जशपुर जिले के पत्थलगांव वन क्षेत्र में 11 हाथियों के दल ने भद्रापारा गांव में उत्पात मचाया, तीन घरों को नुकसान और फसलें बर्बाद : 11 elephants wreaked havoc in Bhadrapura village

Uday Diwakar
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11 elephants wreaked havoc in Bhadrapura village: जशपुर:​ जशपुर जिले के पत्थलगांव वन क्षेत्र से निकलकर आए 11 हाथियों के दल ने बुधवार की रात भद्रापारा गांव में उत्पात मचा दिया। हाथियों ने गांव में तीन घरों को नुकसान पहुंचाया और खेतों में लगी फसलों को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई। घटना रात के समय होने की वजह से गांव में लंबे समय तक अंधेरे में अफरातफरी का माहौल रहा और लोग अपने घरों से बाहर निकलने से बचते रहे।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह दल वन क्षेत्र में खाने और पानी की तलाश में घूमते हुए गहरी रात में भद्रापारा गांव की ओर बढ़ गया। गांव के बाहरी इलाकों में खड़ी फसलों (ज्यादातर धान और तिल की फसल) को देखकर हाथियों ने सीधे खेतों की ओर बढ़ दौड़ लगाई। तेज गति से भागते हुए उन्होंने खेतों के बीच से गुजरते हुए फसलों को जमींदोज कर दिया। इस दौरान गांव के तीन घर भी उनके रास्ते में आ गए, जिनकी दीवारें और छत भारी शरीर वजन से तहस‑नहस हो गईं।

ग्रामीणों ने बताया कि रात को शोर और भारी चख‑चख की आवाजें सुनाई देने पर पहले तो लोग डरकर खामोशी से अंदर रुके रहे, लेकिन जब शोर बढ़ने लगा तो कुछ लोग सुरक्षित दूरी से देखने निकले। हाथियों को देखते ही अफरा‑तफरी मच गई और लोग वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को सूचित करने में जुट गए। कुछ लोगों ने हाथियों को डराने के लिए आवाजें भी लगाईं, लेकिन बड़े दल के आगे यह सब बेअसर रहा।

सुबह होते‑होते जब उजाला हुआ तो गांव वालों के सामने तबाही का दृश्य था। एक ही रात में बड़े हिस्से में खेत उजाड़ हो चुके थे, जिससे कई किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। घरों के नुकसान के बारे में ग्रामीणों ने बताया कि एक घर की दीवार ढह गई, जबकि दूसरे में छत व दरवाजे क्षतिग्रस्त हो गए। फिलहाल कोई जनहानि नहीं होने की जानकारी है, लेकिन ग्रामीणों के बीच भय और निराशा बनी हुई है।

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11 elephants wreaked havoc in Bhadrapura village

अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के हाथी‑आक्रमण की घटनाएं जंगल के अंदर जल और चारे की कमी के कारण बढ़ रही हैं। वन विभाग ने भद्रापारा गांव और आसपास के इलाकों में निगरानी तंत्र को मजबूत करने और चेतावनी व्यवस्था बढ़ाने की बात कही है। इसके साथ ही ग्रामीणों को जंगल के किनारे बसे खेतों में अत्यधिक खाने योग्य फसलें न लगाने की सलाह भी दी जा रही है, ताकि हाथियों की ओर आकर्षण कम से कम हो सके।

स्थानीय लेवल पर ग्रामीण संगठनों ने अब वन विभाग से मांग की है कि भविष्य में ऐसे आक्रमणों को रोकने के लिए वास्तविक नीतिगत कदम उठाए जाएं, साथ ही उन्हें नुकसान की उचित मुआवजा भी दी जाए। इस घटना ने जशपुर जिले में मानव‑हाथी संघर्ष की समस्या को फिर से चर्चा में ला दिया है और यह बताता है कि वन‑संरक्षण और ग्रामीण सुरक्षा के बीच बेहतर संतुलन की जरूरत कितनी तत्काल है।

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