Balrampur: Forest department takes action: बलरामपुर:। वन भूमि पर जेसीबी मशीन चलाकर खेत बनाने और हरे‑भरे सरई पेड़ों की काटछांट के मामले में वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। ग्राम पंचायत कंदरी के बैरडीह बीट अंतर्गत वन भूमि में हो रहे इस अवैध कार्य को देखकर आसपास के ग्रामीणों में भी नाराजगी देखी गई।
जानकारी के अनुसार बलरामपुर जिला अंतर्गत ग्राम पंचायत कंदरी के बैरडीह बिट, पी‑3170 वन मंडल क्षेत्र में बैरडीहकला निवासी सरजू पिता अमलू नगेसिया द्वारा जेसीबी मशीन से खेत बनाने का काम कराया जा रहा था। सरजू द्वारा वन क्षेत्र के अंदर स्थित हरे‑भरे सरई पेड़ों को पहले काटा गया, उसके बाद जेसीबी से जमीन की खुदाई कर समतलीकरण शुरू कराया गया। बताया जाता है कि यह पूरा क्षेत्र वन विभाग के अधीन आरक्षित भूमि में आता है, जहां किसी भी प्रकार की कटाई या खुदाई नियमों के विरुद्ध मानी जाती है।
इसी दौरान क्षेत्र में गश्त पर निकले वनरक्षक बनवीर की नजर जेसीबी मशीन और काटे गए पेड़ों पर पड़ी। उन्होंने तुरंत मशीन को रुकवाया और मौके की स्थिति की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी। वनरक्षक ने कुसमी एवं चांदो वन मंडल के अधिकारियों से संपर्क कर पूरा घटनाक्रम बताया और मौके पर तत्काल टीम भेजने का अनुरोध किया। बनवीर की समय पर दी गई सूचना के कारण बड़ी मात्रा में वन भूमि को नुकसान होने से बचा लिया गया।
सूचना मिलते ही कुसमी और चांदो वन मंडल के अधिकारी‑कर्मचारी दल‑बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। टीम ने सबसे पहले जेसीबी ऑपरेटर से पूछताछ की और जिस भूमि पर खुदाई चल रही थी, उसके संबंध में कागजात मांगें। पूछताछ के दौरान जेसीबी ऑपरेटर कोई भी राजस्व अथवा वन विभाग की अनुमति संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका और उसने मौके पर किसी भी प्रकार के कागजात उपलब्ध न होने की बात कही।
जेसीबी ऑपरेटर का बयान
वन अमले के सवालों पर ऑपरेटर ने बताया कि उसे बैरडीहकला निवासी सरजू पिता अमलू नगेसिया ने खेत बनाने के लिए बुलाया है। सरजू के कहने पर ही वह जेसीबी मशीन से पेड़ों की जड़ों सहित जमीन की खुदाई और समतलीकरण कर रहा था। ऑपरेटर ने खुद को केवल मजदूरी पर काम करने वाला बताते हुए कहा कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि भूमि वन विभाग के अधीन है या नहीं, उसे सिर्फ खेत बनाने का काम सौंपा गया था।
सरजू से पूछताछ और दस्तावेज की मांग
वन विभाग की टीम ने सरजू पिता अमलू नगेसिया को मौके पर तलब किया और उससे उक्त भूमि का स्वामित्व संबंधी कागजात पेश करने को कहा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सरजू वन भूमि को अपना बताते हुए वहां खेती करने की बात कर रहा था, लेकिन मौके पर वह भी कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया। अधिकारियों ने उसे स्पष्ट कर दिया कि बिना पट्टा, लीज या राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज हुए वन भूमि पर किसी प्रकार की खुदाई, पेड़ कटाई अथवा खेत निर्माण पूरी तरह गैरकानूनी है।
वन अधिकारियों ने काटे गए सरई पेड़ों की गिनती, खोदी गई जमीन की नापजोख और पूरे क्षेत्र की माप कर पंचनामा तैयार किया। नियमों के तहत संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर सरजू तथा अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जेसीबी मशीन को भी जब्त कर वन चौकी ले जाया जा सकता है, ताकि आगे जांच के दौरान उसे सबूत के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यदि जांच में वन भूमि पर अतिक्रमण और पेड़ कटाई की पुष्टि होती है तो आरोपी के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माना और कारावास दोनों की संभावना है।
Balrampur: Forest department takes action
ग्रामीणों का कहना है कि सरई सहित अन्य पेड़‑पौधे इस इलाके की हरियाली और वन्यजीवों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। लगातार पेड़ कटने और वन भूमि पर खेती‑निर्माण बढ़ने से क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग की सख्त निगरानी न होने के कारण ऐसे मामलों को बढ़ावा मिलता है, हालांकि इस मामले में समय पर कार्रवाई होने से गलत संदेश नहीं जाएगा।

वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि कोई भी व्यक्ति वन क्षेत्र की भूमि पर पेड़ काटने, मकान या खेत बनाने की कोशिश न करे। यदि किसी को अपनी भूमि के बारे में शंका हो तो पहले राजस्व एवं वन विभाग से सीमांकन और अभिलेख की जांच करा ले, उसके बाद ही कोई निर्माण या खेती कार्य शुरू करे। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि भविष्य में भी ऐसी गतिविधि पाई जाने पर बिना किसी दबाव के कठोर कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि वन संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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