The Light of Electricity Reaches Surajpur’s Forest Villages: सूरजपुर : 23 अप्रैल 2026:सूरजपुर जिले के वनांचल क्षेत्रों के लिए ye दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो जाएगा। एक ऐतिहासिक निर्णय के तहत राज्य सरकार ने सूरजपुर के ओड़गी विकासखंड के सुदूर वनांचल गांवों और उनसे जुड़े टोलों के विद्युतीकरण को आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इस निर्णय के बाद आजादी के सात दशकों से अंधेरे में डूबे चंद दर्जनों गांवों और टोलों के घरों में बिजली का उजाला पहुंचने का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो गया है।
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने इस परियोजना के लिए तकनीकी स्वीकृति देते हुए कार्य आदेश भी जारी कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ओड़गी विकासखंड के तीन सुदूर ग्रामों के नियमित विद्युतीकरण के लिए लगभग 3 करोड़ 6 लाख 92 हजार 670 रुपये की धनराशि की स्वीकृति दी गई है। यह राशि ट्रांसफार्मर, तारबंदी, उपकेंद्र और वितरण नेटवर्क के निर्माण के लिए उपयोग होगी, जिससे गांवों में निरंतर और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
इस पूरी पहल की गति और दिशा में महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का निरंतर और दृढ़ प्रयास मुख्य भूमिका में रहा है। उन्होंने वनांचल क्षेत्रों के दौरे के दौरान लोगों की “अंधेरे की नियति” वाली कहानी को गंभीरता से लेते हुए ऊर्जा विभाग और राज्य स्तर पर प्रस्तावों को आगे बढ़ाया। उनके दबाव और निरंतर पहल के कारण ही वनांचल के टोलों के विद्युतीकरण के लिए आवश्यक बजट और तकनीकी स्वीकृति मिल पाई।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट प्राथमिकता है कि “प्रदेश का कोई भी घर अंधेरे में न रहे”। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्युत सुविधा उपलब्ध होने से बच्चों को अच्छी पढ़ाई का अवसर मिलेगा, किसानों को सिंचाई और प्रसंस्करण कार्यों में सुविधा होगी और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार तथा लघु उद्यमों को नया बल मिलेगा।
The Light of Electricity Reaches Surajpur’s Forest Villages
सूरजपुर के वनांचल में बसे जिन टोलों ने पीढ़ियों तक अंधेरे को अपनी नियति मान लिया था, वहां अब उजाले की पहली किरण पहुंचने जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि रात में पढ़ाई, खाना बनाना, चिकित्सा सुविधा और छोटे उत्पादन कार्य सब कुछ दीये, मोमबत्ती और सोलर लैंप पर निर्भर थे, जो आर्थिक और तकनीकी रूप से अस्थिर थे। इन टोलों के लिए बिजली लाइन तक बिछाने की चुनौतियाँ जलवायु, भौगोलिक दुर्गमता और लागत दोनों में थीं। इन्हीं चुनौतियों के बावजूद सरकार ने एक बड़ी दूरदर्शिता दिखाई है।
यह निर्णय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के “सुशासन” और “ग्रामीण विकास” की नीतियों का जीवंत उदाहरण है। हाल के महीनों में ऊर्जा विभाग की समीक्षाओं के दौरान मुख्यमंत्री ने विशेष मार्गदर्शन दिया कि नक्सल प्रभावित और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों को विद्युत सुविधा से जोड़ना राज्य की प्राथमिकता है। इस प्रसंग में सूरजपुर के वनांचल विद्युतीकरण को राज्य सरकार की ग्रामीण विकास और समावेशी विकास की नीति का एक ठोस नमूना माना जा रहा है।
बिजली आने से उनकी जीवनशैली पूरी तरह बदल जाएगी। बच्चों को रात में पढ़ने की सुविधा मिलेगी, प्राइमरी और उच्च प्राइमरी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा और फैन‑लाइट व्यवस्था सुधरेगी। किसान पानी की पाइप लाइन और छोटे‑छोटे इलेक्ट्रिक उपकरणों से अपनी उत्पादकता बढ़ा सकेंगे, जबकि महिलाएँ छोटी इकाइयाँ, चक्की, धान घुलाई और हस्तशिल्प जैसे कार्यों में बिजली का उपयोग कर लाभ अर्जित कर पाएँगी।
आगे की दिशा में सरकार की योजना इन गांवों के साथ‑साथ अन्य वनांचल टोलों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की है। इससे न केवल सुरक्षा और स्वास्थ्य स्थिति मजबूत होगी, बल्कि यह क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से जुड़कर छत्तीसगढ़ की आर्थिक व सामाजिक प्रगति का एक अभिन्न हिस्सा बन जाएगा।
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