अंबिकापुर में न्यायालय भवन के स्थानांतरण के फैसले के विरोध में अधिवक्ता संघ की जनजागरूकता रैली आयोजित : Advocates Association organised a public awareness rally in Ambikapur

Uday Diwakar
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  • अधिवक्ताओं का कहना था कि वर्तमान स्थान सर्वसुविधायुक्त, यातायात के सुगम मार्ग और शहर के बीचोंबीच है, जिससे वादकारियों को न्यूनतम समय व खर्च लगता है।
  • नया स्थान शहर से बाहरी इलाके में है, जहाँ पहुंचना महंगा व असुविधाजनक होगा, जिससे न्याय पाने की प्रक्रिया प्रभावित होगी।

Advocates Association organised a public awareness rally in Ambikapur: सरगुजा:​​​अंबिकापुर में न्यायालय भवन के स्थानांतरण के फैसले का जिला अधिवक्ता संघ द्वारा मुखर विरोध किया जा रहा है। इसी क्रम में अधिवक्ताओं ने जनजागरूकता रैली का आयोजन कर प्रशासनिक फैसले के खिलाफ अपनी एकजुट आवाज बुलंद की। इस विरोध कार्यक्रम ने न केवल न्यायिक समुदाय बल्कि आम नागरिकों में भी न्यायपालिका और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।​​

जनजागरूकता रैली 6 नवम्बर की सुबह जिला न्यायालय परिसर से प्रारंभ हुई। रैली महामाया चौक, सदर रोड, अग्रसेन चौक, पुराना बस स्टैंड, ब्रह्म रोड और संगम चौक होते हुए गांधी स्टेडियम में जाकर संपन्न हुई। रैली में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं, वरिष्ठ एवं युवा वकीलों के साथ आम नागरिकों ने भी भाग लिया, जिससे प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बना।​

अधिवक्ता संघ की संघर्ष समिति के संयोजक संतोष सिंह के नेतृत्व में रैली आगे बढ़ी। समिति ने प्रशासनिक रवैये एवं प्रस्तावित न्यायालय स्थानांतरण के फैसले को अव्यावहारिक और जनविरोधी करार दिया। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि न्यायालय भवन का स्थानांतरण वर्तमान परिसर से बाहर किया गया तो आम नागरिकों, वादकारियों और वरिष्ठ नागरिकों सहित सभी को भारी असुविधा होगी। उनका मानना है कि वर्तमान परिसर में ही नवीन भवन निर्माण हो और न्यायिक प्रक्रिया की सुगमता बनी रहे।​

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नगर विकास जरूरतों की पूर्ति, यातायात दबाव कम करने एवं भविष्य की विस्तार योजनाओं को ध्यान में रखते हुए न्यायालय भवन स्थानांतरण का निर्णय लिया गया है। हालांकि विरोध के बाद प्रशासन ने कहा है कि अधिवक्ताओं के सभी सुझावों और आपत्तियों को पुनर्विचार हेतु उच्चस्तर पर भेजा जाएगा और उनसे संवाद जल्द शुरू किया जाएगा।​

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पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी न्यायालय परिसर में ही नए भवन निर्माण की जरूरत पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। राजनीतिक दलों ने पूरे मामले में पारदर्शिता और जनहित का हवाला देते हुए न्यायिक एवं प्रशासनिक स्तर पर सुविचारित निर्णय लेने की सलाह दी है।​

रैली के दौरान बड़ी तादाद में आम नागरिक, व्यापारी, वरिष्ठजन और छात्र भी एकजुट हुए। सभी ने न्यायालय भवन स्थानांतरण के विरोध में आवाज़ बुलंद की और जिला प्रशासन से मांग की कि फैसले पर पुनर्विचार किया जाए। बहुत से लोगों का मानना है कि अधिवक्ताओं की मांगें तार्किक और जनहित में हैं, और न्यायालय भवन की जगह बदलने से आम नागरिकों को न्याय तक पहुंच में दिक्कतें होंगी।​

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Advocates Association organised a public awareness rally in Ambikapur

रैली शांतिपूर्ण रही, प्रशासन की ओर से सुरक्षा और यातायात प्रबंध चुस्त रहे। अधिवक्ताओं ने अनुशासन में रहते हुए लोकतांत्रिक पद्धति से विरोध जताया। रैली के बाद जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें न्यायालय भवन का स्थानांतरण रोकने और इसी परिसर में नवीन भवन निर्माण की मांग प्रमुख थी।​

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जिला अधिवक्ता संघ ने स्पष्ट किया कि अगर प्रशासन ने ज़िद्दी रुख़ न छोड़ा तो आगे और बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसमें वकीलों के साथ आमजन भी शामिल होंगे। संघ ने जल्द फैसले पर पुनर्विचार की चेतावनी देते हुए न्यायपालिका की गरिमा और वादकारियों की सुविधा का हवाला दिया।

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अंबिकापुर में न्यायालय भवन स्थानांतरण को लेकर उठा यह विवाद स्थानीय लोकतांत्रिक चेतना और जनभागीदारी का प्रस्फुटन है। अधिवक्ता संघ का विरोध न सिर्फ न्यायिक पारदर्शिता बल्कि नागरिक सुविधाओं और आमजन के हितों से भी जुड़ा हुआ है। प्रशासन के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह सभी पक्षों के तर्कों और भावनाओं का सम्मान करते हुए सर्वसम्मति से न्यायोचित फैसला लें, जिससे न तो न्याययात्रा बाधित हो और न ही जनता की सुविधाओं पर आँच आए।

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