सरगुजा में धर्मांतरण की कोशिश नाकाम, दरिमा पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार : Attempt to convert religion in Surguja fails Darima police arrest three accused

Uday Diwakar
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Attempt to convert religion in Surguja fails Darima police arrest three accused: सरगुजा:सरगुजा जिले के दरिमा थाना क्षेत्र के ग्रामीणों की सतर्कता और पुलिस की तत्परता से एक बड़ा धर्मांतरण प्रयास नाकाम हो गया। शनिवार, 16 अक्टूबर को ग्राम कुम्हरता गवरडाँड़ में करीब 50 ग्रामीणों को भ्रामक रूप से धर्म परिवर्तन के लिए एकत्र किया गया था। स्थानीय लोगों ने जब इस प्रयास की भनक लगाई, तो उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही दरिमा थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। यह घटना जिले भर में चर्चा का विषय बनी हुई है, जिससे कानून-व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता पर फिर से बहस शुरू हो गई है ।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी — जयप्रकाश साव (40 वर्ष, निवासी सीतापुर रायगढ़), अजित कुमार कुजूर (28 वर्ष, निवासी मंगारी), और झकल राम प्रजापति (38 वर्ष, निवासी कुम्हरता गवरडाँड़) — ने “चंगाई सभा” के नाम पर गांव के लोगों को बुलाया था। सभा में उन्होंने दावा किया कि यदि लोग उनका सुझाया धर्म अपनाते हैं, तो उनकी जीवन की समस्याएं और बीमारियां खत्म हो जाएंगी। ग्रामीणों को यह समझाया जा रहा था कि धर्म परिवर्तन से “हर संकट का समाधान संभव है” ।

मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि सभा के दौरान धार्मिक नारे लगाए जा रहे थे और ग्रामीणों को चमत्कारिक उपचार का भरोसा दिलाया जा रहा था। कई ग्रामीणों ने पहले ही सभा से असहमति जताई थी, लेकिन आयोजकों ने उन्हें “ईश्वर की शक्ति” से इलाज का वादा कर जोड़े रखा। इसी दौरान गांव के कुछ युवकों ने पूरी गतिविधि का वीडियो बनाया और सूचना थाने में दी।

पुलिस टीम में थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश खलखो, प्रधान आरक्षक सुजीत पाल, शत्रुधन सिंह, आरक्षक टिकेश्वर और श्यामलाल केरकेट्टा शामिल थे। टीम ने तुरन्त मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। आरोपी मौके पर कुछ धार्मिक पुस्तिकाओं और प्रचार सामग्री के साथ पकड़े गए। पुलिस ने सभी सामग्रियां जब्त कर छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 1968 की धारा 4 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 और 3(5) के अंतर्गत अपराध दर्ज किया ।

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पुलिस अधीक्षक मनीष शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने यह स्वीकार किया कि वे “धार्मिक शिक्षण” के बहाने यह सभा आयोजित कर रहे थे। हालांकि, उन्होंने इसे “धर्मांतरण” मानने से इनकार किया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि ग्रामीणों की शिकायत और घटनास्थल की सामग्री इस बात की पुष्टि करती है कि धर्म परिवर्तन का प्रयास योजना बद्ध रूप से किया जा रहा था।

“चंगाई सभा” यानी धार्मिक उपचार सभा, बीते कुछ वर्षों से सरगुजा और आसपास के इलाकों में विवाद का विषय रही है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन सभाओं के अवैध रूप से धर्म परिवर्तन करवाने के कई मामले सामने आए हैं। धार्मिक विद्वानों का कहना है कि ऐसी सभाओं का उद्देश्य “ईमानदारी से प्रार्थना” नहीं बल्कि “धार्मिक परिवर्तन के माइंडसेट” को बढ़ावा देना होता है।

स्थानीय जागरूक नागरिक संगठन “धर्म सुरक्षा मंच” के संरक्षक दिलबर यादव ने कहा, “गांवों में धीरे-धीरे इस तरह की सभाएँ फैल रही हैं जो भोले-भाले ग्रामीणों को भ्रमित कर रही हैं। हमें इस पर कड़ी नजर रखनी होगी।”

