Ambikapur initiative became the identity of Chhattisgarh ‘Garbage Cafe’ mentioned in ‘Mann Ki Baat’: सरगुजा:छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में ‘गार्बेज कैफे’ की पहल को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उल्लेख मिलना न केवल पूरे राज्य बल्कि देश के लिए गौरव का क्षण बन गया है। इस खबर में विस्तारपूर्वक जानिए, कैसे अंबिकापुर की यह सोच देशभर में मिसाल बन चुकी है, कैसे यह मॉडल पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदना की मिसाल बना, और प्रधानमंत्री मोदी ने किस प्रकार इसकी राष्ट्रीय पहचान को ऊँचाई दी।
अंबिकापुर के ‘गार्बेज कैफे’ को ‘मन की बात’ में मिली राष्ट्रीय पहचान
2019 में अंबिकापुर नगर निगम ने एक अनोखी और प्रभावशाली पहल शुरू की – ‘गार्बेज कैफे’। इस मॉडल का उद्देश्य दोहरा था: प्लास्टिक प्रदूषण पर लगाम लगाना और गरीब तथा जरूरतमंदों को मान-सम्मान के साथ भोजन उपलब्ध कराना। पीएम नरेन्द्र मोदी ने 127वें ‘मन की बात’ संस्करण में इस पहल की सराहना की।
गजब की बात यह है कि इस कैफे में पैसे नहीं, बल्कि प्लास्टिक कचरा देकर भोजन मिलता है। एक किलो प्लास्टिक लाने पर टोकन के माध्यम से चावल, दाल, दो सब्जियां, रोटी, सलाद और अचार से सजी थाली भरपेट दी जाती है। आधा किलो प्लास्टिक देने वाले को नाश्ते में समोसा, बड़ा पाव, या अन्य स्नैक्स मिलते हैं।
यह अनोखा मॉडल न केवल शहर से प्लास्टिक वेस्ट की मात्रा कम कर रहा है, बल्कि गरीब और जरूरतमंद लोग सुबह-सुबह प्लास्टिक इकट्ठा कर यहां खाने का आनंद उठाते हैं। पहले जहां कबाड़ी को कचरा दस रुपए किलो में बेचना पड़ता था, आज वही सम्मानजनक भोजन पा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा, “अंबिकापुर के ‘गार्बेज कैफे’ ने प्लास्टिक मुक्त संकल्प से शहर की तस्वीर बदल दी है”। उन्होंने इसे सामाजिक संवेदना और स्वच्छता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर के शांति नगर में कार्यक्रम का श्रवण करते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। उन्होंने प्रदेशवासियों को बधाई दी और कहा कि नवाचार को राष्ट्रीय पहचान दिलाना राज्य के लिए सम्मान है।
नगर निगम अंबिकापुर के आयुक्त डीएन कश्यप ने बताया कि शहर में चल रहे ‘एसएलआरएम सेंटर’ में प्लास्टिक रिसाइक्लिंग की पूरी व्यवस्था है। यहां जमा हुआ प्लास्टिक सही प्रक्रिया से रिसाइक्लिंग कर दाना बनाकर बिक्री किया जाता है, जिससे नगर निगम को आय तो मिलती ही है, स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलता है।
इस पहल ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अंबिकापुर को देश का पहला ‘जीरो डंपसाइट शहर’ बना दिया है। सुपर स्वच्छ लीग में देशभर में 50,000 से 3 लाख की आबादी वाले शहरों में अंबिकापुर सबसे आगे है।
2019 के सितंबर में शुरू हुआ ‘गार्बेज कैफे’ नगर निगम के तत्कालीन मेयर डॉ. अजय तिर्की की सोच थी, जिन्होंने बस स्टैंड पर बैठकर प्लास्टिक कचरे को उपयोगी बनाने और जरूरतमंदों का पेट भरने के लिए इस नवाचार की शुरुआत की। अंबिकापुर का विचार बाद में दिल्ली और गुजरात तक पहुँचा, जहां इसी तर्ज पर कैफे खुले।
कैफे संचालक विनोद पटेल ने कहा, “प्रधानमंत्री जी ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर मंच दिया, इससे प्रोत्साहन मिलेगा और ज्यादा लोग प्लास्टिक लाकर स्वच्छता की मुहिम से जुड़ेंगे”। शहर की महिलाएं, जो सफाई के काम में जुटी हैं, बताती हैं कि आज अंबिकापुर कहीं ज्यादा साफ है और हजारों लोगों को रोजगार मिला है।
ज्ञानलता कुजूर, स्थानीय निवासी, कहती हैं, “गार्बेज कैफे शुरू होने के बाद गरीबों व जरूरतमंदों को सम्मानजनक भोजन मिल रहा है और शहर स्वच्छ बना है।”
Ambikapur initiative became the identity of Chhattisgarh ‘Garbage Cafe’ mentioned in ‘Mann Ki Baat’
रोजाना स्थानीय महिलाएं चार वार्डों से कचरा इकट्ठा कर सेंटर लाती हैं, जहां उसकी छंटाई व बिक्री से कई लोगों को आजीविका मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक, हर महीने प्लास्टिक बेचे जाने से लाखों रुपये की आय होती है।
अंबिकापुर का मॉडल अब देश के अलग-अलग हिस्सों में भी अपनाया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सामाजिक सम्मान की भावना मजबूत हो रही है। इस पहल को केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय वायु कार्यक्रम के तहत ‘मॉडल’ के रूप में सराहा गया है।
‘गार्बेज कैफे’ की सफलतम मिसाल छत्तीसगढ़ को नई पहचान दे रही है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इसे सराहना मिलने से राज्य के लोगों में उत्साह और गर्व का भाव है। अब छत्तीसगढ़ देश के सामाजिक नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के पथ पर अग्रणी बनकर उभर रहा है।
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