Remove Rajpur SDM Devendra: बलरामपुर:17 अप्रैल 2026 । छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में प्रशासनिक अहंकार और राजनीतिक टकराव ने जोरदार रूप ले लिया है। सामरी विधानसभा क्षेत्र की भाजपा विधायक उद्धेश्वरी पैकरा ने राजपुर एसडीएम देवेंद्र प्रधान को 24 घंटे के अल्टीमेटम दे दिया है। भूमिपूजन कार्यक्रम में एसडीएम के अनुपस्थित रहने पर भड़की विधायक ने कलेक्टर को फोन कर हटाने की चेतावनी जारी की।
राजपुर के शासकीय महाविद्यालय के पास सीसी रोड और नाली निर्माण के भूमिपूजन कार्यक्रम में विधायक पैकरा मुख्य अतिथि थीं। एसडीएम देवेंद्र प्रधान और तहसीलदार को आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद विधायक तहसील कार्यालय पहुंचीं और कारण पूछा।
एसडीएम ने कथित तौर पर कहा, “आना है या नहीं, यह मेरी मर्जी है।” इस बयान से विधायक आगबबूला हो गईं। उन्होंने तत्काल कलेक्टर राजेंद्र कटारा को फोन किया और 24 घंटे में एसडीएम हटाने का अल्टीमेटम दिया। समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी।
अल्टीमेटम का खुलासा
विधायक ने साफ कहा, “अधिकारियों की मनमानी बर्दाश्त नहीं। जनप्रतिनिधि और जनता की बात न सुनने वाले को यहां रहने का हक नहीं।” अगर समयसीमा में कार्रवाई न हुई तो कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के साथ तहसील के बाहर धरना देंगे। कलेक्टर ने बात सुनी, लेकिन अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं।
कार्यक्रम स्थल पर माहौल गरम हो गया। राम सेना समर्थक और स्थानीय BJP कार्यकर्ताओं ने एसडीएम के खिलाफ नारे लगाए। विधायक ने प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अफसरशाही पर ब्रेक लगाने की बात कही।
एसडीएम देवेंद्र प्रधान से संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। सूत्रों के अनुसार, वे कार्यक्रम में व्यस्त थे और प्रोटोकॉल के तहत उपस्थिति जरूरी नहीं। पहले भी जनपद समीक्षा बैठक में विधायक-सुश्री पैकरा और एसडीएम के बीच सामंजस्य देखा गया था।
भाजपा विधायक का अपनी ही सरकार के खिलाफ रुख जिले में चर्चा का विषय है। विपक्ष ने इसे आंतरिक कलह बताया। स्थानीय नेताओं का कहना है कि विकास कार्यों में सहयोग न मिलने से विधायक नाराज हैं। कलेक्टर पर दबाव बढ़ गया है।
पिछले महीनों में बलरामपुर में कई विकास योजनाओं का भूमिपूजन विधायक ने किया। यह पहला ऐसा मामला है जहां प्रशासनिक अधिकारी से खुला टकराव हुआ। BJP जिलाध्यक्ष ने शांति बनाए रखने की अपील की।
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बलरामपुर-रामानुजगंज आदिवासी बहुल जिला है, जहां सामरी विधानसभा में विकास मुद्दे प्रमुख हैं। सीसी रोड जैसी योजनाएं ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण। प्रोटोकॉल विवाद से स्थानीय स्तर पर अफसर-नेता टकराव बढ़ सकता है।
24 घंटे पूरे होने पर धरना तय है। कलेक्टर स्तर पर स्थानांतरण संभव, लेकिन ऊपर से हरी झंडी जरूरी। विधायक ने पत्रकारों को भी धरने में शामिल होने का संकेत दिया, जिससे मीडिया निष्पक्षता पर सवाल उठे। प्रशासन ने चुप्पी साधी है।
स्थानीय निवासियों का कहना, “विकास कार्य अच्छे, लेकिन विवाद से रुकावट न हो।” ग्रामीणों ने विधायक के पक्ष में आवाज उठाई। एसडीएम के खिलाफ पुरानी शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
यह घटना छत्तीसगढ़ में नेता-अफसर संबंधों पर नई बहस छेड़ सकती है। क्या अल्टीमेटम मानेगा प्रशासन?
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