अमेरा कोल खदान विवाद : कांग्रेस जांच दल पहुंचा, टीएस सिंहदेव ने सरकार पर जनता दबाने का आरोप लगाया : Amera coal mine dispute

Uday Diwakar
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Amera coal mine dispute: सरगुजा:​​​अंबिकापुर/अमेरा।छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंबिकापुर क्षेत्र में अमेरा कोल खदान के विस्तार को लेकर परसोढ़ीकला गांव में भारी तनाव पैदा हो गया है। बुधवार सुबह करीब आठ बजे साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की अमेरा कोयला खदान में तीन पोकलेन मशीनों पर खुदाई का काम शुरू हुआ। तभी परसोढ़ीकला के करीब 300 ग्रामीण लाठियां, गुलेल और पत्थरों से लैस होकर अचानक पहुंचे और मशीनों को घेर लिया।

ग्रामीणों ने खनन कार्य रोकने की चेतावनी दी और काम पूरी तरह बंद करवा दिया। स्थानीय पुलिस फोर्स ने तुरंत मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को शांत करने का प्रयास किया। लेकिन बातचीत विफल होते ही ग्रामीण भड़क उठे और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।

इस झड़प में 40 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए, जबकि ग्रामीणों के बीच भी कई लोग चोटिल हुए। परसोढ़ीकला की ग्रामीण महिला मीना वर्ती को लाठीचार्ज में सिर पर गंभीर चोट लगी। मीना वर्ती ने कहा कि हमारी जमीन पूर्वजों की कमाई है, मुआवजा लेकर क्या करेंगे, बच्चों के लिए क्या छोड़ेंगे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एसईसीएल बिना पूरी सहमति के खनन कर रही है। पुलिस अब सर्च ऑपरेशन चला रही है और हमलावरों को गिरफ्तार करने की कोशिश में जुटी हुई है। यह विवाद अमेरा कोयला खदान के 2016 के एक्सटेंशन से जुड़ा हुआ है।

उस समय केंद्र सरकार ने खदान का विस्तार किया जिसमें परसोढ़ीकला गांव की लगभग 100 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई। प्रक्रिया पूरी होने के बाद अधिकांश ग्रामीणों ने मुआवजा स्वीकार कर लिया। लेकिन कुछ ग्रामीणों ने कलेक्टर कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। कोर्ट ने सुनवाई के बाद अंतरिम आदेश जारी कर बाकी मुआवजा देने का निर्देश दिया। फिर भी एसईसीएल को माइनिंग की अनुमति मिल गई और अब विस्तार कार्य शुरू हो गया।

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ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजा 2016 की पुरानी दरों पर तय किया गया जो आज की महंगाई के हिसाब से अपर्याप्त है। जमीन के बदले नौकरी का वादा भी पूरा नहीं हुआ। गांव के मात्र 15 लोगों ने ही मुआवजा लिया बाकी सभी ने इनकार कर दिया। वे कोल बेयरिंग एक्ट के तहत बिना सहमति अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से ग्रामीण खदान के ऊपरी हिस्से में तंबू लगाकर धरना दे रहे थे। बुधवार को खुदाई शुरू होते ही वे उग्र हो उठे।

अपर कलेक्टर सुनील नायक ने कहा कि जमीन अधिग्रहण 2016 में ही पूरा हो चुका है। सभी कानूनी प्रक्रियाएं पालन की गईं। ज्यादातर प्रभावितों ने मुआवजा ले लिया है। उनका विरोध गैरकानूनी है। घटना की जानकारी मिलते ही पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने जिला कांग्रेस कमेटी को गांव भेजने के निर्देश दिए। शुक्रवार को उनका प्रतिनिधिमंडल परसोढ़ीकला पहुंचा और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। गांव की महिलाओं से लेकर वृद्धों तक में गहरा आक्रोश दिखाई दिया। टीएस सिंहदेव ने कहा कि सरकार जनता को कुचल रही है और ग्रामीणों के हक छीने जा रहे हैं।

उन्होंने पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा की। ग्रामीणों ने कांग्रेस दल को बताया कि पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया जिनमें 7 महिलाएं और एक नाबालिग शामिल है। निर्दोष लोगों को भी उठा लिया गया है। दल ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की। टीएस सिंहदेव ने विधानसभा में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने का ऐलान किया। एसईसीएल के अमेरा कोल खदान का विस्तार सरगुजा जिले के लखनपुर थाना क्षेत्र में हो रहा है। कंपनी का दावा है कि अधिग्रहण पूरी तरह कानूनी है। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि बिना पूर्ण भूमि अधिग्रहण के विस्तार किया जा रहा। पथराव में कई ग्रामीण भी घायल हुए।

