Surguja KCC Scam: सरगुजा:अंबिकापुर (21 july 2026): सरगुजा जिले में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण घोटाले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। सीतापुर पुलिस ने पेटला शाखा में फर्जी ऋण आहरण के मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान दीपक कुमार चक्रधारी के रूप में हुई है, जिसे न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, यह मामला जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की पेटला शाखा से जुड़ा है, जहां 127 किसानों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों के जरिए 1 करोड़ 92 लाख 82 हजार 96 रुपये की निकासी की गई। जांच में सामने आया कि कई किसानों ने न तो ऋण के लिए आवेदन किया था और न ही किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे।
मामले का खुलासा किसानों की शिकायत के बाद हुई जांच से हुआ। इसके बाद संयुक्त जांच दल ने पूरी गड़बड़ी की रिपोर्ट तैयार की, जिसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित थाना क्षेत्र में बैंक से जुड़े कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
Surguja KCC Scam
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दीपक कुमार चक्रधारी बैंक में दैनिक वेतनभोगी कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम कर रहा था। जांच में उसकी भूमिका संदिग्ध मिलने पर उसे हिरासत में लिया गया और पूछताछ के बाद औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी ऋण निकालने की इस पूरी प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी।
यह घोटाला सिर्फ एक बैंक शाखा तक सीमित नहीं बल्कि ग्रामीण सहकारी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। किसानों के नाम पर फर्जी ऋण निकालकर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप बेहद गंभीर है, क्योंकि इससे न केवल वित्तीय नुकसान हुआ बल्कि वास्तविक किसानों के भरोसे को भी ठेस पहुंची है।
स्थानीय स्तर पर इस मामले ने प्रशासन को भी सतर्क कर दिया है। जांच एजेंसियां अब दस्तावेजों, हस्ताक्षरों, ऋण स्वीकृति प्रक्रिया और भुगतान रजिस्टर की गहन जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस केस में और भी नाम सामने आ सकते हैं।
सरगुजा में सामने आया यह KCC घोटाला सहकारी बैंकिंग प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल है। किसानों के नाम का इस्तेमाल कर लाखों रुपये की निकासी का आरोप इस बात की ओर इशारा करता है कि निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियां थीं।
अब पुलिस और प्रशासन दोनों पर यह दबाव है कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। यह मामला फिलहाल जांच के दायरे में है, लेकिन इसकी गंभीरता को देखते हुए इसे जिले के बड़े वित्तीय घोटालों में गिना जा रहा है।
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