CGPSC scam case CBI arrests 5 accused including former controller of examinations Aarti Vasnik: रायपुर : छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) घोटाला मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही चार अन्य आरोपियों को भी हिरासत में लिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में डिप्टी कलेक्टर पद पर चयनित और पूर्व सचिव के पुत्र सुमित ध्रुव, निशा कोसले, दीपा आदिल, और जीवन किशोर ध्रुव शामिल हैं। इस मामले ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CGPSC scam case CBI arrests 5 accused including former controller of examinations Aarti Vasnik
CGPSC घोटाला 2020 से 2022 के बीच हुए भर्ती परीक्षाओं और साक्षात्कारों से जुड़ा है, जिसमें कई अधिकारी और उच्च पदस्थ लोग मिलीभगत करके अपने करीबी रिश्तेदारों को सरकारी पदों पर नियुक्त कराने के लिए कथित तौर पर गड़बड़ी कर रहे थे। इस भ्रष्टाचार में परीक्षा नियंत्रक, सचिव, आयोग के अधिकारियों के अलावा प्रभावशाली उद्योगपतियों का भी नाम सामने आया है।
CBI ने जुलाई 2024 में इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। आरोप है कि तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, परीक्षा नियंत्रक और अन्य अधिकारियों ने परीक्षा संबंधी दस्तावेज, जैसे प्रश्न पत्रों को पहले से अपने करीबी रिश्तेदारों को मुहैया कराया। इसके अलावा, वे अभ्यर्थियों को आकार देने और चयन प्रक्रिया में अनियमितता करने में शामिल थे।
CBI के अनुसार, दरअसल टामन सिंह सोनवानी ने परीक्षा के नियमों में परिवर्तन कर ‘रिश्तेदार’ की परिभाषा में से ‘नेपhew’ शब्द हटा दिया ताकि उनके भतीजों को भर्ती प्रक्रिया में फायदा मिल सके। इस चालाकी के तहत उन्होंने परीक्षा के नियमों का फायदा उठाया।
CBI की जांच में यह भी सामने आया कि सोनवानी और उनके साथियों ने उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल से 45 लाख की रिश्वत लेकर उनके बेटे और बहू को डिप्टी कलेक्टर पद पर चयनित कराया। इस राशि को CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) के नाम पर गैर सरकारी संगठन ‘ग्रामीण विकास समिति’ के माध्यम से दिया गया, जो सोनवानी परिवार का था।
CBI केस की गहनता से जांच कर रही है। अभी कई आरोपों की समीक्षा चल रही है, जैसे अन्य पदों पर नियुक्तियों की गुणवत्ता, साक्षात्कार प्रक्रिया में गड़बड़ी, और अन्य संदिग्ध गतिविधियां। CBI ने इस मामले में कई साक्ष्य जुटाए हैं और समय-समय पर कोर्ट को जांच के प्रगति की जानकारी दे रही है।
CGPSC घोटाले ने छत्तीसगढ़ की सरकार और लोक सेवा आयोग की छवि को धक्का पहुंचाया है। विपक्षी दलों ने इस घोटाले की कड़ी निंदा की है और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस घोटाले के खुलासे के बाद भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए नीतिगत बदलावों की भी मांग उठ रही है ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सके।
CGPSC घोटाला मामला एक गहरे स्तर पर संचालित भर्ती भ्रष्टाचार का खुलासा है, जिसमें सरकारी अधिकारियों और उद्योगपतियों के गठजोड़ से परीक्षाओं की प्रक्रिया को नष्ट करने की कोशिश की गई। CBI की गिरफ्तारी से यह दर्शाता है कि जांच एजेंसियां इस तरह के मामलों पर सख्ती से ध्यान दे रही हैं। अब प्रदेश की जनता की निगाहें इस मामले की पूरी जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर टिकी हुई हैं ताकि छत्तीसगढ़ में भर्ती प्रणाली पारदर्शी और निष्पक्ष बने।
इस पूरे मामले की सटीक जांच और निष्पक्ष न्याय आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के भर्ती ढांचे को मजबूत और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
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