बलरामपुर-रामानुजगंज: मटर चोरी पर बच्चों को बंधक बनाकर अमानवीय यातना, पुलिस ने आरोपी को पकड़ा : Balrampur-Ramanujganj: Children held hostage and subjected to inhumane torture over pea theft

Uday Diwakar
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Balrampur-Ramanujganj: Children held hostage and subjected to inhumane torture over pea theft: बलरामपुर:​​ छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जो मानवता को शर्मसार करने वाली है। राजपुर थाना क्षेत्र के लडुवा गांव में खेत से मटर तोड़ने के मामूली आरोप में दो मासूम बच्चों के साथ पाशविक अत्याचार किया गया। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

दोपहर करीब 12 बजे ग्राम लडुवा निवासी कृष्णनाथ टोप्पो (40 वर्ष) के नाबालिग पुत्र संस्कार टोप्पो (7 वर्ष) और उनके साथी महिपाल के पुत्र ने आरोपी कपिल उरांव (26 वर्ष) या कपिल पैकरा के खेत में लगी हरी-भरी मटर की फसल को तोड़कर खा लिया। आरोपी ने बच्चों को देखते ही गुस्से में पकड़ लिया और उन्हें जबरन अपने घर ले गया। वहां रस्सी से उनके हाथ-पैर बांध दिए तथा बेरहमी से पीटा। इस दौरान किसी ने पूरा वीडियो बना लिया, जिसमें आरोपी बच्चों को ‘तालिबानी सजा’ देते दिखाई दे रहे हैं—बच्चे रोते-चिल्लाते हैं, लेकिन आरोपी नहीं रुकते।

पीड़ित बच्चों के चेहरे पर डर और चोट के निशान साफ दिख रहे हैं। वीडियो में आरोपी पिता कृष्णनाथ को भी धमकी देते नजर आते हैं कि अगर थाने में शिकायत की तो ‘देख लेंगे’। यह घटना न केवल बच्चों के साथ मारपीट तक सीमित रही, बल्कि अमानवीय बंधक बनाने और अपमानित करने का रूप ले लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी पड़ोसी और रिश्ते का भाई होने के बावजूद इतना क्रूर हो गया।

वायरल वीडियो

छह जनवरी को सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही इलाके में हड़कंप मच गया। फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर सैकड़ों यूजर्स ने इसे शेयर किया, इसे ‘तालिबानी सजा’ और ‘मानवता की हत्या’ करार दिया। ग्राम लडुवा में महिलाएं और बुजुर्ग सड़कों पर उतर आए, दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे। सामाजिक संगठनों ने इसे बाल अत्याचार का जघन्य उदाहरण बताते हुए जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की अपील की। वीडियो में बच्चों की चीखें सुनकर हर कोई स्तब्ध है—एक बच्चा बार-बार ‘चाचा छोड़ दो’ चिल्लाता दिख रहा है।​

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स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि सर्दी के मौसम में मटर की फसल पर नजर रखना आम है, लेकिन छोटे बच्चों के साथ ऐसी क्रूरता दुर्लभ है। गांववासी आरोपी के पिछले व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं, हालांकि कोई पुराना रिकॉर्ड नहीं मिला।

पीड़ित पिता कृष्णनाथ टोप्पो ने छह जनवरी को राजपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने वीडियो की जांच की, जिसमें आरोपी साफ दिख रहा था। तत्काल कपिल उरांव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। थाना प्रभारी ने कहा, “बच्चों से मारपीट अस्वीकार्य है। आईपीसी की धारा 323, 341, 506 और POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज है।” जिलाधिकारी ने पीड़ित बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराने और परिवार को सहायता देने के आदेश दिए।

Balrampur-Ramanujganj: Children held hostage and subjected to inhumane torture over pea theft

यह घटना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में फसलों की रखवाली के नाम पर हो रही गुंडागर्दी को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को कानूनी जागरूकता की जरूरत है—बच्चों को पकड़कर थाने ले जाना चाहिए, न कि खुद सजा देना। स्थानीय पंचायत ने बैठक बुलाई है, जहां बच्चों की सुरक्षा पर चर्चा होगी। यह मामला पूरे राज्य में बहस छेड़ चुका है—क्या ग्रामीण क्षेत्रों में तालिबानी मानसिकता फैल रही है?

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