स्थानीय प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैनात कर दी है। इस घटना ने क्षेत्रीय राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है। कांग्रेस ने सरकार पर ग्रामीणों को दबाने का आरोप लगाया है। टीएस सिंहदेव के निर्देश पर जांच दल ने स्थिति का पूरा जायजा लिया। ग्रामीणों ने मुआवजा दरें बढ़ाने, नौकरी देने और गिरफ्तारियों पर रोक लगाने की मांग की। प्रशासन शांति बहाल करने में जुटा हुआ है। अमेरा खदान 2001 से चालू है। इसके विस्तार से सैकड़ों नौकरियां पैदा होंगी लेकिन ग्रामीण अपनी जमीन बचाना चाहते हैं।

विवाद ने आसपास के गांवों को भी प्रभावित कर दिया है। लोग इसे सरकारी दमन की मिसाल मान रहे हैं। कोर्ट के आदेश के बावजूद तनाव बरकरार है। घटना के बाद पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया। ग्रामीण आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। कंपनी ने फिलहाल खनन कार्य रोक दिया। राजनीतिक दल इस मुद्दे को भुनाने में जुटे हुए हैं। कांग्रेस ने मुआवजा पुनर्समीक्षा की मांग की है। परसोढ़ीकला के ग्रामीणों का यह संघर्ष विकास बनाम अधिकार का सवाल बन गया है। एसईसीएल आर्थिक लाभ की बात कर रही है जबकि ग्रामीण पर्यावरण और आजीविका की चिंता में हैं। तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों के बीच वार्ता जरूरी है।

अन्यथा हिंसा और बढ़ेगी। जांच दल की रिपोर्ट आने के बाद आगे की रणनीति तय होगी। स्थानीय विधायक और नेता भी मौके पर पहुंचे। महिलाओं का सक्रिय विरोध उल्लेखनीय रहा। नाबालिग की गिरफ्तारी पर सवाल उठे हैं। प्रशासन ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। ग्रामीण धरना जारी रखेंगे।

यह विवाद छत्तीसगढ़ के कोयला क्षेत्रों में आम समस्या बन गया है। जमीन अधिग्रहण पर अक्सर ऐसे टकराव होते रहते हैं। केंद्र और राज्य सरकार को अपनी नीतियों में सुधार करना चाहिए। ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ानी होगी। मुआवजा बाजार दर पर निर्धारित हो और रोजगार वादे पूरे हों। टीएस सिंहदेव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार को आड़े हाथों लिया।

Amera coal mine dispute

उन्होंने कहा कि जनता के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस कार्यकर्ता गांव में डेरा डाले हुए हैं। भाजपा ने ग्रामीणों को भड़काने का आरोप लगाया। राजनीतिक रंग और गहरा हो गया। घायल पुलिसकर्मियों का इलाज जारी है। ग्रामीण मीना वर्ती की हालत गंभीर बनी हुई है। गांव में डर का माहौल है। बच्चे स्कूल नहीं जा रहे। आर्थिक नुकसान हो रहा है। खदान बंद होने से मजदूर बेरोजगार हो गए। प्रशासन को वार्ता की पहल करनी चाहिए। कोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन हो।

मुआवजा दरें बढ़ाई जाएं। नाबालिग को रिहा किया जाए। कांग्रेस विधानसभा सत्र में हंगामा करेगी। एसईसीएल ने बयान जारी कर सभी का सहयोग मांगा। शांति बहाली पहली प्राथमिकता है। यह घटना विकास परियोजनाओं में स्थानीय सहमति की जरूरत को रेखांकित करती है। ग्रामीणों की आवाज सुनी जानी चाहिए। अन्यथा ऐसे विवाद में फैल जाएंगे।

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सरगुजा जैसे आदिवासी क्षेत्र बेहद संवेदनशील हैं। नीतियां समावेशी बननी चाहिए। कांग्रेस जांच दल ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। टीएस सिंहदेव सोमवार को खुद गांव जाएंगे। ग्रामीण पूरी तरह एकजुट हैं। पुलिस सतर्कता बरत रही है। तनावपूर्ण शांति का माहौल बना हुआ है। मीडिया कवरेज तेज हो गया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं।

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राजनीतिक दलों की रैलियां होने की संभावना है। अमेरा कोल खदान विवाद अब ग्रामीण असंतोष का प्रतीक बन चुका है। न्याय और विकास के बीच संतुलन जरूरी है। सरकार को संवाद से समाधान निकालना होगा। अन्यथा सामाजिक अस्थिरता बढ़ती जाएगी। ग्रामीणों का संघर्ष लंबा खिंच सकता है। प्रशासन सजग रहे। राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। शांति ही एकमात्र रास्ता है। ​​

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