ACB cracks down on bribery at police station ASI and PLV arrested for accepting a bribe of Rs 12,000: कोरिया: छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक कदम उठाते हुए पटना थाना में पदस्थ एएसआई पोलीकार्प टोप्पो और न्यायालय द्वारा नियुक्त विधिक स्वयंसेवक (PLV) राजू को 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। सरगुजा एसीबी की इस कार्रवाई से कोरिया जिला पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
इस कार्रवाई की नींव एक नागरिक द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से रखी गई। पांडोपारा निवासी मोहम्मद शाह खान ने एसीबी सरगुजा में शिकायत दर्ज कराई कि पटना थाना में तैनात एएसआई टोप्पो ने एक पुराने एक्सीडेंट केस को सुलझाने और मुआवजा दिलवाने के एवज में रिश्वत मांगी। मामला अप्रैल 2024 का था जब शाह खान की बेटी रजिया खान खोड़ गांव निवासी अश्विनी कुमार की मोटरसाइकिल से टकराकर घायल हो गई थी। अश्विनी ने इलाज के लिए 25 हजार रुपये दिए थे, लेकिन आगे के इलाज का खर्च उठाने से इंकार कर दिया।
स्थिति बिगड़ने पर शाह खान ने आरोपी युवक के खिलाफ सितंबर 2025 में पटना थाना में शिकायत दर्ज कराई। इसी दौरान एएसआई पोलीकार्प टोप्पो ने उसे आश्वासन दिया कि वह मामला सुलझा देगा और कोर्ट से मुआवजा भी दिलवा देगा, लेकिन इसके बदले उसने पहले 10 हजार रुपये और बाद में रिश्वत बढ़ाकर 15 हजार रुपये की मांग की.।
शाह खान ने रिश्वत देने से इनकार करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो में लिखित शिकायत दर्ज कराई। एसीबी सरगुजा यूनिट ने शिकायत की पुष्टि के लिए प्राथमिक जांच की और पाया कि एएसआई और पीएलवी राजू नियमित रूप से शिकायतकर्ता से पैसों की मांग कर रहे थे। इसके बाद एसीबी ने ट्रैप की योजना बनाई। अभियुक्तों द्वारा रिश्वत लेने की बात तय होने पर पूरी जालसाजी की रणनीति तैयार की गई।

ACB cracks down on bribery at police station ASI and PLV arrested for accepting a bribe of Rs 12,000
17 अक्टूबर 2025 की सुबह एसीबी टीम ने ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया। टीम ने शिकायतकर्ता को 12 हजार रुपये की ट्रैप राशि दी, जिस पर फ्लोरोसेंट पाउडर लगाया गया था। योजना के तहत शाह खान थाने पहुंचा और तय अनुसार पैसे सौंपे। जैसे ही पीएलवी राजू ने नोट लिए, एसीबी टीम ने मौके पर दबिश दी और दोनों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान नोट्स की पहचान के लिए उनके हाथों को रासायनिक परीक्षण (फिनोल्फ्थलीन टेस्ट) से गुजारा गया। संपर्क में आने पर पानी का रंग बदल गया, जिससे यह साबित हुआ कि रिश्वत की राशि इन्हीं दोनों ने ली थी।
ACB ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर बैकुंठपुर रेस्ट हाउस पहुंचाया, जहां पूछताछ और दस्तावेजी कार्यवाही की गई। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने प्रारंभिक चरण में गलती स्वीकार नहीं की, लेकिन जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान और नोटों पर लगे रासायनिक पाउडर के निशान से उनके खिलाफ सबूत मजबूत हो गए। इसके बाद दोनों को मेडिकल जांच के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां एमएलसी परीक्षण के बाद न्यायालय में पेश करने की तैयारी की गई।
घटना के बाद कोरिया जिले के पुलिस विभाग से लेकर न्यायिक तंत्र तक में हलचल मच गई। प्रभारी पुलिस अधीक्षक ने कहा कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह घटना पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता की आवश्यकता को रेखांकित करती है। सरगुजा एसीबी के डीएसपी प्रमोद कुमार खेश ने बताया कि गिरफ्तार दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय लोगों में पुलिस तंत्र के प्रति अविश्वास और नाराजगी को भी उजागर किया, लेकिन साथ ही एसीबी की तत्परता ने एक सकारात्मक संदेश भी दिया कि सिस्टम में सुधार की गुंजाइश अब भी मौजूद है। मोहल्लावासियों ने कहा कि अगर हर नागरिक शाह खान की तरह हिम्मत दिखाए और रिश्वत न दे, तो ऐसे भ्रष्ट कर्मचारियों की शक्ति अपने आप खत्म हो जाएगी।
स्थानीय नागरिकों ने एसीबी की कार्रवाई की प्रशंसा की और कहा कि यह पहली बार है जब किसी थाना परिसर में खुले तौर पर रिश्वत लेते हुए पुलिसकर्मी पकड़े गए हैं। एक व्यापारी ने कहा कि इस कार्रवाई ने आम लोगों में भरोसा जगाया है कि न्याय के लिए अब भी ईमानदार अधिकारी मौजूद हैं।
इस घटना का असर सिर्फ कोरिया जिले तक सीमित नहीं रहा। प्रदेशभर में पुलिस थानों और न्यायालयों में काम करने वाले कर्मचारियों में डर का माहौल बन गया। विभागीय स्तर पर एसीबी ने सभी थानों में गोपनीय निगरानी बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं ताकि भविष्य में ऐसे प्रकरण न हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला न केवल एक उदाहरण है बल्कि यह सरकारी विभागों में व्याप्त छोटे पैमाने के भ्रष्टाचार की गहरी जड़ को भी दर्शाता है। अधिकांश मामलों में गरीब और मध्यम वर्ग के लोग ऐसी स्थितियों का सामना करते हैं, जहां वे मजबूरीवश रिश्वत देने को तैयार हो जाते हैं। शाह खान का यह कदम उन्हें प्रेरित कर सकता है कि वे भी ऐसे उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाएं।
पटना थाना रिश्वत प्रकरण छत्तीसगढ़ पुलिस के भीतर बढ़ते भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है, लेकिन इसके साथ यह भी दिखाता है कि व्यवस्था में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। एसीबी की तेज कार्रवाई ने साबित किया कि यदि कोई ईमानदार नागरिक शिकायत करता है, तो रिश्वतखोर चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, बच नहीं सकता।
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