गांधीनगर: रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर के घर बिना अनुमति धर्मसभा, पुलिस ने केस दर्ज किया : Gandhinagar: Religious gathering held without permission at retired deputy collector’s house

Uday Diwakar
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Gandhinagar: Religious gathering held without permission at retired deputy collector’s house: सरगुजा:​​​अंबिकापुर के गांधीनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत नमनाकला इलाके में रिटायर्ड महिला डिप्टी कलेक्टर ओमेगा टोप्पो के निवास पर बिना जिला प्रशासन की अनुमति के एक धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस सभा में मुख्य रूप से ईसाई समुदाय के लोग शामिल थे, साथ ही अन्य धर्मों के सदस्य भी मौजूद बताए गए। आयोजकों ने स्थानीय नियमों का उल्लंघन करते हुए कोई पूर्व अनुमति नहीं ली, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया।

हिंदू संगठनों की शिकायत

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय हिंदू संगठनों ने तत्काल विरोध दर्ज कराया और गांधीनगर थाना पुलिस को सूचना दी। संगठनों का आरोप था कि यह अवैध धार्मिक आयोजन सामाजिक सौहार्द को भंग कर सकता है, खासकर जब बिना अनुमति के बड़े पैमाने पर लोग एकत्रित हो रहे थे। उनकी शिकायत पर पुलिस ने फौरन कार्रवाई की, जो क्षेत्रीय शांति बनाए रखने में सहायक सिद्ध हुई।

गांधीनगर थाना प्रभारी प्रवीण द्विवेदी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और सभा को तुरंत रोक दिया। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया, आयोजनकर्ताओं को कड़ी समझाइश दी और प्रमुख लोगों को थाने ले आए। पुलिस ने शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आसपास के लोगों से अपील की, जिससे कोई अप्रिय घटना घटने से बच गई।

पुलिस ने रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर ओमेगा टोप्पो सहित सभा से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ IPC की धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली। थाना प्रभारी द्विवेदी ने पुष्टि की कि विवेचना जारी है और आवश्यकता पड़ने पर अन्य नाम भी जोड़े जा सकते हैं। नायब तहसीलदार की भी मौजूदगी में कार्रवाई की गई, जो प्रशासनिक स्तर पर अनुमति की अनिवार्यता को रेखांकित करती है।

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ओमेगा टोप्पो छत्तीसगढ़ प्रशासन की पूर्व वरिष्ठ अधिकारी रही हैं, जिनका निवास नमनाकला रिंग रोड पर मंजूषा अकादमी के पास स्थित है। अंबिकापुर, जो सूरगुजा संभाग का प्रमुख शहर है, में धार्मिक आयोजनों के लिए जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना अनिवार्य है, विशेषकर जब 50 से अधिक लोग शामिल हों।

स्थानीय सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गए, जिनमें पुलिस कार्रवाई और सभा रुकवाने के दृश्य दिखाए गए। हिंदू संगठनों ने इसे धर्मांतरण प्रयासों से जोड़ने का आरोप लगाया, हालांकि पुलिस ने अभी तक आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की। विपक्षी संगठनों ने प्रशासन की सतर्कता की सराहना की, जबकि कुछ ने बड़े आयोजनों पर नियंत्रण की मांग की।

Gandhinagar: Religious gathering held without permission at retired deputy collector’s house

भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (अवज्ञा से सार्वजनिक उपद्रव) और स्थानीय पुलिस एक्ट के तहत बिना अनुमति धार्मिक सभाएं प्रतिबंधित हैं। छत्तीसगढ़ में धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम भी ऐसे आयोजनों पर सख्ती बरतता है, यदि वे जबरन धर्मांतरण का संदेह पैदा करें। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।

सूरगुजा संभाग में धार्मिक सौहार्द बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा है, जहां आदिवासी बहुल इलाकों में ऐसे आयोजन विवादास्पद हो जाते हैं। अंबिकापुर पुलिस ने स्पष्ट किया कि भविष्य में अनुमति प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा। यह घटना स्थानीय निवासियों के बीच जागरूकता बढ़ाने वाली साबित हुई।

पुलिस जांच में सभा के उद्देश्य, उपस्थित लोगों की संख्या और संभावित धर्मांतरण की भूमिका का पता लगाया जा रहा है। प्रशासन ने शांति बनाए रखने के निर्देश जारी किए हैं। ओमेगा टोप्पो की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है। क्षेत्र में स्थिति सामान्य बनी हुई है।

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