अंबिकापुर: रात में बिछा डामर सुबह उखड़ा, NH-43 मरम्मत पर सवाल : Ambikapur: Asphalt laid at night peeled off by morning, raising questions about NH-43 repair work

Uday Diwakar
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Ambikapur: Asphalt laid at night peeled off by morning, raising questions about NH-43 repair work: सरगुजा:​​​अंबिकापुर।21 दिसंबर 2025: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के प्रमुख शहर अंबिकापुर में राष्ट्रीय राजमार्ग-43 (NH-43) की मरम्मत कार्य ने एक बार फिर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच चौकाने वाले अंतर को उजागर कर दिया है। शहर के सदर रोड इलाके से गुजरने वाली इस सड़क पर रातोंरात बिछाए गए करोड़ों रुपये के डामर की परत सुबह होते ही उखड़ गई, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। स्थानीय लोगों और सफाईकर्मियों द्वारा सड़क के टुकड़ों को बेलचे से उखाड़कर कचरा गाड़ी में भरते हुए का दृश्य देखकर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

यह घटना लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे पेच रिपेयरिंग प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जहां नई बनी सड़क कुछ ही घंटों में जर्जर हो गई। वायरल वीडियो में दिखा कि सफाईकर्मी नवनिर्मित डामर को कचरे की तरह ट्रैक्टर में लाद रहे थे, जिससे ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप लगे।​

अंबिकापुर शहर NH-43 की जीवनरेखा है, जो सरगुजा जिले को राज्य की राजधानी रायपुर और अन्य जिलों से जोड़ती है। सदर रोड पर जर्जर सड़क की मरम्मत का काम रात में तेजी से किया गया, लेकिन सुबह होते ही डामर की ऊपरी परत उखड़ने लगी। स्थानीय निवासी सुनील साहू ने बताया, “रात में नई सड़क चमक रही थी, लेकिन सुबह गिट्टियां और डामर बिखरे पड़े थे। यह साफ भ्रष्टाचार का मामला है।”​

नगर निगम के सफाईकर्मी बेलचा लेकर पहुंचे और उखड़े हिस्सों को साफ करने लगे। वीडियो में ट्रैक्टर पर लदे सड़क के टुकड़े कचरे की तरह नजर आ रहे थे। सोशल मीडिया पर ये क्लिप्स तेजी से शेयर हो रही हैं, जहां यूजर्स ने #NH43Corruption और #AmbikapurRoadScam जैसे हैशटैग ट्रेंड कराए। एक फेसबुक पोस्ट में लिखा गया, “आधा-अधूरा काम करके मेजरमेंट ले लिया गया।”​​

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यह पहली बार नहीं है जब NH-43 पर ऐसी शिकायतें सामने आई हैं। पिछले महीनों में सिलफिली रोड पर भी “थूक पॉलिश” जैसा घटिया डामर बिछाने के आरोप लगे, जो दस दिन भी नहीं टिका। जशपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने घटिया निर्माण पर प्रदर्शन किया था।

NH-43 सरगुजा क्षेत्र की आर्थिक धमनी है, लेकिन इसका रखरखाव हमेशा विवादों में रहा। एक साल पहले अधूरे निर्माण से राहगीर परेशान थे। नवंबर 2025 में विश्रामपुर-सतपता रोड पर खतरनाक डिवाइडर से हादसा हुआ, जिसमें 9 लोग घायल हुए। देवीगंज रोड पर भी सड़क बनते ही उखड़ गई।​​

स्थानीय पत्रकार विनीत मिश्रा ने फेसबुक पर पोस्ट किया, “NH विभाग की पोल खुल गई। सफाईकर्मी सड़क उखाड़ रहे हैं।” ABP न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यह 6 करोड़ का प्रोजेक्ट है, लेकिन गुणवत्ता शून्य। ठेकेदार पर जल्दबाजी में आधा-अधूरा काम पूरा करने का आरोप है, ताकि भुगतान हो सके।

अंबिकापुर के निवासियों में रोष व्याप्त है। व्यापारी संघ के अध्यक्ष ने कहा, “यह सड़क शहर की शान है, लेकिन भ्रष्टाचार ने बदनाम कर दिया। उच्च स्तरीय जांच हो।” महिलाएं बोलीं, “बच्चों को स्कूल ले जाते समय गड्ढों से परेशानी होती है।”

सोशल मीडिया पर हजारों शेयर हुए। एक यूजर ने लिखा, “रात में बनी सड़क कचरा गाड़ी में!” विपक्षी नेता इसे सरकार की नाकामी बता रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतरने की चेतावनी दे रहे हैं।

एनएच विभाग के अधिकारियों ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। कलेक्टर कार्यालय से जांच के आदेश की बात कही जा रही है। स्थानीय विधायक ने ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की घोषणा की।

लोगों की मांगें:

  • ठेकेदार पर FIR दर्ज हो।
  • पूरे प्रोजेक्ट की CBI जांच।
  • वैकल्पिक सड़क निर्माण तक ट्रैफिक डायवर्जन।
  • गुणवत्ता जांच के लिए तीसरे पक्ष की रिपोर्ट।

Ambikapur: Asphalt laid at night peeled off by morning, raising questions about NH-43 repair work

यह घटना छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में सड़क निर्माण की स्थिति को दर्शाती है। आगरा में भी 20 दिन में सड़क उखड़ी। सरगुजा जैसे आदिवासी क्षेत्र में खराब सड़कें स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापार को प्रभावित करती हैं।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और PMGSY के तहत करोड़ों खर्च होते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर लापरवाही बरती जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डामर की गुणवत्ता जांचने के लिए सही तापमान और सामग्री जरूरी, जो यहां नजर नहीं आई।

अंबिकापुर नगर निगम ने सफाई अभियान चलाया, लेकिन मूल समस्या बरकरार। अगर शीघ्र कार्रवाई न हुई तो बड़े आंदोलन की चेतावनी है। यह मामला राज्य सरकार के लिए चुनौती बन गया है, जहां डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर दावे छत्तीसगढ़ में हकीकत से कोसों दूर हैं।

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