बलरामपुर: बच्चों का हक़ कूड़े में दबा! चांदो स्कूल के हजारों गणवेश कचरे में सड़ रहे, शिक्षा विभाग की लापरवाही पर सवाल! : Balrampur: Children’s Entitlements Buried in the Trash

Uday Diwakar
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Balrampur: Children’s Entitlements Buried in the Trash: बलरामपुर:​​22 अप्रैल 2026 । बलरामपुर जिले के चांदो क्षेत्र के सरकारी स्कूल में एक शर्मनाक लापरवाही सामने आई है, जहां हजारों बच्चों के लिए आवंटित गणवेश कचरे के ढेर में सड़ते मिले। ग्रामीणों ने इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए। यह घटना स्वामी आत्मानंद स्कूल योजना की विश्वसनीयता पर भी दाग लगा रही है।

चांदो के प्राथमिक/माध्यमिक स्कूल के पास नाले के किनारे कचरे का अमूल्य ढेर पड़ा मिला, जिसमें नया-पुराना गणवेश, जूते, किताबें और स्टेशनरी सामग्री शामिल थी। अनुमान है कि कम से कम 2-3 हजार गणवेश बर्बाद हो चुके हैं। स्थानीय ग्रामीण रमेश साहू ने बताया कि सरकारी आवंटन की यह सामग्री वर्षों से यहीं पड़ी सड़ रही है, जबकि गरीब बच्चों को गणवेश के लिए तरसना पड़ रहा।

स्कूल प्रबंधन ने सफाई का दावा किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कचरा नाले में बहने से पर्यावरणीय खतरा भी बढ़ गया। ग्रामीणों ने जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत दी, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

छत्तीसगढ़ सरकार हर साल करोड़ों रुपये स्कूल यूनिफॉर्म पर खर्च करती है। चांदो जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में यह पहली घटना नहीं। पिछले साल कोरबा में भी गणवेश चोरी का मामला सामने आया था। विभागीय अधिकारी बताते हैं कि स्व-सहायता समूहों से गणवेश बनवाए जाते हैं, लेकिन वितरण में भ्रष्टाचार और लेटलतीफी आम है। चांदो स्कूल में 800 से अधिक बच्चे हैं, जिनमें से आधे अब तक गणवेशहीन हैं।

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प्रति बच्चा 800-1000 रुपये के हिसाब से हजारों गणवेश का नुकसान लाखों में है। यह राशि गरीब परिवारों के लिए महत्वपूर्ण होती। विभाग ने स्टॉक रजिस्टर में गणवेश वितरित दिखाए, लेकिन हकीकत अलग। जिला स्तर पर ऑडिट न होने से ऐसी बर्बादी बढ़ रही। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल ट्रैकिंग से इसे रोका जा सकता था।

स्थानीय लोगों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया। महिलाओं ने कहा, “हमारे बच्चे फटे कपड़ों में पढ़ते हैं, जबकि सामग्री कचरे में।” अभिभावक संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। सोशल मीडिया पर #बच्चोंकाहककूड़ेमें ट्रेंड कर रहा, जिससे मामला वायरल हो गया। ग्रामीणों ने कचरा उठाकर स्कूल में ही रख दिया, ताकि जिम्मेदार बेनकाब हों।

Balrampur: Children’s Entitlements Buried in the Trash

जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच टीम भेजने का ऐलान किया। बीईओ का कहना है कि पुराने स्टॉक को नष्ट किया जाना था, लेकिन प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। विभाग ने दोषी क्लर्क पर कार्रवाई का वादा किया। हालांकि, स्थानीय स्तर पर अविश्वास है। राज्य शिक्षा मंत्री ने समान मामलों में पहले सस्पेंशन के आदेश दिए हैं।

छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग पर बार-बार लापरवाही के आरोप लगे। 2021 में कोरबा गणवेश घोटाला, 2023 में सागर में विलंब। बलरामपुर में हाल ही प्राइवेट स्कूल बंदी हुई। ये घटनाएं बताती हैं कि बजट का दुरुपयोग जारी है। केंद्र सरकार की यूनिफॉर्म योजना भी प्रभावित हो रही।

यह मामला जागरूकता फैला सकता। अभिभावकों को RTI दाखिल करने चाहिए। सफल जांच से अन्य जिलों को सबक मिलेगा। बच्चों को उनका हक दिलाना प्रशासन की जिम्मेदारी।

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