absence of secretary in Kerta Gram Panchayat: सूरजपुर :प्रतापपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत केरता में विकास कार्य इन दिनों पूरी तरह से ठप पड़े हैं। इसकी मुख्य वजह पंचायत सचिव मोहरलाल राजवाड़े की लगातार अनुपस्थिति बताई जा रही है। सचिव के न होने से पंचायत के कामकाज में बाधा आयी है और सरकारी योजनाओं का संचालन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर आक्रोश है क्योंकि सचिव अपनी ड्यूटी से अधिक निजी नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी के काम में व्यस्त रहते हैं।
केरता ग्राम पंचायत में लगभग 2000 लोग रहते हैं। यहां के ग्रामीण पंचायत सचिव पर विकास कार्य और योजनाओं को लेकर पूरी तरह निर्भर हैं। लेकिन सचिव की गैरमौजूदगी के कारण पंचायत भवन में काम बंद हो गया है। न तो कोई फाइल आगे बढ़ रही है और न ही ग्रामीणों को योजनाओं का समय पर लाभ मिल पा रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि सचिव महीनों से पंचायत भवन में दिखाई ही नहीं देते।
गांव के बुजुर्ग कन्हैया लाल कहते हैं कि सड़क मरम्मत समेत कई विकास कार्य सचिव की उपस्थिति न होने से रुके हुए हैं। वहीं महिला मंगल दल की अध्यक्ष प्रमिला देवी बताती हैं कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन लंबित हैं और किश्त मिलने में विलंब हो रहा है। लोगों के दस्तावेज सही होने के बावजूद सचिव की अनुपस्थिति से काम नहीं हो पा रहा।
ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव मोहरलाल राजवाड़े एक निजी नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी में लगे होने के कारण पंचायत भवन नहीं आते। व्यापारियों का कहना है कि सरकारी काम करवाने के लिए चलते-फिरते ग्राम रोजगार सहायक भी कहते हैं कि सचिव कई महीनों से अनुपस्थित हैं। पंचायत भवन खाली पड़ा है और ग्रामवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
absence of secretary in Kerta Gram Panchayat
सचिव की अनुपस्थिति के कारण कई योजनाएं अधर में लटक गई हैं। मनरेगा के निर्माण कार्य, प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्रों का चयन, वृद्धा पेंशन, शौचालय निर्माण आदि कार्य सचिव की हस्ताक्षर और स्वीकृति पर निर्भर हैं। सचिव के अभाव में ये कार्य ठप हैं और लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा।
पंचायत के सदस्य और सरपंच भी सचिव की अनुपस्थिति से परेशान हैं। सरपंच अनीता बाई कहती हैं कि सचिव को बार-बार बुलाने के बावजूद वे निजी कारणों से नहीं आते और प्रशासन भी कोई कार्रवाई नहीं करता। प्रतिनिधि अपना काम करने में असमर्थ हैं क्योंकि सचिव की सहमति जरूरी होती है।
ग्रामीणों ने कई बार जनपद पंचायत के अधिकारियों को शिकायत की है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय प्रशासन की उदासीनता से सचिव मनमानी करने लगा है। ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है और वे प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई ग्रामीण आंदोलन की चेतावनी भी दे रहे हैं।
केरता पंचायत में सचिव की गैरमौजूदगी के कारण सड़क मरम्मत, सामुदायिक भवन निर्माण, स्वच्छता अभियानों, आंगनबाड़ी राशन आपूर्ति और कृषि सामग्री वितरण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इससे गांव का समग्र विकास बाधित है और ग्रामीण निराश हैं।
ग्रामीण अब प्रशासन से मांग करते हैं कि सचिव की अनुपस्थिति का कारण पूछकर उनका स्थान खाली कराकर नया सचिव तैनात किया जाए ताकि विकास कार्य फिर से शुरू हो सकें। अन्यथा पंचायत में व्यापक स्तर पर परेशानी और असंतोष का माहौल बन सकता है।
इस प्रकार, केरता ग्राम पंचायत में सचिव की लगातार गैरहाजिरी ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को बाधित कर दिया है। प्रशासन की समय पर कार्रवाई न होने से ग्रामीणों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं और विकास कार्यों में गंभीर अवरोध बने हुए हैं।
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