Ambikapur: DEO Issues ‘Show-Cause’ Notices to Two Private Schools: सरगुजा:अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले में शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली और अभिभावकों के आर्थिक शोषण के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) डॉ. दिनेश झा ने सीबीएसई से संबद्ध दो प्रमुख निजी स्कूलों—बिरला ओपन माइंड इंटरनेशनल स्कूल और मॉन्टफोर्ड स्कूल—को नियमों के उल्लंघन के लिए ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया है। इन स्कूलों पर कक्षा 1 से 8वीं तक की किताबें, कॉपियां और यूनिफॉर्म केवल संचालकों द्वारा तय दुकानों से खरीदने के दबाव बनाने का आरोप है, जिससे अभिभावकों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
शिक्षा विभाग को हाल ही में दर्जनों अभिभावकों की शिकायतें मिलीं, जिनमें स्कूलों द्वारा एनसीईआरटी से इतर महंगी किताबें थोपने, अनावश्यक स्टेशनरी बेचने और फीस में बिना नोटिस के बढ़ोतरी करने का उल्लेख है। एक अभिभावक ने बताया, “स्कूल ने 80 प्रतिशत सामग्री अपनी दुकान से खरीदने को कहा, जिसकी कीमत बाजार से दोगुनी थी।” DEO ने इन शिकायतों पर गंभीरता दिखाते हुए स्कूल प्राचार्यों को 72 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है। यदि आरोप साबित हुए, तो अशासकीय विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम 2020 के तहत वसूली गई अतिरिक्त राशि का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है।
यह कार्रवाई हाल के घटनाक्रमों का परिणाम है। 6 अप्रैल 2026 को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने DEO कार्यालय का घेराव कर निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को चुनिंदा दुकानों पर मजबूर कर रहे हैं, जहां कमीशन के नाम पर लूट मच रही है। DEO डॉ. झा ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर आश्वासन दिया कि शिकायतों की जांच होगी और दोषी स्कूलों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इससे पहले 4 अप्रैल को स्थानीय मीडिया ने भी स्कूलों की इस ‘पेरेंट लूट’ की पोल खोली थी।
इस मुद्दे पर अभाविप जिला मंत्री ने कहा, “निजी स्कूल शिक्षा के नाम पर व्यापार कर रहे हैं। सरकार को तत्काल फीस नियंत्रण लागू करना चाहिए।” प्रदर्शन के दौरान ठोस प्रमाण—like रसीदें और किताबों कीमतों की तुलना—प्रस्तुत किए गए, जो विभाग की जांच का आधार बने। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि स्कूल केवल एनसीईआरटी किताबें ही पढ़ा सकते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका उल्लंघन हो रहा है।
Ambikapur: DEO Issues ‘Show-Cause’ Notices to Two Private Schools
यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 2025 के ऐतिहासिक फैसले पर आधारित है, जिसमें अशासकीय विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम 2020 को पूरी तरह संवैधानिक घोषित किया गया। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार निजी स्कूलों की फीस नियंत्रित कर सकती है, ताकि मनमानी वसूली रुके। अधिनियम के अनुसार, पहली बार उल्लंघन पर 1 से 5 लाख और दोबारा पर 2 से 10 लाख तक जुर्माना लग सकता है। अंबिकापुर मामले में 50% जुर्माने का प्रस्ताव इसी कानून की कड़ी धारा का हिस्सा है। कोर्ट ने जोर दिया कि शिक्षा में पारदर्शिता जरूरी है, न कि मुनाफाखोरी।
DEO कार्यालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, नोटिस में स्कूलों को प्रमाण-पत्र जमा करने को कहा गया है कि वे केवल मानक किताबें पढ़ा रहे हैं। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक न मिला, तो स्कूलों का पंजीकरण रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है। जिले के अन्य निजी स्कूल भी अब सतर्क हो गए हैं।
अभिभावक संगठनों ने DEO की इस पहल का स्वागत किया है। एक माता ने कहा, “लंबे समय बाद राहत मिली। फीस का बोझ कम होगा तो बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दे सकेंगे।” सरगुजा जिले में 50 से अधिक निजी स्कूल हैं, जहां 20 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई अन्य जिलों के लिए उदाहरण बनेगी। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को फीस संरचना सार्वजनिक करने और अभिभावक समितियां गठित करने के निर्देश भी दिए हैं।
विस्तार न्यूज की एक रिपोर्ट का असर भी दिखा, जिसके बाद विभाग सक्रिय हुआ। अब अभिभावक उम्मीद कर रहे हैं कि स्कूलों पर लगाम लगेगी और शिक्षा सुलभ बनेगी। DEO ने चेतावनी दी कि आगे कोई ढील नहीं बरती जाएगी। यह घटना निजी शिक्षा क्षेत्र में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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