Attempted theft at Lundra MLA Prabodh Minj’s official residence in broad daylight: सरगुजा:शहर के सबसे सुरक्षित और हाई-प्रोफाइल क्षेत्रों में शुमार गांधी चौक स्थित लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज के सरकारी आवास “लुंड्रा सदन” में शनिवार दोपहर जिस तरह से अज्ञात चोरों ने दिनदहाड़े चोरी का दुस्साहसिक प्रयास किया, उसने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे शहर को सकते में डाल दिया है। सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी निभा रहे जनप्रतिनिधि के आवास में चोरी की यह घटना कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 12:00 बजे “लुंड्रा सदन” के बाहर एक पिकअप वाहन आकर रुका। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दो अज्ञात युवक तेजी से परिसर के भीतर दाखिल हुए। उस वक्त आवास में सुरक्षा कर्मी नज़र नहीं आए। चोरों की गतिविधियों को पहले तो किसी ने गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन जब दोनों ने तेजी से घर के भीतर रखी चीजों को पिकअप वाहन में लदान शुरू किया, तो पड़ोसियों को शक हुआ।
कुछ ही देर में आस-पास के लोगों ने शोर मचाया, जिससे चोरों में हड़कंप मच गया। वो आनन-फानन में चोरी का सामान पिकअप में छोड़, मौके से भाग निकले। स्थानीय लोगों ने तत्काल घटना की सूचना पुलिस को दी। लुंड्रा थाना पुलिस महज 10 मिनट में घटनास्थल पर पहुंच गई और आवास के बाहर खड़े पिकअप वाहन को बरामद किया।
पुलिस के अनुसार, बरामद पिकअप वाहन के नंबर प्लेट से मालिक की पहचान के प्रयास किए गए हैं। वहीं, वाहन के भीतर अभी भी कुछ घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कागजात, कुछ ट्रॉली बैग मिले हैं जिन्हें चोर ले जाने की फिराक में थे। पुलिस को उम्मीद है कि फॉरेंसिक जांच के माध्यम से आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
पुलिस अधीक्षक मनीष शर्मा ने मीडिया को बताया, “अति सुरक्षित क्षेत्र में इस तरह की वारदात निंदनीय है। पिकअप वाहन और घटनास्थल से उंगलियों के निशान लिए गए हैं। वहीं, आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।”
इस घटना ने सार्वजनिक क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तमाम सवाल खड़े किए हैं। बताया जाता है कि लुंड्रा विधायक निवास में नियमित रूप से सुरक्षा कर्मचारी तैनात रहते हैं, पर घटना के समय कोई सुरक्षा कर्मी उपस्थित क्यों नहीं था, यह गंभीर जांच का विषय है। आवास में कुछ दिनों से नियमित आवाजाही नहीं थी, ऐसे में चोरों ने मौके का फायदा उठाया।
स्थानीय निवासियों की मानें तो चरित्र प्रमाणपत्र के नाम पर सुरक्षा कर्मियों की केवल कागजों में तैनाती होती है, जबकि जमीनी स्तर पर लापरवाही व्याप्त है। घटना के तत्काल बाद एसडीओपी और सिटी कोतवाली पुलिस ने आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए।
पुलिस ने क्षेत्र में लगे करीब 12 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज कब्जे में ली है। प्राथमिक जांच में दो संदिग्ध युवक सीसीटीवी में दिखे हैं, जिनके चेहरे काफी हद तक स्पष्ट हैं। पुलिस का मानना है कि आरोपित स्थानीय बदमाश हो सकते हैं या किसी बड़े गिरोह का हिस्सा। संदिग्धों के हुलिए के आधार पर आसपास के पुलिस थानों में अलर्ट जारी किया गया है।
एफएसएल टीम ने मौके से कुछ फिंगरप्रिंट और फाइबर सैंपल जुटाए हैं। इनकी रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों की पहचान में उल्लेखनीय प्रगति हो सकती है।
Attempted theft at Lundra MLA Prabodh Minj’s official residence in broad daylight
घटना की सूचना मिलते ही विधायक प्रबोध मिंज अपने आवास पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा, “यह किसी भी नागरिक के लिए चिंता का विषय है। अगर जनप्रतिनिधियों के आवास सुरक्षित नहीं हैं तो आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा। उम्मीद है कि पुलिस त्वरित कार्यवाही कर आरोपियों को जल्द पकड़ लेगी।”
उन्होंने साथ ही यह मांग की कि आवासीय इलाकों में नियमित पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।
लुंड्रा विधायक के सरकारी निवास में हुई चोरी के प्रयास की खबर फैलते ही क्षेत्रीय जनता और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष ने बयान जारी कर कड़ी निंदा की और दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। वहीं भाजपा से जुड़े स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इसे प्रशासन की विफलता बताते हुए गृह मंत्री से सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की।
शहर के नागरिक मंच, व्यापारी संघ, और युवा मोर्चा ने भी सामूहिक बैठक कर चोरी की घटना की निंदा की और प्रशासन को जल्द आरोपियों को पकड़ने के लिए अल्टीमेटम दिया।
शुरुआती जांच में सामने आया कि पिछले कुछ हफ्तों से आस-पास के इलाकों में अर्द्धसुरक्षित घरों में चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, त्योहार के मौसम में अक्सर इस तरह के गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। पुलिस ने ऐसे मामलों के पुराने आरोपियों की सूची भी खंगालनी शुरू कर दी है।
एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि आरोपियों को परिसर संबंधी पूरी जानकारी थी, जिससे उन्होंने दिन के उजाले में इतनी बड़ी वारदात का प्रयास किया।
पुलिस अधीक्षक व जिला कलेक्टर ने संयुक्त रूप से बैठक कर अन्य सरकारी निवासों में भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के निर्देश दिए हैं। वहीं, सभी सरकारी आवासों, दफ्तरों और प्रमुख परिसरों में अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण, सीसीटीवी और सुरक्षा गार्ड तैनात करने के आदेश देने की बात कही है।
आईजी रेंज स्तर से विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है, जिसमें अपराध शाखा के अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है। टीम को 48 घंटों के भीतर सभी पहलुओं पर रिपोर्ट देने एवं आरोपियों की गिरफ्तारी का जिम्मा दिया गया है।
घटना के बाद प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि घरों की सुरक्षा को मजबूत रखें, नए व्यक्ति पर पूरा भरोसा करने से बचें, संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तत्काल पुलिस को सूचना दें। साथ ही, सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने से भी मना किया गया है।
इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय शासन की सुरक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आम नागरिकों को भी सतर्क रहने की सीख दी है। पुलिस की शुरुआती तत्परता और पिकअप वाहन की त्वरित बरामदगी राहत की बात है, लेकिन जब तक असली आरोपी सलाखों के पीछे नहीं जाते, तब तक यह घटना लोगों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा करती रहेगी। उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रशासन और पुलिस मिलकर जल्द ही आरोपियों को पकड़कर सख्त कानूनी कार्रवाई करेंगे और शहर का भरोसा बहाल करेंगे।
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