attempted to have his name removed from the voter list: सरगुजा:अंबिकापुर। अंबिकापुर शहर के बरेजपारा निवासी कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव परवेज आलम गांधी ने अपने मताधिकार की सुरक्षा के लिए थाना अंबिकापुर में औपचारिक शिकायत दर्ज की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अज्ञात व्यक्ति द्वारा उनके खिलाफ झूठी और दुर्भावनापूर्ण जानकारी फैलाई जा रही है, जिसके जरिए मतदाता सूची से उनका नाम कटवाने का सुनियोजित प्रयास किया गया। यह घटना लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार मानी जा रही है, खासकर आगामी नगर निगम चुनावों के संदर्भ में।
परवेज आलम गांधी ने शिकायत में स्पष्ट किया कि उनका नाम मतदाता सूची में सक्रिय है और वे बरेजपारा क्षेत्र के एक प्रमुख मतदाता हैं। अज्ञात व्यक्ति ने निर्वाचन कार्यालय को गुमराह करने के लिए फर्जी दस्तावेज या आपत्तियां दाखिल कीं, जिसमें उनका नाम मृत या स्थानांतरित घोषित करने का प्रयास किया गया। कांग्रेस नेता ने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि यह अल्पसंख्यक समुदाय के वोट बैंक को कमजोर करने की चाल है।
यह घटना छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में हालिया मतदाता सूची विवाद से जुड़ी हुई प्रतीत होती है। पिछले सप्ताह स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र में 1143 मतदाताओं के नाम काटे जाने का मामला सामने आया था, जिसमें कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का दावा है कि भाजपा समर्थक फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर वैध मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश कर रहे हैं। परवेज आलम गांधी का मामला इसी श्रृंखला का हिस्सा लगता है, जहां अल्पसंख्यक नेता को निशाना बनाया गया।
कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव के रूप में परवेज आलम गांधी सक्रिय राजनीति में हैं और स्थानीय स्तर पर पार्टी की अल्पसंख्यक इकाई को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं। वे बरेजपारा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र से हैं, जहां अल्पसंख्यक वोटरों की संख्या उल्लेखनीय है। इस शिकायत के बाद कांग्रेस ने जिला निर्वाचन अधिकारी को भी पत्र लिखा है, जिसमें नाम कटवाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने और जांच की मांग की गई है।
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भारतीय निर्वाचन कानून के तहत मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 का उपयोग किया जाता है, लेकिन इसके लिए सत्यापन और जांच अनिवार्य है। परवेज आलम ने अपनी शिकायत में पुलिस से मांग की है कि अज्ञात आरोपी की पहचान कर सख्त कार्रवाई हो। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी शिकायतें आईपीसी की धारा 171 (झूठी जानकारी से चुनाव प्रभावित करना) और 506 (धमकी) के तहत दर्ज हो सकती हैं। थाना अंबिकापुर ने शिकायत संज्ञान में ले ली है और प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है।
स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में कोई भी परिवर्तन बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की सत्यापन रिपोर्ट पर ही होता है। यदि फर्जीवाड़ा साबित होता है, तो आरोपी को निर्वाचन आयोग के नियमों के उल्लंघन के लिए दंडित किया जा सकता है। परवेज आलम ने मतदाताओं से अपील की है कि वे अपनी वोटर आईडी और सूची की जांच करें तथा संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दें।
कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को राज्य स्तर पर उठाने का फैसला किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट कर कहा कि यह लोकतंत्र पर हमला है और पार्टी सभी प्रभावित मतदाताओं के साथ खड़ी है। अंबिकापुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर धरना देने की चेतावनी दी है। अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने विशेष अभियान शुरू किया है, जिसमें घर-घर जाकर मतदाता जागरूकता फैलाई जा रही है। परवेज आलम गांधी ने कहा, “मेरा मताधिकार मेरा संवैधानिक अधिकार है, इसे छीनने की कोई साजिश बर्दाश्त नहीं होगी।”
यह घटना छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी समान शिकायतों को जन्म दे रही है। सूरगुजा संभाग में अभनपुर जैसे क्षेत्रों में भी 21 हजार नाम काटने की खबरें हैं। विपक्ष का आरोप है कि सत्ताधारी दल चुनावी लाभ के लिए मतदाता सूची में हेरफेर कर रहा है। निर्वाचन आयोग ने राज्य स्तर पर दिशानिर्देश जारी किए हैं कि सभी आपत्तियों का पारदर्शी निपटारा हो। यदि यह सिलसिला जारी रहा, तो आगामी चुनावों में विवाद बढ़ सकता है।
परवेज आलम गांधी की शिकायत ने अंबिकापुर में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। पुलिस जांच के परिणाम से पता चलेगा कि यह व्यक्तिगत साजिश थी या व्यापक षड्यंत्र। मतदाताओं को सतर्क रहने की जरूरत है ताकि उनका हक सुरक्षित रहे।
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