A 40-day-old infant tragically died in an attack by a lone elephant in Bhatgaon: सूरजपुर : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के भटगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत डुमरिया बिट के ग्राम पंचायत चिकनी धरमपुर में बीती रात एकाकी हाथी के हमले में मात्र 40 दिन के नवजात की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना रात लगभग 1 बजे की बताई जा रही है, जब उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के थाना कोटेसरा निवासी प्रवासी मजदूर दंपति गुड़ फैक्ट्री में काम करने के लिए यहां आए थे। वे अपने परिवार सहित फैक्ट्री के पास बनी अस्थायी झोपड़ी में रह रहे थे।
सोनगरा जंगल से भटका एक हाथी गुड़ की तेज गंध से आकर्षित होकर झोपड़ी की ओर बढ़ा और उसने झोपड़ी को चकनाचूर कर दिया। हमले के दौरान दंपति किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन उनका नवजात शिशु हाथी के विशाल पैरों तले कुचल गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी, लेकिन उनका आरोप है कि विभाग की टीम काफी देर बाद पहुंची, जिससे स्थिति और भयावह हो गई।
घटना की जानकारी फैलते ही आसपास के ग्रामीणों में दहशत फैल गई। सूरजपुर जिले में हाथियों का आतंक कोई नई बात नहीं है, हाल ही में भटगांव थाना क्षेत्र के कपसरा बिसाही पोड़ी गांव में ही एक हाथी ने खलिहान में सो रहे दंपति कबिलास राजवाड़े (42) और धनियारो (38) को कुचलकर मार डाला था। वह घटना भी रात करीब 2 बजे हुई थी, जब वे धान की रखवाली कर रहे थे।
वन विभाग की लापरवाही पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। चिकनी धरमपुर के ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से सटे इलाकों में हाथियों की मौजूदगी की पूर्व सूचना नहीं दी जाती, न ही रात्रि गश्त बढ़ाई जाती है। एक ग्रामीण ने बताया कि गुड़ फैक्ट्री के आसपास खाद्य सामग्री की गंध हाथियों को आकर्षित करती है, फिर भी कोई रोकथाम के उपाय नहीं किए गए। इसी तरह कपसरा घटना में भी वन टीम देरी से पहुंची थी और हाथी की लोकेशन ट्रैक नहीं हो पाई।
प्रवासी मजदूर दंपति की पहचान अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है, लेकिन वे मुजफ्फरनगर से मजदूरी के लिए आए थे। नवजात की मां का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि पिता सदमे में हैं। स्थानीय प्रशासन ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। वन विभाग ने अलर्ट जारी कर ग्रामीणों से रात में अकेले न घूमने और हाथी दिखने पर तुरंत सूचना देने की अपील की है।
सूरजपुर जिले में मानव-हाथी संघर्ष तेज हो रहा है। नवंबर 2025 में ही कई जिलों में हाथियों ने चार लोगों की जान ली, जिनमें सूरजपुर के दो मामले शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों की कटाई और खेती के विस्तार से हाथी बस्तियों में घुस रहे हैं। गुड़, धान जैसी फसलों की गंध उन्हें भटकाती है। प्रशासन को ड्रोन ट्रै킹, सोलर फेंसिंग और जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।
चिकनी धरमपुर जैसे दूरस्थ गांवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। यहां न तो तत्काल चिकित्सा सुविधा है, न ही वन्यजीव सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मिलकर मांग की है कि प्रभावित परिवार को तत्काल मुआवजा, बच्चों की पढ़ाई का खर्च और स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। वन मंत्री से भी हस्तक्षेप की मांग उठ रही है।
घटना के बाद गुड़ फैक्ट्री प्रबंधन ने सुरक्षा बढ़ाने का वादा किया है। मजदूरों को झोपड़ियों के बजाय पक्के क्वार्टर में रखने और रात्रि ड्यूटी पर टॉर्च, पटाखों की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया। स्थानीय विधायक ने भी वन विभाग पर कार्रवाई की बात कही। ऐसे हमलों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है, क्योंकि मजदूर भागने लगे हैं।
A 40-day-old infant tragically died in an attack by a lone elephant in Bhatgaon
वन्यजीव प्रेमी संगठनों ने हाथियों के लिए कॉरिडोर बनाने की मांग की है। सूरजपुर के सोनगरा, कपसरा जैसे जंगलों से हाथी झुंड में भटकते हैं। एकाकी हाथी अधिक खतरनाक होते हैं। सरकार को केंद्र की मानव-वन्यजीव संघर्ष नीति लागू करनी चाहिए, जिसमें 5 लाख तक मुआवजा और बीमा शामिल है।
यह घटना सूरजपुर को झकझोर गई। नवजात की मौत ने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी। ग्रामीण सतर्क हैं, लेकिन वन विभाग की तत्परता पर सवाल बने हैं। प्रशासन को अब ठोस कदम उठाने होंगे, वरना ऐसी त्रासदियां बढ़ेंगी।
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