Birla Open Mind School in Surguja accused of selling expensive books and uniforms to parents: सरगुजा:सरगुजा जिले के सरगवां में स्थित बिरला ओपन माइंड स्कूल के खिलाफ अभिभावकों से महंगी किताबें और ड्रेस खरीदने को मजबूर किए जाने पर शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। एक अभिभावक राहुल अग्रवाल द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत करने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने स्कूल पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि भविष्य में ऐसी कोई अनुचित व्यवस्था पाई गई तो स्कूल की मान्यता रद्द की जा सकती है।
Birla Open Mind School in Surguja accused of selling expensive books and uniforms to parents
शिकायत में बताया गया था कि स्कूल प्रबंधन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप SCERT या NCERT की पुस्तकों के बजाय महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें अनिवार्य कर दी हैं। अभिभावकों को ये किताबें और ड्रेस केवल एक ही दुकान से खरीदनी पड़ती हैं, जहां कीमतें सामान्य बाजार से कई गुना अधिक हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि 24 पन्नों की एक पतली किताब 650 रुपये की है, जो आम परिवारों के लिए भारी आर्थिक बोझ बन रही है।
जिला शिक्षा अधिकारी की जांच में यह पाया गया कि नर्सरी से आठवीं कक्षा तक किताबों और ड्रेस की कीमतें अत्यधिक हैं। उदाहरण स्वरूप, नर्सरी की दस किताबें 2946 रुपये, यूकेजी की 14 किताबें 3692 रुपये, कक्षा पांचवी की किताबें 6517 रुपये और कक्षा आठवीं की किताबें 7576 रुपये की हैं। ड्रेस की कीमत भी करीब 4300 रुपये है। इसके अलावा, कक्षा एक से चार तक फोटो कॉपी या आधी किताबें लेने की अनुमति नहीं है, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
जांच के परिणामस्वरूप DEO ने स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी किया था, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर लगाया गया जुर्माना। शिक्षा विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि शिक्षा के नाम पर इस प्रकार की मनमानी नहीं बर्दाश्त की जाएगी।
स्कूल की यह मनमानी अभिभावकों में भारी नाराजगी पैदा कर रही है। कई अभिभावक बता रहे हैं कि शिक्षा के खर्चों में इतनी वृद्धि से कई परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। वे चाहते हैं कि शिक्षा विभाग इस मामले की कड़ी निगरानी करे और नियमों के अनुसार शिक्षा उपलब्ध कराए।
इस घटना ने छत्तीसगढ़ के शिक्षा क्षेत्र में निजी स्कूलों की मनमानी और नियमों की अवहेलना की भी पोल खोल दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और शिक्षा विभाग को अधिक सख्ती से ऐसे स्कूलों पर नजर रखनी चाहिए, जिससे शिक्षा को एक समान, सुलभ और किफायती बनाया जा सके।
सरगुजा कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी अब पूरे जिले के स्कूलों में ऐसी अनियमितताओं की जांच कर रहे हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि इससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा। अभिभावक भी इस क्षेत्र में जागरूक हो रहे हैं और अपनी आवाज सरकार तक पहुंचा रहे हैं।
इस मामले में डीईओ के कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि शिक्षा विभाग शिक्षा के अधिकारों की रक्षा के लिए गंभीर है और संयुक्त प्रयासों से शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में कार्यरत है। स्कूल प्रबंधन को भी चाहिए कि वे शिक्षा की गुणवत्ता और नियमों का पूरा पालन करें और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न डालें।
सरगुजा जिले के अभिभावकों के लिए यह कार्रवाई एक राहत की खबर है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में शिक्षा सुविधाएँ सहज और सस्ती होंगी, जिससे बच्चों और उनके परिवारों का भविष्य उज्ज्वल होने में मदद मिलेगी।
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