अंबिकापुर: राजस्व निरीक्षक को जमीन कार्य के रिश्वतखोरी पर 4 साल की सजा, भ्रष्टाचार पर कोर्ट का कड़ा प्रहार : Ambikapur: Revenue inspector sentenced to 4 years in jail for taking bribes in land-related work

Uday Diwakar
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Ambikapur: Revenue inspector sentenced to 4 years in jail for taking bribes in land-related work: सरगुजा:​​​अंबिकापुर।छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा फैसला सुनाया गया है। विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) अंबिकापुर ने राजस्व निरीक्षक राजबहादुर सिंह को जमीन संबंधी कार्य के बदले रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने आरोपी पर 5,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

यह सजा सुनाई गई, जो राज्य में चल रही भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आरोपी राजबहादुर सिंह फुन्दुलडिहारी पटवारी कार्यालय सह निवास में पदस्थ थे। कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला दिया, जो आम नागरिकों में न्याय व्यवस्था पर विश्वास जगाने वाला है।

मामला वर्ष 2018 से जुड़ा है। कृष्णानगर अंबिकापुर निवासी अर्चना खाखा के पति राकेश खाखा ने खसरा नंबर 542/12, रकबा 0.04 हेक्टेयर भूमि ठाकुरपुर निवासी जानू पिता बंधु अगरिया से खरीदी थी। रजिस्ट्री के बाद भूमि का नक्शा काटने और रिकॉर्ड दुरुस्त करने के लिए राजस्व निरीक्षक राजबहादुर सिंह ने 10,000 रुपये रिश्वत की मांग की।

अर्चना खाखा ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया। उन्होंने 17 जुलाई 2020 को उप पुलिस अधीक्षक, एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) अंबिकापुर में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत सत्यापन के दौरान आरोपी ने कहा कि 10,000 रुपये से कम नहीं लूंगा। जमीन नापने के बाद भी मांग दोहराई गई। इस पर पीड़िता ने पहले 2,000 रुपये दिए और बाकी 8,000 रुपये बाद में देने का वादा किया।

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7 अगस्त 2020 को ACB ने ट्रैप कार्रवाई की। पटवारी कार्यालय सह निवास फुन्दुलडिहारी अंबिकापुर में आरोपी को 8,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। विवेचना पूरी होने पर 22 जून 2021 को विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र दाखिल किया गया।

कोर्ट की कार्यवाही और फैसला

विशेष न्यायालय ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और 13(2) के तहत कार्रवाई की। सुनवाई में पीड़िता अर्चना खाखा, ACB अधिकारी और स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज हुए। कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने अपनी स्थिति का दुरुपयोग कर रिश्वत ली।

न्यायाधीश ने फैसले में कहा कि राजस्व विभाग में ऐसी रिश्वतखोरी आम जनता को परेशान करती है। सजा से भ्रष्टाचारियों को कड़ा संदेश मिलेगा। आरोपी को तुरंत जेल भेज दिया गया। अर्थदंड न देने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।

यह फैसला पुराने केस K.K. Yadav बनाम छत्तीसगढ़ राज्य (2004) की याद दिलाता है, जहां सरगुजा अंबिकापुर कोर्ट ने समान मामले में 3 वर्ष की सजा दी थी।

छत्तीसगढ़ में राजस्व विभाग भ्रष्टाचार का केंद्र रहा है। हाल ही में गौरेला-पेंड्रा-मरवारी में राजस्व निरीक्षक संतोष कुमार को 50,000 रुपये रिश्वत पर निलंबित किया गया। ACB ने कई ट्रैप कार्रवाइयां कीं।

अंबिकापुर क्षेत्र में पटवारी-तहसीलदार स्तर पर जमीन नक्शा, नामांतरण में रिश्वत आम है। उपयोगकर्ता के पिछले मामलों से पता चलता है कि लखनपुर तहसील में 50,000 रुपये रिश्वत का केस और राजस्व निरीक्षक भर्ती घोटाला इसी श्रृंखला का हिस्सा हैं।

सरकार ने ACB को मजबूत किया। 2025 में 20 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शून्य सहनशीलता का ऐलान किया। ई-रिकॉर्ड और डिजिटल नक्शा से सुधार की कोशिशें चल रही हैं।

स्थानीय लोगों ने फैसले का स्वागत किया। अर्चना खाखा ने कहा, “न्याय मिला, अब गरीबों को राहत मिलेगी।” ग्रामीणों का मानना है कि इससे राजस्व कार्य तेज होंगे। राजनीतिक दलों ने कोर्ट की सराहना की।

यह सजा जशपुर पूर्व तहसीलदार कमलेश मिरी (3 वर्ष सजा) और वाड्रफनगर पटवारी मोहन सिंह गिरफ्तारी जैसे मामलों से जुड़ती है। क्षेत्रीय पत्रकारिता में भ्रष्टाचार कवरेज बढ़ा है।

Ambikapur: Revenue inspector sentenced to 4 years in jail for taking bribes in land-related work

राजस्व विभाग में डिजिटलीकरण जरूरी। CCTV, व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन और सख्त मॉनिटरिंग चाहिए। ACB को और संसाधन दें। जन जागरण से शिकायतें बढ़ेंगी।​

छत्तीसगढ़ सरकार 2026 में भ्रष्टाचार मुक्त अभियान चला रही। यह फैसला मील का पत्थर है। आम नागरिकों को न्याय का भरोसा मिला। सरगुजा जैसे आदिवासी क्षेत्रों में विकास तेज होगा।

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