Bank strike in Ambikapur is a huge success: सरगुजा:अंबिकापुर।यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर अखिल भारतीय बैंक हड़ताल अंबिकापुर में 100% सफल रही। 5 दिवसीय कार्य सप्ताह को तत्काल लागू न करने की प्रमुख मांग को लेकर बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने सरकारी नीतियों के खिलाफ खुलकर बगावत का ऐलान किया। सुबह से ही शहर के प्रमुख बैंकिंग केंद्रों पर जोरदार धरना-प्रदर्शन शुरू हो गए।
यह हड़ताल न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे देश में बैंकिंग सेवाओं को ठप करने में महत्वपूर्ण साबित हुई। अंबिकापुर के सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों में काम पूरी तरह बंद रहा, जिससे ग्राहकों को भारी परेशानी हुई। UFBU ने साफ चेतावनी दी है कि सरकार मांगें नहीं मानी तो आंदोलन और तेज होगा।
सुबह 10 बजे धमाका: सेंट्रल बैंक पर धरना
हड़ताल की शुरुआत सुबह 10 बजे सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय से हुई। सैकड़ों कर्मचारी और अधिकारी सड़क पर उतर आए। ‘5 दिन काम नहीं चलेगा’, ‘बैंकिंग घोटालों का हिसाब दो’, ‘कर्मचारी अधिकार छिन गए’ जैसे नारों से हवा गूंज उठी। UFBU के स्थानीय संयोजक रामेश्वर साहू ने कहा, “सरकार बैंकों को निजीकरण की भेंट चढ़ा रही है। 5 दिवसीय सप्ताह लागू होने से ग्राहक सेवा प्रभावित होगी।”
प्रदर्शनकारियों ने बैनर-पोस्टर के साथ सरकार के खिलाफ तीखे निशाने साधे। सेंट्रल बैंक के बाहर मंच बनाकर नेताओं ने भाषण दिए। इस दौरान ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति बन गई, लेकिन पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से नियंत्रण बनाए रखा।
कलेक्टोरेट SBI शाखा पर विशाल रैली
सेंट्रल बैंक के बाद दोपहर 12 बजे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की कलेक्टोरेट शाखा के समक्ष हड़ताल का दूसरा दौर शुरू हुआ। यहां सभी बैंकों के प्रतिनिधि एकत्रित हो गए। पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, कैनरा बैंक समेत 15 से अधिक बैंकों के कर्मचारी शामिल हुए। विशाल रैली निकालकर उन्होंने कलेक्टर कार्यालय तक मार्च किया।
रैली में महिलाएं, युवा अधिकारी और वरिष्ठ कर्मचारी बड़ी संख्या में थे। ‘मोदी सरकार बैंक लुटेरी’, ‘5 दिन का सपना मत दिखाओ’ जैसे स्लोगन गूंजे। स्थानीय नेताओं ने कहा कि अंबिकापुर की हड़ताल पूरे छत्तीसगढ़ के लिए मिसाल बनेगी। ग्राहक परेशान दिखे, लेकिन कर्मचारियों ने कहा कि यह लड़ाई सबकी भविष्य के लिए है।
UFBU की प्रमुख मांगें स्पष्ट हैं। पहला, 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह तत्काल लागू न हो। दूसरा, बैंकों के निजीकरण पर पूर्ण रोक। तीसरा, पेंशन बहाली और वेतन वृद्धि। चौथा, अनावश्यक सरकारी हस्तक्षेप बंद। अंबिकापुर में 5000 से अधिक बैंक कर्मचारी हैं, जिनमें से 80% हड़ताल में शामिल हुए।
स्थानीय नेताओं ने बताया कि 5 दिवसीय सप्ताह से शनिवार को ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवा प्रभावित होगी। छोटे व्यापारी, किसान और पेंशनभोगी सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। UFBU का दावा है कि देशभर में 10 लाख कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं।
हड़ताल का असर तुरंत दिखा। ATM में कैश की किल्लत हो गई। चेक क्लीयरेंस रुका। सरकारी योजनाओं के लाभार्थी भटकते रहे। व्यापारियों ने कहा कि लेन-देन रुकने से कारोबार चौपट हो गया। एक व्यापारी ने बताया, “RTGS-NEFT बंद होने से करोड़ों का लेन-देन अटका।” दूसरी ओर, सहकारी बैंकों ने सीमित सेवा दी।
अंबिकापुर चैंबर ऑफ कॉमर्स ने हड़ताल का समर्थन किया। अध्यक्ष प्रकाश जैन ने कहा, “कर्मचारियों की मांग जायज है। सरकार संवाद करे।” ग्रामीण क्षेत्रों में खासा असर पड़ा, जहां डिजिटल बैंकिंग कम है।
Bank strike in Ambikapur is a huge success
हड़ताल ने राजनीतिक रंग ले लिया। कांग्रेस ने कहा कि BJP सरकार बैंकिंग सुधारों के नाम पर कर्मचारियों को कुचल रही है। स्थानीय विधायक ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। दूसरी ओर, BJP नेताओं ने कर्मचारियों से संयम बरतने की अपील की। UFBU ने चेतावनी दी कि फरवरी में चक्का जाम होगा।
छत्तीसगढ़ में 200 से अधिक बैंक शाखाएं हैं। अंबिकापुर के प्रदर्शन को रायपुर, बिलासपुर समर्थन मिला। राज्य UFBU अध्यक्ष ने कहा, “यह शुरुआत है। पूर्ण बैंकिंग हड़ताल का ऐलान होगा।”
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