15 juvenile delinquents escaped from Ambikapur Place of Safety after attacking a guard: सरगुजा:अंबिकापुर। 17 फरवरी 2026: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर में किशोर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गांधीनगर थाना क्षेत्र के बिशुनपुर स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी (बालक) संस्था से रात करीब 9 बजे 15 अपचारी बालक फरार हो गए। इन बालकों ने ड्यूटी पर तैनात गार्ड पर हमला कर उसे घायल किया और परिसर की दीवार फांदकर भाग निकले। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 5 बालकों को पकड़ लिया है, जबकि 10 अभी भी फरार हैं और उनकी तलाश तेज कर दी गई है।
यह घटना रात की बताई जा रही है, जब संस्था में कुल 25 अपचारी बालक मौजूद थे। फरार हुए बालक हत्या, बलात्कार, चोरी, मारपीट जैसे गंभीर अपराधों के आरोपी हैं। प्लेस ऑफ सेफ्टी जैसी संस्थाएं बाल न्याय अधिनियम के तहत ऐसे किशोरों को रखने के लिए बनाई गई हैं, जहां उन्हें सुधार और पुनर्वास का प्रशिक्षण दिया जाता है। लेकिन रात के अंधेरे का फायदा उठाकर इन्होंने सुनियोजित तरीके से गार्डों पर धावा बोल दिया।
संस्था के एक कर्मचारी ने बताया कि रात 9 बजे गार्ड बालकों को परिसर से कमरों में ले जा रहे थे। तभी 15 बालकों ने अचानक दरवाजा धक्का दिया और हमला कर दिया। एक गार्ड को बुरी तरह पीटा गया, जबकि दूसरे को कुछ बालकों ने पकड़ लिया। इसी परिसर के पीछे के दरवाजे से वे दीवार फांदकर फरार हो गए। गार्डों ने हंगामा मचाया, लेकिन अंधेरे में वे दूर तक भाग चुके थे।
घटना की सूचना मिलते ही गांधीनगर थाना प्रभारी ने टीम गठित कर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों के सहयोग से 5 बालकों को आसपास के इलाकों से बरामद कर लिया गया। ये बालक शहर के विभिन्न इलाकों में छिपे हुए थे। पुलिस ने उन्हें वापस संस्था में बंद कर दिया है। बाकी 10 की तलाश में थाना क्षेत्र के जंगलों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर नाकेबंदी कर दी गई है। एसपी सरगुजा ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीम तैनात की है।
प्लेस ऑफ सेफ्टी बिशुनपुर अंबिकापुर शहर के बाहरी इलाके में स्थित है, जो बाल संप्रेक्षण गृह के अलावा अपचारी किशोरों के लिए विशेष सुविधा प्रदान करता है। यहां सीसीटीवी कैमरे, ऊंची दीवारें और 24 घंटे गार्ड ड्यूटी का प्रावधान है। लेकिन इस घटना ने पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। पूर्व में भी अंबिकापुर के बाल संप्रेक्षण गृहों से फरार होने की घटनाएं हो चुकी हैं। फरवरी 2025 में इसी गांधीनगर क्षेत्र से 3 बालक दीवार फांदकर भागे थे, जबकि मई 2025 में 6 बालकों ने कर्मचारियों की आंखों में मिर्च पाउडर डालकर फरार हो गए थे।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने जिला प्रशासन से संस्था में अतिरिक्त गार्ड, बेहतर रोशनी और जीपीएस ट्रैकिंग की मांग की है। एक कार्यकर्ता ने कहा, “ये बालक गंभीर अपराधी हैं। फरार होने से समाज में खतरा बढ़ जाता है। सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए।” महिला एवं बाल विकास विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, फरार बालकों में अधिकांश स्थानीय हैं, जो सरगुजा जिले के ग्रामीण इलाकों से संबंधित हैं। इनके परिजनों से पूछताछ की जा रही है। एक बालक पर हत्या का केस दर्ज है, जबकि अन्य बलात्कार और चोरी के आरोपी हैं। फरार होने से पुलिस पर दबाव बढ़ गया है, क्योंकि ये बालक दोबारा अपराध कर सकते हैं। थाना प्रभारी अश्विनी सिंह ने कहा, “हम जल्द सभी को पकड़ लेंगे। सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।”
यह घटना छत्तीसगढ़ में किशोर अपराध की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करती है। राज्य में पिछले एक साल में 500 से अधिक अपचारी मामले दर्ज हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक पृष्ठभूमि, गरीबी और नशे की लत इसके प्रमुख कारण हैं। प्लेस ऑफ सेफ्टी जैसी संस्थाओं में मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और व्यावसायिक प्रशिक्षण की कमी है। सरकार ने हाल ही में बजट में बाल सुधार गृहों के लिए धन बढ़ाया है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार जरूरी है।
15 juvenile delinquents escaped from Ambikapur Place of Safety after attacking a guard
अंबिकापुर जिला प्रशासन ने बैठक बुलाई है, जिसमें संस्था प्रबंधन, पुलिस और विभागीय अधिकारी शामिल होंगे। फरार बालकों को पकड़ने के लिए ड्रोन और डॉग स्क्वायड का भी सहारा लिया जा सकता है। शहरवासी सतर्क हो गए हैं। यह घटना न केवल सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि किशोर न्याय प्रणाली की कमजोरियों को भी रेखांकित करती है। तलाश अभियान जारी है, और जल्द ही बाकी बालकों को पकड़ने की उम्मीद है।
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