Ambikapur: Posing as a Friend to Facilitate Account Opening—Banking Fraud Worth Approximately ₹1.8 Crore: सरगुजा:अंबिकापुर (17 मई 2026):सरगुजा जिले के मुख्यालय अंबिकापुर में बैंकिंग धोखाधड़ी और साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक सीधे‑साधे युवक को कुछ शातिर युवकों ने दोस्ती के नाम पर अपने झांसे में ले लिया। इसके बाद आरोपियों ने उसके नाम पर बैंक खाता खुलवा लिया। इसी खाते का उपयोग कर लगभग ₹1.8 करोड़ का संदिग्ध और भारी‑भरकम वित्तीय लेन‑देन किया गया। यह पूरा घटनाक्रम गांधीनगर थाना क्षेत्र में दर्ज FIR से प्रकाश में आया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अंबिकापुर के 20–25 वर्षीय युवक से कुछ युवा दोस्त बनकर उसका भरोसा जीत लिया। उन्होंने इसे बैंक खाता खुलवाने के लिए बरगलाया। युवक से आधार कार्ड, मोबाइल सिम, आधार‑लिंक नंबर और अन्य व्यक्तिगत जानकारी ली गई। उसे यह समझाया गया कि खाता किसी छोटे व्यावसायिक या निजी काम के लिए खोला जा रहा है। वास्तविकता में आरोपियों का उद्देश्य बैंकिंग और साइबर ठगी के जाल में उसे फँसाना था।
जैसे ही खाता सक्रिय हुआ, उसमें बड़ी‑बड़ी रकम की ऑनलाइन ट्रांसफर, आई‑एफटी, यूपीआई और अन्य डिजिटल लेन‑देन के जरिए लगभग 1.8 करोड़ रुपये का वित्तीय घेराबंदी हुआ। यह सभी लेन‑देन संदिग्ध और अनियमित प्रकृति के थे। इनमें से दो‑तिहाई से अधिक रकम अन्य फर्जी या शातिर खातों में ट्रांसफर कर दी गई। जब युवक को खाते की बैलेंस और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री की असलीता का पता चला, तो वह भयभीत होकर गांधीनगर थाने पहुंचा और शिकायत दर्ज कराई।
पीड़ित की लिखित शिकायत पर गांधीनगर थाने में जालसाजी, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। प्राथमिकी में दो नामजद युवकों को आरोपी बनाया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पीड़ित की सरलता और दोस्ती का फायदा उठाकर उसके नाम पर बैंक खाता खुलवाया। इसके बाद उस खाते का उपयोग कर संदिग्ध ट्रांजेक्शन किए गए। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा‑420 (धोखाधड़ी), 468‑471 (जाली दस्तावेज़) और आईटी एक्ट की धाराएं शामिल हैं।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बैंकों से खाते का लेन‑देन विवरण, पासबुक और स्टेटमेंट जुटाना शुरू कर दिया है। इसके जरिए ट्रांसफर की गई रकम के अंतिम खातों, आईपी‑एड्रेस और उपयोग किए गए इंटरनेट बैंकिंग यूजर‑आईडी की जांच की जा रही है। साथ ही आरोपियों के अन्य संभावित बैंक खातों, उनके मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस पर निगरानी शुरू हो चुकी है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह मामला सिर्फ दो आरोपियों तक सीमित नहीं, बल्कि एक बड़े साइबर ठगी गिरोह से जुड़ा हो सकता है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, खाते में आई रकम को तुरंत छोटे‑छोटे ट्रांसफर या एटीएम निकासी के जरिए अन्य खातों में भेज दिया गया। यह टेक्निक साइबर ठगी गिरोहों की परंपरागत रणनीति है। इससे लेन‑देन को ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है। अंततः रकम अन्य राज्यों, ऑनलाइन गेमिंग या क्रिप्टो‑प्लेटफॉर्म के जरिए गुम हो जाती है। पुलिस को ऐसे ही अन्य मामलों के पैटर्न के साथ मिलते‑जुलते संकेत मिले हैं, जिससे यह संभावना बनी हुई है कि यह घटनाक्रम भी एक व्यापक साइबर फ्रॉड गिरोह का हिस्सा हो सकता है।
