Aamat Traditional and Healthy Dish from Bastar: आमत (Aamat) छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का पारंपरिक और मशहूर व्यंजन है, जिसे स्थानीय लोग “बस्तर का सांभर” भी कहते हैं। यह एक तरह की मिश्रित सब्जी या करी होती है, जिसे खासतौर पर बांस की कोपल या टहनी में पकाया जाता है। इस पारंपरिक पकाने की विधि से इसमें एक अनोखी और प्राकृतिक खुशबू आती है, जो इसे अलग स्वाद देती है।

मुख्य सामग्री
आमत में काला चना, सहजन की फलियाँ, आलू, बैंगन, भिंडी और हरी बीन्स जैसी ताज़ी या सूखी सब्जियाँ डाली जाती हैं। स्वाद के लिए अदरक-लहसुन का पेस्ट, हल्दी, नमक और हरी मिर्च का प्रयोग किया जाता है। खट्टापन लाने के लिए इसमें इमली का पल्प या कच्चा आम डाला जाता है। यह व्यंजन आमतौर पर बहुत कम या बिना तेल के बनाया जाता है, जिससे यह हल्का और सुपाच्य होता है।

Aamat Traditional and Healthy Dish from Bastar बनाने की विधि
सबसे पहले काले चने को पानी में भिगोया जाता है और सब्जियाँ काटकर तैयार की जाती हैं। अदरक, लहसुन और हरी मिर्च पीसकर मसाला बनाया जाता है। सब्जियों को पानी में उबालकर उसमें चना और मसाले डाले जाते हैं। इसके बाद इसमें इमली का पल्प मिलाया जाता है। पारंपरिक तौर पर सभी सामग्री को बांस की कोपल में भरकर धीमी आँच पर पकाया जाता है, जिससे इसमें बांस की खुशबू घुल जाती है।

सांस्कृतिक महत्व
आमत बस्तर के आदिवासी और ग्रामीण समुदाय की खान-पान संस्कृति का अहम हिस्सा है। इसे त्योहारों, शादियों और विशेष अवसरों पर जरूर बनाया जाता है। बांस में पकाने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और यह स्थानीय पर्यावरण व परंपरा से गहराई से जुड़ी हुई है।
स्वास्थ्य लाभ
आमत बिना ज्यादा तेल और मसालों के बनता है, इसलिए यह सुपाच्य और पौष्टिक होता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में मिलते हैं। बांस की कोपल में पकाने से इसमें हल्के एंटीऑक्सीडेंट गुण भी आते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं।

लोकप्रियता
अपने हल्के लेकिन खास स्वाद और प्राकृतिक खुशबू के कारण आमत बस्तर आने वाले पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है। यह न केवल भोजन का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक पहचान का भी अहम हिस्सा है।
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