankra from Mainpat made the state proud by securing the first rank in the ST category in the CGPSC 2024 and becoming a Deputy Collector: सरगुजा:​​​अंबिकापुर।​छत्तीसगढ़ की मैनपाट की बेटी चंचल पैंकरा ने CGPSC 2024 में अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त कर पूरे प्रदेश को गर्व महसूस करा दी है। यह सफलता संघर्ष और मेहनत का फल है, जिसने गरीब परिवार की बेटी को डिप्टी कलेक्टर के पद पर पहुंचाया।

चंचल पैंकरा का परिचय

  • नाम: चंचल पैंकरा
  • पिता: रघुबर प्रसाद पैंकरा (सब्जी बेचने वाले किसान)
  • माता: श्रीमती शुन्तिला पैंकरा
  • स्थान: मैनपाट, ग्राम पंचायत काराबेल, छत्तीसगढ़
  • उपलब्धि: CGPSC 2024 में ST वर्ग में प्रथम स्थान (प्रथम रैंक)
  • चयन: डिप्टी कलेक्टर पद के लिए

संघर्ष और मेहनत का सफर

मैनपाट जैसे पहाड़ी क्षेत्र में जन्मी और पली-बढ़ी चंचल ने अपने संघर्ष की शुरुआत परिवार की मामूली आमदनी से की। उनके पिता रघुबर और माता श्रीमति शुन्तिला ने किसान की जिंदगी जीते हुए भी बेटी के उज्जवल भविष्य के लिए कड़ी मेहनत की। चंचल के मन में हमेशा से पढ़ाई का जुनून रहा, उसने अपने स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की।

उड़ान की शुरुआत और सफलता

चंचल ने अपनी कड़ी मेहनत, लगन और ईमानदारी से पढ़ाई की। वह पूरी लगन से पढ़ाई में जुटी रही और सफल हुई। उनके इस सफल प्रयास ने न केवल परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे क्षेत्र में भी प्रेरणा का स्रोत बन गई। अपने आप में अनूठी इस सफलता का कारण उनके perseverance और patience रहा है।

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Chanchal Pankra from Mainpat made the state proud by securing the first rank in the ST category in the CGPSC 2024 and becoming a Deputy Collector

चंचल की कहानी हमारे लिए बहुत कुछ सिखाती है कि संघर्ष की राह कठिन जरूर होती है, मगर मेहनत और ईमानदारी से किया गया प्रयास कभी निष्फल नहीं जाता। उनकी कहानी यह भी साबित करती है कि गरीबी और सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा

चंचल पैंकरा ने साबित कर दिया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है, बल्कि निरंतर मेहनत और सकारात्मक सोच से ही मंजिल मिलती है। उनकी यह कहानी युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है कि कठिनाइयों के बीच भी यदि उम्मीद और मेहनत कायम रहे, तो मंजिल दूर नहीं।

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यह सफलता कहानी यह भी संदेश देती है कि शिक्षा एक ऐसी ताकत है, जो गरीबी, पिछड़ेपन और सामाजिक बाधाओं को तोड़ सकती है। हर युवा को अपने सपनों को सच करने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।

यह गर्व की बात है कि एक गरीब परिवार की बेटी ने पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया। चंचल की कड़ी मेहनत और अदम्य साहस हमें सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी कहानी साबित करती है कि “संघर्ष और मेहनत का फल” सच में बहुत मीठा होता है।

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