Ambikapur: Posing as a Friend to Facilitate Account Opening—Banking Fraud Worth Approximately ₹1.8 Crore
पीड़ित युवक के परिजनों के मुताबिक, वह एक साधारण घर से है। वह रोज किराए वाली दुकानों में छोटे‑मोटे काम या दिहाड़ी श्रम से गुजारा करता था। उसे बैंकिंग प्रक्रिया, डिजिटल लेन‑देन और साइबर फ्रॉड की नई तकनीकों की अच्छी जानकारी नहीं है। आरोपियों ने इसी कमजोरी का फायदा उठाया। अब खाते में हुए लेन‑देन के कारण उसका नाम बैंकिंग और पुलिस रिकॉर्ड्स में घोटाले और ठगी से जुड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। ऐसे में भविष्य में नौकरी, बैंक लोन या किसी औपचारिक व्यवसाय के लिए दस्तावेजी अनुमोदन में भी उसको बड़ी दिक्कतें आ सकती हैं।
परिजनों का आरोप है कि आरोपियों ने सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि युवक की किस्मत और भविष्य को भी संकट में डाल दिया है। इसलिए वे पुलिस और प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि जांच न केवल गिरफ्तारी तक सीमित रहे, बल्कि पीड़ित की रिप्यूटेशन बहाल करने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएं। पुलिस का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर बैंकों को भी अवगत कराया जाएगा, ताकि पीड़ित के नाम पर खाते से जुड़े गलत इतिहास को दुरुस्त किया जा सके।
अंबिकापुर में पिछले एक‑दो वर्षों में बैंकिंग घोटालों और साइबर ठगी के मामले बढ़े हैं। अंबिकापुर जिला सहकारी बैंक सहित अन्य बैंकों की शाखाओं में भी करोड़ों रुपये के गबन के मामले सामने आ चुके हैं। इनमें अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है। इन घटनाओं ने आम जनता में डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन लेन‑देन के प्रति डर और अविश्वास बढ़ा दिया है।
इसी कारण इस नए मामले पर पुलिस और बैंक प्रबंधन के लिए दबाव बना है। यह चेतावनी है कि युवकों को बिना सोचे‑समझे अपने बैंक खाते और मोबाइल सिम के नाम देने से रोकने के लिए जागरूकता अभियान और कड़ी निगरानी जरूरी है। अधिकारियों का कहना है कि अंबिकापुर और आसपास के इलाकों में जल्द ही साइबर सुरक्षा और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इनमें बैंक कर्मचारियों, स्कूल‑कॉलेज छात्रों और युवाओं को धोखाधड़ी के आम तरीकों, फेक कॉल, फर्जी लोन ऑफर और खाते के दुरुपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अभी दो नामजद आरोपी गिरफ्तारी से पहले हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित की जा रही हैं। साथ ही बैंकों से मिली डिजिटल डेटा की जांच कर यह तय करने की कोशिश की जा रही है कि खाते में आई रकम किस स्रोत से आई और आखिरी खातों में जाकर कहां ली गई। इसके आधार पर अन्य आरोपियों के खिलाफ भी मामला दर्ज करने की तैयारी है।
पीड़ित परिवार और स्थानीय सामाजिक संगठनों का मानना है कि इस तरह की ठगी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इससे भविष्य में गिरोह दोबारा आसानी से युवाओं को अपना शिकार न बना सकें। अदालती प्रक्रिया में भी जरूरत इस बात की है कि साइबर फ्रॉड मामलों में जटिल तकनीकी साक्ष्य और डिजिटल रिकॉर्ड के बावजूद न्याय की गति धीमी न हो। इस मामले से यह संदेश साफ है कि अंबिकापुर जैसे शहर भी साइबर अपराध की वैश्विक लहर से अछूते नहीं हैं। इसलिए जागरूकता, कानूनी कड़ी कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था की जरूरत अब और बढ़ गई है।
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