Bilaspur High Court hears PIL in Surajpur school case of hanging a girl: सूरजपुर :छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के रामानुजनगर ब्लॉक स्थित नारायणपुर गांव के हंस वाहिनी विद्या मंदिर स्कूल में एक चार वर्षीय LKG छात्र को होमवर्क न करने पर दो महिला शिक्षिकाओं द्वारा क्रूरतापूर्ण सजा देने की घटना ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है। शिक्षिका काजल साहू और अनुराधा देवांगन ने बच्चे के कपड़े उतारकर उसकी शर्ट को रस्सी से बांधकर स्कूल परिसर के पेड़ पर घंटों लटका दिया, जबकि बच्चा रोता-बिलखता रहा। वीडियो वायरल होने के बाद अभिभावकों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया और प्रशासन हरकत में आ गया।
घटना 23 नवंबर 2025 को सोमवार सुबह घटी, जब नर्सरी कक्षा में होमवर्क चेक किया जा रहा था। काजल साहू ने बच्चे को क्लास से बाहर निकाला, उसके कपड़े खोल दिए और शर्ट को रस्सी से बांधकर पेड़ पर लटका दिया। पास की छत से एक ग्रामीण ने वीडियो बनाया, जिसमें शिक्षिकाएं रिकॉर्डिंग बंद करने को कहती दिखीं। बच्चा घंटों तक लटका रहा, मदद की पुकार करता रहा, लेकिन शिक्षिकाओं ने अनदेखा किया। बच्चे के पिता संतोष कुमार साहू ने एफआईआर की मांग की है।
वीडियो वायरल होते ही जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा ने संज्ञान लिया। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मनोज यादव और डीएस लाकड़ा ने जांच की, रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी। काजल साहू को बर्खास्त कर दिया गया, स्कूल को मान्यता समाप्ति नोटिस जारी हुआ। स्कूल संचालक सुभाष शिवहरे ने शिक्षिकाओं को निलंबित करने का आदेश दिया और माफी मांगी। एक आरोपी शिक्षिका ने कहा, “मुझसे गलती हुई, पहली बार किया, जानबूझकर नहीं।”
बिलासपुर हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
बिलासपुर हाईकोर्ट ने मामले को जनहित याचिका मानकर त्वरित संज्ञान लिया। कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से शपथ पत्र मांगा, अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2025 को निर्धारित की। कोर्ट ने कहा, “शिक्षा के नाम पर बच्चों के साथ क्रूरता असहनीय है, निजी स्कूलों में अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं।” यह कार्रवाई राज्य के निजी शिक्षण संस्थानों के मनमाने रवैये पर कड़ा संदेश देती है।
घटना के वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी। अभिभावकों ने स्कूल के बाहर हंगामा किया, कड़ी सजा की मांग की। स्थानीय लोगों ने बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठाए, “अनहोनी होती तो जिम्मेदारी कौन लेता?” मीडिया चैनलों जैसे NDTV, India TV और YouTube पर खबरें सुर्खियां बनीं। सूरजपुर के ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।
छत्तीसगढ़ में स्कूलों में शारीरिक दंड की घटनाएं चिंताजनक हैं। सर्जूजा जिले के अंबिकापुर के कार्मेल कॉन्वेंट में एक शिक्षिका पर कक्षा 6 की छात्रा के आत्महत्या में सहयोग का आरोप लगा, हाईकोर्ट ने corporal punishment को असंवैधानिक ठहराया। कोर्ट ने कहा, “बच्चा छोटा होने से कम इंसान नहीं, अनुशासन के नाम पर हिंसा अमानवीय।” राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।
Bilaspur High Court hears PIL in Surajpur school case of hanging a girl
सूरजपुर आदिवासी बहुल जिला है, जहां निजी स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में फैले हैं। हंस वाहिनी विद्या मंदिर नर्सरी से कक्षा 8 तक चलता है। जिले में शिक्षा विभाग की लापरवाही उजागर हुई, जांच अधिकारी ने गलती स्वीकार की। राज्य सरकार को निजी स्कूलों पर सख्त निगरानी बढ़ानी होगी।
भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 के तहत बच्चों पर क्रूरता दंडनीय है। संविधान के अनुच्छेद 21 में बच्चों का जीवन और गरिमा का अधिकार सुरक्षित। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 शारीरिक दंड निषेध करता है। हाईकोर्ट की टिप्पणी से मामला मजबूत होगा।
बच्चे पर शारीरिक चोट नहीं हुई, लेकिन मानसिक आघात गहरा हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी सजा से भय, अवसाद और स्कूल फोबिया होता है। अभिभावकों को काउंसलिंग करानी चाहिए। राज्य को प्रभावित बच्चों के लिए सहायता प्रदान करनी होगी।
राज्य स्तर पर सुधार की मांग
यह घटना छत्तीसगढ़ के शिक्षा तंत्र की पोल खोलती है। निजी स्कूलों में शिक्षक प्रशिक्षण, CCTV अनिवार्य और शिकायत तंत्र मजबूत हो। सरकार को POCSO एक्ट और बाल संरक्षण नीतियों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना चाहिए। हाईकोर्ट निर्देशों से व्यापक बदलाव संभव।
अभिभावक बच्चे की शिकायतों पर ध्यान दें, स्कूलों का चयन सावधानी से करें। नियमित संवाद रखें। सामुदायिक जागरूकता अभियान चलाएं। सूरजपुर जैसे क्षेत्रों में PTA मीटिंग्स बढ़ाएं।
शिक्षाविदों ने इसे “तालिबानी सजा” कहा। बाल मनोवैज्ञानिकों ने दीर्घकालिक हानि चेतावनी दी। राजनीतिक दलों ने बयानबाजी की, केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने नोटिस का संकेत दिया।
9 दिसंबर को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई होगी। तब तक विभाग जवाब दाखिल करेगा। कोर्ट सख्ती बरत सकता है। पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में।
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