Attempt to convert religion in Surguja fails Darima police arrest three accused

गांव कुम्हरता गवरडाँड़ के निवासी अर्जुन सिंह ने बताया, “हमें शक तब हुआ जब आरोपियों ने कहा कि जो उनका धर्म अपनाएगा, उसकी बीमारी हमेशा के लिए ठीक हो जाएगी। उन्होंने कई बार कहा कि पुराने देवी-देवताओं की पूजा का कोई असर नहीं होता।”

एक अन्य ग्रामीण महिला, ममता कंवर ने कहा, “हम अपने देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। उन्होंने हमें भटकाने की कोशिश की, लेकिन हमने तुरंत पुलिस को बुलाया।” ग्रामीणों की जागरूकता से ही यह घटना नियंत्रित हो सकी।

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धार्मिक स्वतंत्रता कानून 1968 की धारा 4 के तहत, किसी व्यक्ति को बलपूर्वक, धोखे से या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करना अपराध है। इस अपराध के लिए तीन वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। दरिमा पुलिस का मानना है कि यह घटना इसी श्रेणी में आती है, क्योंकि आरोपियों ने ग्रामीणों को “झूठे चमत्कारों” के माध्यम से फुसलाने की कोशिश की।

कानूनी का कहना है कि लगातार बढ़ते धर्मांतरण मामलों को रोकने के लिए कानूनों को और सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार पहले ही ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के आदेश दे चुकी है।

जांच की निगरानी स्वयं पुलिस अधीक्षक और एसडीओपी अंबिकापुर के स्तर पर की जा रही है। पुलिस ने आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है और यह जांचने का प्रयास कर रही है कि इनके नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने कई गांवों में ऐसे आयोजनों की संभावना को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी है। आईजी रेंज सरगुजा ने सभी थानों को निर्देश दिया है कि इस तरह की सभा या धार्मिक कार्यक्रम की पहले से जानकारी ली जाए और बिना अनुमति किसी सामूहिक आयोजन की अनुमति न दी जाए ।

छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण का मसला वर्षों से सामाजिक तनाव का कारण रहा है। कई मामलों में, ग्रामीणों के बीच मतभेद और सामुदायिक तनाव पैदा हुए हैं। इस तरह के मामले न केवल सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करते हैं, बल्कि स्थानीय सांस्कृतिक आस्थाओं के क्षरण की चिंता भी गहराती है।

समाजशास्त्री डॉ. नंदकुमार एक्का बताते हैं, “आदिवासी समाज अत्यधिक भावनात्मक और प्रकृति पूजक होता है। जब धर्म परिवर्तन के बहाने किसी बाहरी मत या संगठन की विचारधारा थोपी जाती है, तो सामाजिक एकता कमजोर पड़ती है।”

राज्य सरकार ने हाल ही में “धर्म स्वतंत्रता कानून” में कुछ संशोधनों पर विचार भी किया है, जिससे ऐसे अपराधों की शीघ्र सुनवाई हो सके। राज्य गृह विभाग ने निर्देश दिया है कि सभी जिलों में ऐसी गतिविधियों की निगरानी के लिए विशेष टीमें बनाई जाएं।

इसके अलावा, जिला प्रशासन ग्रामीणों को उनकी धार्मिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाने की योजना बना रहा है।

धर्म परिवर्तन की यह असफल कोशिश सिर्फ एक स्थानीय घटना नहीं है, बल्कि यह समाज में बढ़ते वैचारिक संघर्ष और धार्मिक असंवेदनशीलता की गंभीर झलक भी देती है। ग्रामीणों की तत्परता और पुलिस की समय पर कार्रवाई ने संभावित सांप्रदायिक तनाव से बचा लिया। हालांकि, प्रशासन के सामने चुनौती अब यह है कि ऐसे मामलों को दोबारा होने से कैसे रोका जाए।

जिला पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में “चंगाई सभा” जैसे आयोजनों की जांच और निगरानी में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि जब समाज और प्रशासन एक साथ खड़े होते हैं तो किसी भी प्रकार की असंवैधानिक गतिविधि को नाकाम किया जा सकता है ।

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