Abusive Language by Kotma TI :अनूपपुर, मध्य प्रदेश:मैं रोहित कुमार जायसवाल ग्राम पैगोंडाड का वर्तमान में उपसरपंच का अध्यक्ष हूँ। दिनांक 13/6/25 को मेरे ग्राम पंचायत तुलसीबांध में एक व्यक्ति की गाड़ी को जला दिया गया जिसकी सूचना… हमें प्रार्थी द्वारा दिया गया तब हम लोग मौके पर गये और आग… के लोगों से पूछताछ किये लेकिन कोई व्यक्ति द्वारा हमें जानकारी नहीं दिया गया तब हम लोग प्रार्थी को थाना लेकर गये और… से जितना हमें जानकारी रहा। उतना बताये।
फिर टी.आई. साहब… प्रार्थी को बुलाकर पूछताछ किये। फिर मुझे बुलाकर टी.आई. साहब… द्वारा मुझे बोला कि तुम झूठी रिपोर्ट लिखवाने आये हो तुम्हें मारकर अन्दर कर दूंगा और जूते मारकर भगा दूंगा। तुम ज्यादा… दिखाते हो। तुम्हारे जैसे उपसरपंच को मैं लात-जूते से बात… तुम अपने कान का जाली साफ़ कर लेना चाहिये। मैं बोल… पहली बार आये हो इसलिये छोड़ रहा हूँ नहीं तुम्हारा… कर दूंगा। और सुनो तुम्हें जहाँ जाना हो जाओ मुझे कोई फर्क नहीं… मेरा नाम रत्नाकर शुक्ला है। चलो निकलो यहाँ से।
अतः श्रीमान् मंत्री महोदय जी से निवेदन है कि जितना जलील किया गया और अपमान किया इन सारी बातों का आप अमल कर टी.आई. के ऊपर समुचित कार्यवाही करने की कृपा करें ।
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कोतमा थाना प्रभारी रत्नांबर शुक्ला के खिलाफ मिली शिकायत ने पुलिस विभाग की असली हालत दिखा दी है। मोटरसाइकिल जलाने की घटना में न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचे उपसरपंच और फरियादी के साथ थाना में गलत व्यवहार किया गया। थाना प्रभारी ने फरियादी को डरा-धमकाकर अपशब्द कहे और पंचायत प्रतिनिधि को भी अपमानित किया।
पुलिस का काम जनता की सेवा और सुरक्षा करना है, लेकिन यहां पुलिस खुद ही ज्यादती का प्रतीक बन गई है। अब लोगों में चर्चा है कि क्या अब आम आदमी या जनप्रतिनिधि को भी थाने में अपमानित किया जाएगा? क्या वर्दी पहनना अब कानून से ऊपर होना है? यह अपमान केवल उपसरपंच तक सीमित नहीं है, बल्कि हर नागरिक का है — और अब जनता यह अन्याय चुपचाप नहीं सहेगी।
थाना अब न्याय का नहीं, बल्कि दबंगई का केंद्र बन गया है। जनप्रतिनिधियों की बेइज्जती और फरियादी को डराने की घटना ने लोगों के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं — क्या पुलिस अधिकारी सबसे ऊपर हैं? क्या जनसेवा करनेवालों को ऐसी सजा मिलेगी?
कोतमा की खाकी अब अनुशासन का नहीं, मनमर्जी का प्रतीक बन गई है। संविधान की शपथ लेकर जनता को गालियां देना तानाशाही है। थाना प्रभारी के खिलाफ शिकायत पुलिस अधीक्षक तक पहुँच गई है। अब जनता सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि सख्त उदाहरण चाहती है। कोतमा की गलियों में चर्चा है — या तो पुलिस अपना व्यवहार सुधारे या जिम्मेदार पद से हट जाए।
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